अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण ने दिए क्रोध-नियंत्रण, असफलता का सामना, आडंबर से मुक्ति तथा सफल जीवन जीने के सूत्र,
एक दिवसीय युवा अहिंसा प्रशिक्षण शिविर में सम्पन्न, 18 महाविद्यालयों के 85 विद्यार्थियों ने भाग

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान (डीम्ड विश्वविद्यालय) के अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में एक दिवसीय युवा अहिंसा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कुलपति प्रोफेसर बच्छराज दूगड़ ने बताया कि ‘युवा, सोशल मीडिया और जीवन मूल्य’ विषय पर आयोजित इस शिविर में राजस्थान के विभिन्न जिलों के 18 महाविद्यालय के 85 विद्यार्थियों ने भाग लिया। उन्होंने शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी संभागी विद्यार्थियों को अहिंसा प्रशिक्षण की आवश्यकता पर दिशाबोध दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने विद्यार्थियों को पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि समस्त विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है कि वे अपने जीवन में तीन संकल्पों को अवश्य ग्रहण करें। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में सद्भावना, नैतिकता का प्रयोग और नशामुक्ति का संकल्प करवाकर दीर्घ श्वास प्रेक्षा के प्रयोग करवाए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया और विद्यार्थियों के साथ क्रोध-नियंत्रण, असफलता का सामना, आडंबर से मुक्ति तथा सफल जीवन जीने के सूत्रों की चर्चा की। शिविर में युवाओं को डिजिटल अनुशासन, स्वस्थ जीवनशैली व नैतिक मूल्यों का संदेश प्रदान किया गया। शिविर में ‘युवा, सोशल मीडिया और जीवन मूल्य’ विषय पर विशेषज्ञों ने युवाओं को डिजिटल अनुशासन, स्वस्थ जीवनशैली व नैतिक मूल्यों का संदेश दिया।
ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक संवाद के लिए करें सोशल मीडिया का उपयोग
समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. के.एन. व्यास ने अपने सम्बोधन में कहा कि युवा अपार संभावनाओं से भरे हैं। यदि वे सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक संवाद के लिए करें तो स्वयं के साथ समाज और राष्ट्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते है। उन्होंने जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा को युवाओं को सही दिशा देने वाली बताया।विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़ ने विषय प्रवर्तन किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. लिपि जैन ने किया।
सोशल मीडिया के उपयोग पर निर्भर है उसका बुरा या अच्छा होना
दूसरे सत्र में डॉ. लिपि जैन ने कहा कि सोशल मीडिया न अच्छा है, न बुरा। उसका प्रभाव उपयोग करने के आधार पर निर्भर करता है। उन्होंने युवाओं से डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग सकारात्मक विचारों, ज्ञानार्जन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए करने तथा भ्रामक सूचनाओं से दूर रहने का आह्वान किया। प्रो. युवराज सिंह खंगारोत ने ‘स्वस्थ जीवनशैलीः आज से शुरूआत करें’ विषय पर व्याख्यान देते हुए संतुलित आहार, नियमित योग, व्यायाम, पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने योगाभ्यास भी करवाया। समापन सत्र में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिविर से उन्हें जीवन मूल्यों, अहिंसा, आत्मानुशासन व सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग की नई समझ मिली। संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। अंत में डॉ. बलबीरसिंह चारण ने आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविरों को युवाओं के व्यक्तित्व विकास व नैतिक चेतना निर्माण में महत्त्त्वपूर्ण सिद्ध होते हैं।







