अमेरिका में करोड़ों कमाकर भी स्वदेश और जन्मभूमि को रखा सदैव याद, महान दानवीर सेठ भंवरलाल नवल हुए दुनिया से विदा, छोटी खाटू निवासी व अमेरिका प्रवासी रैगर महान भामाशाह भंवरलाल रैगर के निधन पर रैगर समाज ने की शोकसभा आयोजित, दी श्रद्धांजलि
अमेरिका में करोड़ों कमाकर भी स्वदेश और जन्मभूमि को रखा सदैव याद, महान दानवीर सेठ भंवरलाल नवल हुए दुनिया से विदा,
छोटी खाटू निवासी व अमेरिका प्रवासी रैगर महान भामाशाह भंवरलाल रैगर के निधन पर रैगर समाज ने की शोकसभा आयोजित, दी श्रद्धांजलि
लाडनूं (kalamkala.in)। रैगर समाज के कोहिनूर हीरा व रैगर समाज रत्न कहे जाने वाले भामाशाह अमेरिका प्रवासी भंवरलाल नवल के देहावसान हो जाने पर यहां श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाकर उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। छोटी खाटू निवासी भंवरलाल नवल का अमेरिका में व्यवसाय है। इन्होंने स्वदेश में करोड़ों रुपए विभिन्न स्थानों पर जन हित, लोकोपकारी एवं समाज हित के कार्य किए। यहां उनके निधन पर आयोजित शोकसभा में उन्हें सहज व सरल व्यक्तित्व के धनी, रैगर समाज के दिलों पर राज करने वाले और कलियुग के दानवीर महामानव बताया और कहा कि रैगर समाज का महान दानवीर भंवर लाल नवल को उन्होंने खो दिया। उनके प्रकृति में लीन होने पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना की गई कि इस महान पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें और शोक-संतप्त परिजनों को यह असह्य वज्रपात को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। गौरतलब है कि लाडनूं रैगर समाज के लिए भी उन्होंने दिल खोलकर सहयोग किया और एक करोड़ की लागत से समाज के भवन का निर्माण करवा कर समाज को सुपुर्द किया था। उनका देहावसान न्यूयॉर्क अमेरिका में 19 मई को सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) हो गया था।
श्रद्धांजलि सभा में नोरतन मल तुनगरिया, रावताराम नवल, बाबूलाल मौर्य, सुखाराम तुनगरिया, भंवरलाल फुलवारिया, भागचंद बालोटिया, हजारी मल मुसलपुरिया, बाबूलाल तुनगरिया, प्रकाश चंद्र मौर्य, भगवती प्रसाद मुसलपरिया, श्री राम फुलवारियां, विनोद, ललित, मनीष फुलवारिया, दिलीप तुनगरिया, धर्माराम, कन्हैयालाल मौर्य, भगवानराम फुलवारिया, कन्हैयालाल धौलपुरिया आदि स्थानीय रैगर समाज के प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
भंवरलाल नवल का जीवन-परिचय
भवंरलाल नवल का जन्म फरवरी 1947 में नागौर जिले के ग्राम छोटी खाटू में हजारीमल नवल (खटनावलिया) के घर हुआ। इनकी माता का नाम मनोहर देवी है ।पिता हजारीमल के पांच पुत्र एवं तीन पुत्रियों में से भंवरलाल नवल सबसे बड़े पुत्र थे। हजारीमल की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। भवंरलाल नवल ने प्राथमिक एवं सैकण्ड्री तक की शिक्षा छोटी खाटू में ही सरकारी स्कूल में प्राप्त की। सैकण्ड्री स्कूल पास करने के बाद नवल वर्ष 1964 उच्च शिक्षा के लिए जोधपुर गए। एस.एम.के. कॉलेज जोधपुर में दाखिला लिया। इस दौरान भंवरलाल नवल रैगर समाज के ज्ञानगंगा छात्रावास, नागौरी गेट में रहे। छात्रावास संस्थापक एवं प्रबन्धक स्वामी गोपालरामजी महाराज उन्हें भरपूर सहयोग और प्रोत्साहन दिया। घर की आर्थिक परिस्थितियां तथा पढ़ाई में कमजोर होने से वर्ष 1965 में वे पढ़ाई छोड़ कर वापस अपने गांव छोटी खाटू आ गए। वर्ष 1966 में उन्हें अध्यापक की नौकरी मिली। प्राईमरी स्कूल ग्राम फरड़ौद जिला नागौर में अध्यापक नियुक्त हुए और वहां लगभग छ: माह नौकरी की। फिर नौकरी छोड़ कर राजस्थान राज्य क्रय विक्रय संघ जयपुर में लिपिक के पद पर नियुक्त हुए। नौकरी के दौरान वे आलनियावास जिला नागौर निवासी धन्नाराम कुरड़िया के सम्पर्क में आए। धन्ना राम कुरड़िया का मुम्बई में चमड़े से निर्मित उत्पादों का बहुत बड़ा कारोबार था। उनका नाम विदेशी निर्यातकों में था। भंवरलाल नवल सन् 1968 में लिपिक की नौकरी छोड़कर मुम्बई चले गए और धन्नाराम कुरड़िया के वहां सेल्समेन लग गए। भंवरलाल नवल ने अपनी मेहनत और लगन से अपने आपको एक सफल सेल्समैन साबित किया। इस वजह से इन्हें निर्यात का कार्य भी सौंप दिया गया। धन्नाराम कुरड़िया के वहां दो साल नौकरी की। वहां से नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने अपना स्वयं का इसी लाईन का व्यापार मुम्बई में शुरू किया। धीरे-धीरे निर्यात के क्षेत्र में प्रवेश किया। सन् 1977 तक उन्होंने अपना धन्धा अच्छा जमा लिया। सन् 1977 से 1981 तक भंवरलाल नवल व्यापार के सम्बंध में अमेरिका गए और वहीं रहे। वर्ष 1982-83 में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इससे भंवरलाल नवल को भारत से अमेरिका आने जाने की सुविधा मिल गई। अमेरिका में चमड़े के उत्पादों का व्यापार करते हुए उनका ध्यान दूसरे धन्धे की तरफ गया। पुराने मकानों को खरीद कर उसकी मरम्मत करके पुन: बेचने के धन्धे में उन्होंने रूचि ली। इसमें उन्हें अच्छा लाभ मिला। भवंरलाल नवल की रैगर समाज में प्रतिष्ठा शीर्ष पर पहुंच गई। अमेरिका में भी बड़े व्यापारियों की सूची में उनका नाम जुड़ गया। वे कई करोड़ों के मालिक बन गए।
धर्मार्थ ट्रस्ट ‘हजारीमल मनोहरीदेवी चेरिटेबल ट्रस्ट’ बनाया
वर्ष 1994 में भंवरलाल नवल ने एक ट्रस्ट बनाया, जिसका नाम ‘हजारीमल मनोहरीदेवी चेरिटेबल ट्रस्ट’ रखा। ग्यारह सदस्यों के बोर्ड में भंवरलाल नवल की माता श्रीमती मनोहरीदेवी अध्यक्ष बनाई गई और ट्रस्ट का सारा कार्य भंवरलाल नवल स्वयं देखते थे। शेष सदस्यों की नियुक्ति अध्यक्ष द्वारा ही की जाती थी। इस ट्रस्ट का उद्देश्य समाज सुधार के कार्यों को प्रोत्साहन देना तथा शिक्षा को बढ़ावा देना रहा। नवल ने ज्यादातर धन सामुहिक विवाह तथा शिक्षा पर व्यय किया। सामूहिक विवाह का आयोजन 21 फरवरी, 2000 में दिल्ली में 21 जोड़ों से शुरू किया। इस आयोजन में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, सुरेन्द्रपाल रातावाल, मीरां कंवरिया तथा मोतीलाल बाकोलिया सम्मिलित हुए। दिल्ली निवासी ज्ञानचन्द्र खटनावलिया ने व्यवस्था की कमान संभाली थी। इसके पश्चात् 7 नवम्बर, 2000 को नागौर में 56 जोड़ों का सामूहिक विवाह सम्पन्न करवाया। इसमें मुख्यमंत्री राजस्थान अशोक गहलोत, छोगाराम बाकोलिया मंत्री राजस्थान सरकार तथा स्वामी गोपालरामजी महाराज प्रमुख रूप से शरीक हुए। 29 जनवरी, 2001 को मुम्बई में 20 जोड़ों का सामूहिक विवाह सम्पन्न करवाया। 27 फरवरी, 2002 को जोधपुर (राज.) में 65 जोड़ों का सामूहिक विवाह ट्रस्ट द्वारा सफलतापूर्वक सम्पन्न करवाया गया। इसमें मुख्य अतिथि धर्मदास शास्त्री पूर्व सांसद थे। 17 फरवरी, 2002 को छोटी खाटू जिला नागौर में 27 जोड़ों का सामूहिक विवाह का ट्रस्ट द्वारा आयोजन किया गया। इसमें छोगाराम बाकोलिया मंत्री राजस्थान सरकार मुख्य अतिथि थे। वर्ष 1994 में हजारीमल मनोहरदेवी चेरिटेबल ट्रस्ट ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के नि:शुल्क इलाज के लिए ठक्करबापा कॉलोनी, मुम्बई में चिकित्सालय की स्थापना की। यह चिकित्सालय वर्ष 1994 से निरंतर सेवारत है। प्रतिदिन औसतन 300 बीमार लोगों को दवाइयां तथा परामर्श नि:शुल्क दिया जा रहा है। भवन, पूरा स्टाफ तथा दवाइयों का समस्त खर्चा ट्रस्ट उठाता है। इसके अलावा रैगर समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की बेटियों की शादियों के लिए ब्यावर, पुष्कर, किशनगढ़, भीलवाड़ा, उदयपुर, पाली तथा चाकसू (जयपुर) आदि कई स्थानों पर सामूहिक विवाह का आयोजन कर पूर खर्चा ट्रस्ट ने उठाया। प्रत्येक सामूहिक विवाह में जोड़े को हजारीमल मनोहरदेवी चेरिटेबल ट्रस्ट की तरफ से दहेज में 1 पलंग, 2 कुर्सियां, 1 सेन्टर टेबल, पीतल-स्टील व कांसी के 31 बर्तन, 1 स्टोव, 1 सिलाई मशीन, 1 घड़ी, 2 तकिये, रजाई, गद्दा, 2 बेडशीट, दुलहन के कपड़े, डेढ तोला सोने के जेवर तथा 250 ग्राम चांदी के जेवर दिए गए। इसके अलावा समस्त मेहमानों का खाना, टेन्ट, लाईट तथा डेकोरेशन सहित तमाम खर्चा ट्रस्ट द्वारा वहन किया जाता रहा है। भंवरलाल नवल ने लगभग 2500 जोड़ों का सामूहिक विवाह अकेले ने सम्पन्न करवाये हैं। एक व्यक्ति द्वारा सामूहिक विवाह सम्पन्न करवाने का यह सम्भवत: विश्व रिकार्ड है।भंवरलाल नवल ने रैगर समाज के अलावा दूसरी जातियों के भी गरीब परिवारों की लड़कियों के विवाह करवाए हैं। वर्ष 2002-2003 में नवल ने नागौर तथा बीकानेर जिले में रहने वाले ब्राह्मण परिवारों की दो युवतियों का विवाह सम्पन्न करवाया। उनके विवाह का सम्पूर्ण खर्चा रूपये 70,000.00 नवल ने उठिया। वर्ष 2004 में नागौर जिले के नाथ सम्प्रदाय की 4 लड़कियों की शादियां ट्रस्ट द्वारा सम्पन्न करवाई गई, जिसका पूरा खर्चा 1 लाख 50 हजार भंवरलाल नवल ने वहन किया। इसी तरह वर्ष 2004 में 15 भंगी समाज की युवतियों की शादियाँ करवाई, जिसका समस्त खर्चा रूपये 5 लाख 50 हजार ट्रस्ट ने अदा किया। इस तरह रैगर समाज के अलावा ब्राह्मण, नाथ तथा हरिजन समाज की लड़कियों के विवाह भी नवल ने सम्पन्न करवाए है। एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक विवाह पर रूपये 35,000.00 खर्च हुआ। इस तरह अब तक करोड़ों रूपये हजारीमल मनोहरदेवी चेरिटेबल ट्रस्ट ने सामूहिक विवाह पर खर्च करके गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की मदद की है। यह सिलसिला अब भी जारी है। नवल ने मिठूलाल उच्चैनिया (भीलवाड़ा, ग्राम आगूँचा, राजस्थान) की समाज सेवा से प्रभावित होकर हजारीमल मनोहरीदेवी चेरीटेबल ट्रस्ट में एक ट्रस्टी का कार्यभार सौंप रखा था। इसका सारा लेनदेन मिठूलाल द्वारा ही किया जाता है।
सामुहिक विवाह के अलावा समाज सेवा के विभिन्न कार्यों में योगदान
भंवरलाल नवल ने केवल सामूहिक विवाह ही अपने खर्चे से सम्पन्न नहीं करवाए, बल्कि सामाजिक सेवा के अन्य क्षेत्रों शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अकाल राहत में भी खुले दिल से धन लगाकर विकास में भागीदारी निभाई है। वर्ष 2003 में मालपुरा जिला टोंक (राज.) में 101 जोड़ों का सामूहिक विवाह का भव्य आयोजन किया गया। यह सामूहिक विवाह का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन है। इसका पूरा खर्चा भंवरलाल नवल ने उठाया। सामुहिक विवाह के अतिरिक्त मालपुरा में स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के 100 बच्चों को स्कूल की ड्रेसें भी वितरित की। वर्ष 2002 में अपने जन्म स्थान छोटी खाटू में भंवरलाल नवल के कन्या सैकण्ड्री स्कूल भवन का निर्माण करवाया। इसमें 16×20 वर्ग फुट के 16 कमरे बनवाये। इस भवन निर्माण पर रूपये 25 लाख व्यय हुए। वर्ष 2004 में भवन बनकर तैयार होने पर इसे शिक्षा विभाग को सुपुर्द कर दिया गया। अब यह स्कूल ‘श्री हजारीमल भंवरलाल नवल राजकीय कन्या सैकण्ड्री स्कूल, छोटी खाटू’ नाम से संचालित हो रही है। वर्ष 2002 में रूपये 11 लाख की लागत से एक बड़ा हॉल 16×12 वर्ग फुट का राजकीय कन्या हायर सैकण्ड्री स्कूल, डेह जिला नागौर में बनवा कर दिया। वर्ष 2003 में एक मारूति वेन तथा जेनरेटर राजकीय अस्पताल छोटी खाटू को भेंट की। भंवरलाल नवल ने 14 अप्रल, 2004 को श्री ज्ञानगंगा छात्रावास नागौरी गेट, जोधपुर को 50 पलंग, 50 कुर्सियां तथा 50 टेबलें भेंट की।नवल अपने छात्र जीवन में इस छात्रावास में एक वर्ष तक रह चुके थे। भंवरलाल नवल ने झालावाड़ में 1000 कम्बलों का वितरण किया। भंवरलाल नवल द्वारा दिनांक 27.02.2002 को की गई घोषणा के मुताबिक खेतानाडी छात्रावास, जाधपुर में 40×70 वर्ग फुट का एक भव्य सभा भवन रूपये 21 लाख की लागत से बनवा कर दिनांक 09.02.2005 को समाज को समर्पित किया। जिसका उद्घाटन श्रीमती मनोहरीदेवी पत्नी स्व. हजारीमल नवल के कर-कमलों से किया गया। विशिष्ठ अतिथि भंवरलाल नवल थे। नवल ने कोटा में रैगर छात्रावास निर्माण के लिए 8 लाख रूपये का आर्थिक सहयोग दिया था।
शिखर पर पहुंच कर भी निरभिमान और सादगी पसंद थे नवल
भंवरलाल नवल मानवीय संवेदनाओं और करुणा के प्रतिरूप थे। वर्ष 2001, 2002 तथा 2003 में राजस्थान में पड़े भीषण अकाल में नागौर, चूरू तथा बीकानेर जिलों में नवल ने अनाज बांट कर गरीबों की मदद की और गांवों में घास (चारा) पहुंचा कर हजारों पशुओं को मौत के मुंह में जाने से बचाया था। अकाल राहत कार्यों में नवल ने तीन वर्षों में लगभग 30 लाख रूपये व्यय किये। 19 जून, 2008 को सेठ भंवरलाल नवल ने दौसा में बन रहे रैगर छात्रावास का शिलान्यास किया और 11 लाख रूपये का आर्थिक योगदान दिया। 20 जून, 2008 को चाकसू जिला जयपुर में 29 जोड़ों के सामुहिक विवाह आयोजन में भंवरलाल नवल ने 2 लाख रूपये विवाह समिति चाकसू को तथा 1 लाख रूपये धर्मशाला निर्माण हेतु एवं एक-एक हजार रूपये प्रणय सूत्र में बंधने जा रहे प्रत्येक जोड़े उपहारस्वरूप भेंट किए।नवल ने राजसमन्द, उदयपुर, चित्तैाड़गढ़ तथा भीलवाड़ा में रैगर छात्रावासों के निर्माण हेतु 11 लाख रूपये की राशि प्रारम्भिक तौर पर प्रदान की। सेठ भंवरलाल नवल द्वारा छोटी खाटू में 2 करोड़ रूपयों की लागत से हजारीमल मनोहरदेवी राजकीय चिकित्सालय का निर्माण करवाया । छोटू खाटू के पास शेरानी आबाद में भी विद्यालय में कमरों का निर्माण करवाया। दानवीर सेठ भंवरलाल नवल को रैगर समाज का भामाशाह माना जाता था। अमेरिका (न्यूयार्क) में बस जाने के बाद भी नवल अपनी मातृभूमि तथा अपने समाज को कभी नहीं भूले।