मनुष्य मात्र को सच्चाई का मार्ग दिखाता है आर्यसमाज का संगठन- डॉ. सैनी,
लाडनूं आर्य समाज मंदिर में ऋषि बोधोत्सव मनाया


लाडनूं (kalamkala.in)। स्थानीय आर्य समाज मंदिर मंदिर रविवार को ऋषि बोधोत्सव पर्व धूमधाम से मनाया गया। आर्य समाज के प्रधान जगदीश यायावर की अध्यक्षता में आयोजित इस विशिष्ट कार्यक्रम में संरक्षक मुनि ओमदास आर्य ने महर्षि दयानंद सरस्वती की विशेषताओं की जानकारी देते हुए मनुष्य मात्र के शारीरिक स्वास्थ्य और आत्मिक बल के लिए योग साधना को उपयोगी बताया। ओम् मुनि ने अष्टांग योग की व्याख्या करते हुए कहा कि यम और नियमों के पालन से ही जीवन सफल बन सकता है। आर्य समाज के प्रधान जगदीश यायावर ने बोध रात्रि की घटना पर प्रकाश डालते हुए दयानन्द के जीवन को बदलने के पूरे विवरण को वर्णित किया तथा सत्य और वेद को धारण करने, अंधविश्वास को त्याग करते हुए स्वयं, परिवार और फिर समाज को बदलने के लिए आगे आने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आर्य समाज का संगठन मनुष्य मात्र को सच्चाई का मार्ग दिखाता है। जब तक हम वेदों के बताए मार्ग को नहीं अपनाएंगे, तब तक मनुष्यता का भला नहीं कर पाएंगे। डॉ. यायावर ने बोधोत्सव के अवसर पर सभी आर्य सभासदों से अपने भीतर बोध जागृत करने और सद्मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इस अवसर पर डॉ. राजेन्द्र सिंह आर्य ने जीवन और समाज में विद्यमान अज्ञान के अंधकार को मिटाने के लिए ज्ञान की एक ही किरण काफी होती है। वेद के पढ़ने-पढ़ाने से भीतर ज्ञान का प्रकाश होता है। सुबोधचंद्र आर्य व सुरेन्द्र आर्य ने भी महर्षि दयानन्द द्वारा स्थापित आर्य समाज के नियमों का पालन करने की जरूरत बताई। कार्यक्रम से पूर्व विशेष यज्ञ व सत्संग किया गया। यज्ञ पुरोहित आर्य समाज के प्रधान डॉ. जगदीश यायावर सैनी रहे। इस अवसर पर तारा आर्य, पार्षद सुमित्रा आर्य व राधा देवी चौहान ने बोधोत्सव सम्बंधी गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में भंवर लाल ने भी एक भजन का गान किया। इस अवसर पर ओम मुनि, जगदीश यायावर, सुरेन्द्र प्रताप आर्य, सुमित्रा आर्य, तारा आर्य, डॉ. राजेन्द्र सिंह आर्य, सुबोधचंद्र आर्य, राधा देवी चौहान, महावीर स्वामी आदि उपस्थित रहे।






