जाट समाज अब बंद करेगा बैस (वस्त्रों) का लेन-देन, रूढ़ियों को छोड़ने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय हुए,
कसुंबी जाखला में जाट समाज की बैठक, 5 प्रस्तावों पर 15 गौत्र के 150 जाट परिवारों ने लिया निर्णय, 7 सदस्यों की पालना समिति बनाई


लाडनूं (kalamkala.in)। नवसृजित ग्राम पंचायत कसुंबी जाखला के जाट समाज की प्रथम बैठक धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हुईं। बैठक में जाट समाज में व्याप्त विभिन्न सामाजिक कुरीतियों को छोड़ने व देनलेन को मर्यादित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में तय किया गया कि मायरा, छूछक, मकान की नींव भराई, मकर-संक्रांति पर्व, बच्चों के नामकरण जैसे शुभ मुहूर्त कार्यक्रमों के अवसर पर महिलाओं द्वारा दिए जाने वाले बैस (वस्त्र) की जगह नगद राशि देने, विवाह समारोह में घोड़ी (गीत) व तमाम तरह के अवसरों पर महिलाओं द्वारा गीत गुवाने पर बर्तन बंटवाने के स्थान पर मिठाई वितरित करवाने, तमाम तरह के कार्यक्रमों में महिलाओं द्वारा किसी भी प्रकार के वस्त्र, बैस की जगह नगद राशि का लेन-देन करने, गंगा स्नान करके आने पर पथवारी पर बैस बंद करने तथा मौखाण पर बैस की जगह नगद राशि दिये जाने के पांच प्रस्तावों पर चर्चा एवं विचार-विमर्श करके 15 गोत्र के 150 जाट परिवारों ने इन सभी रूढ़िवादी परम्पराओं में सुधार करने की बात कही और 7 सदस्यों की पालना समिति का गठन किया गया। इस पालना समिति में गोविंद राम गढ़वाल, भूरा राम चंदेलिया, एडवोकेट लक्ष्मण राम, गणेशा राम पुनिया व मांगी लाल दुसाद को शामिल किया गया है।बैठक में नथूराम, गिरधारी राम, किशनाराम मंडीवाल, भगवाना राम, लक्ष्मण राम पुनिया, जगदीश प्रसाद घिंटाला, राम गोपाल बिडियासर, लक्ष्मण नेहरा, पूर्णा राम, आशा राम, फतू राम, भींवाराम चंदेलिया, लच्छी राम बीरडा, राजेंद्र भिडासरा, दुर्गा राम, राम निवास, छोटू राम व ओम प्रकाश सहित काफी संख्या में जाट समाज के लोग मौजूद थे।






