आर्य वीर दल का रथ आज पहुंचेगा लाडनूं, होगा भव्य स्वागत, दस दिवसीय शिविर के लिए किया जाएगा आह्वान,
यश मुनि के नेतृत्व में नागौर व डीडवाना-कुचामन जिलों में रहेगा रथ-भ्रमण
लाडनूं (kalamkala.in)। आर्य वीर दल की रथयात्रा लाडनूं आर्य समाज मंदिर में रविवार 25 फरवरी को पहुंचेगी। यश मुनि के नेतृत्व में परबतसर, कुचेरा, नागौर, छोटी खाटू होते हुए यह रथ लाडनूं पहुंचेंगा। आर्य समाज लाडनूं के कोषाध्यक्ष मेघाराम स्वामी ने बताया कि आर्य वीर दल राजस्थान द्वारा विशाल प्रांतीय आत्म रक्षा एवं चरित्र निर्माण शिविर19 से 28 मई तक चितौड़गढ स्थित श्री गुरुकुल में होने जा रहा है। इसका उद्घाटन समारोह 19 मई मंगलवार को सायं 5 बजे और समापन समारोह व भव्य व्यायाम प्रदर्शन 28 मई गुरूवार को सायं 4 बजे किया जाएगा। सार्वदेशिक आर्य वीर दल के प्रांतीय संचालक भवदेव शास्त्री के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल आर्यवीर प्रशिक्षण शिविर को लेकर नागौर एवं डीडवाना-कुचामन जिलों में यह रथयात्रा आ रही है। इस शिविर में यश मुनि के साथ आर्यवीर दल के प्रांतीय प्रचारक भागचंद आर्य रहेंगे। नागौर से रथ के साथ नागौर जिला आर्य उप प्रतिनिधि सभा के प्रधान गजेंद्र परिहार एवं जिला मंत्री मोहन दिलोया भी साथ रहेंगे। लाडनूं में रथयात्रा का स्वागत आर्य समाज लाडनूं के प्रधान डॉ. जगदीश यायावर सैनी, संरक्षक ओम मुनि, कोषाध्यक्ष मेघाराम आर्य, मंत्री महावीर स्वामी, सुबोधचंद्र आर्य, सुमित्रा आर्य, हिसाब परीक्षक डॉ. राजेन्द्र सिंह आर्य, यज्ञ प्रभारी तारा आर्य, प्रचार मंत्री दयानन्द आर्य, पुस्तकालय अध्यक्ष अनोपचंद सांखला आद करेंगे और रथयात्रा में साथ रहेंगे।
शिविर में बालकों को आत्मरक्षा के गुर्गों के साथ मिलेगा आत्मिक, शारीरिक, बौद्धिक व नैतिक उत्थान
आर्य समाज लाडनूं के प्रधान/ अध्यक्ष डॉ. जगदीश यायावर सैनी ने बताया कि बप्पा रावल, राणा कुम्भा, राणा सांगा, महाराणा प्रताप, राणा रतनसिंह, महारानी पद्मिनी, मीराबाई, पन्नाधाय की बलिदानी भूमि और भामाशाह, शक्ति, भक्ति, त्याग की नमनीय धरा चित्तौड़गढ में स्वामी श्रद्धानन्दजी के बलिदान के शताब्दी वर्ष पर पूज्यपाद स्वामी व्रतानंदजी द्वारा प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में स्थापित श्री गुरूकुल एवं आर्य वीर दल राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में बालकों के सर्वांगीण विकास के लिए 19 मई से 28 मई तक 10 दिवसीय पूर्ण आवासीय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में 12 वर्ष आयु से कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए इस शिविर में बालकों को विशेष रूप से आत्मरक्षा के लिए जूड़ो-कराटे, आसन-प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, अस्त्र-शस्त्र, लाठी, भाला, तलवार, शूटिंग, लेजियम, डंबल्स आदि का प्रशिक्षण दिया जायेगा। राष्ट्र की युवा शक्ति को पाश्चात्य संस्कृति के प्रदूषण, मादक पदार्थों के सेवन, टी.वी. चैनलों, मोबाईल के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए, इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इससे बालकों को शारीरिक, आत्मिक, मानसिक, नैतिक उत्थान का लाभ मिलेगा।






