लाडनूं के लगभग हर मुख्य सार्वजनिक स्थान पर चलती रहती है सांडों की लड़ाई,
कब मिलेगी मुक्ति आमजन को सांडों के इस मनमर्जी के विचरण और उत्पात से, लोग हो रहे भयभीत
लाडनूं (kalamkala.in)। आज लाडनूं का हर शहरवासी भयभीत है और यह भय किसी अपराधी का नहीं, बल्कि पूजनीय माने जाने वाले सांडों का है। लगभग हर क्षेत्र में बेसहारा सांडों का स्वच्छंद विचरण और उनकी आतंकित कर देने वाली लड़ाई देखने को मिल जाती है। बुधवार को सुबह-सुबह ही राहूगेट क्षेत्र में इन सांडों का झुंड आपस में भिड़ गया और लोगों को तितर-बितर कर दिया। यह शहर का सबसे प्रमुख स्थान है, लेकिन इनका आतंक सभी जगह मौजूद है। शहर में आचार्य श्री महाश्रमण के आगमन से पूर्व इन निराश्रित गौवंश सांडों को लेकर प्रशासन खासा चिंतित हुआ। एक समाजसेवी ने तो लाडनूं की श्री रामआनंद गौशाला की खिंदास ब्रांच में अपने आर्थिक सहयोग से नंदीशाला का निर्माण भी करवा दिया। नगर पालिका ने पिंजरे खरीद कर सभी बेसहारा सांडों गौवंश को पकड़ कर नंदीशाला में भेजने की कवायद भी शुरू की, लेकिन आचार्य श्री महाश्रमण के एक वर्ष से अधिक ‘योगक्षेम वर्ष प्रवास’ की अवधि भी आधे से अधिक बीतने को है, परन्तु फिर भी यहां के निवासियों को इन निराश्रित गौवंश से कोई छुटकारा नहीं मिल पाया। लाडनूं आने वाले सभी धार्मिक पर्यटक, श्रद्धालुजन और तेरापंथ के अनुयायी इस समस्या से लगातार रूबरू होते रहे हैं। समस्या जस की तस बनी हुई है। कहीं भी इन सांडों की समस्या में कोई कमी दिखाई नहीं दे रही है। चाहे सब्जी मंडी गांधी चौक हो या बस स्टेंड, राहूगेट हो या रेलवे स्टेशन, जावा बास हो या कुम्हारों का बास, कमल चौक मालियों का बास हो या हाईवे लगभग सभी जगहों पर बेसहारा गौवंश का बोलबाला है। भरे बाजार सरेआम इनका झगड़ा कभी किसी की जान पर बना सकता है। मोटर साइकिलों को गिराना-तोड़ना तो मामूली बात है। आज तक काफी लोगों को इन सांडों ने अस्पताल भी पहुंचा दिया। लाडनूं के हर व्यक्ति के मुंह पर यह सवाल तो मिल ही जाता है कि आखिर कब जागेगा प्रशासन, कब मिलेगी मुक्ति लोगों को सांडों की लड़ाई से, कब तक बनी रहेगी यह समस्या, क्यों नहीं चेत रहा है नगर पालिका प्रशासन?


