आर्य समाजों की चेतना सतत् बनी रहे और गतिविधियों में कोई कमी नहीं आने पाए- आचार्य जीववर्द्धन शास्त्री,
आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान की प्रांतीय वर्चुअल संगोष्ठी आयोजित, लाडनूं आर्य समाज का किया गया जिक्र, फरवरी-मार्च के कार्यक्रमों की सफलता पर हुआ विचार
लाडनूं/ जयपुर (kalamkala.in)। आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान की प्रदेश स्तरीय वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन शनिवार 14 फरवरी को किया गया। इस फाल्गुन/ फरवरी माह की मासिक ऑनलाइन बैठक में महर्षि दयानन्द जन्मोत्सव एवं बोध दिवस पर सम्पन्न विशेष कार्यक्रमों की जानकारी, आर्य मार्तण्ड सदस्यता अभियान, जनवरी माह के कार्यक्रमों की समीक्षा तथा फ़रवरी व मार्च महीने के होने वाले आयोजनो की जानकारी प्रदान की गई व चर्चा की गई।
ये रहेंगे फरवरी व मार्च महिनों के कार्यक्रम
संगोष्ठी में बताया गया कि 22-23 फरवरी को उदयपुर स्थित नवलखा महल, गुलाब बाग में ‘राष्ट्र मंदिर लोकार्पण एवं सत्यार्थ प्रकाश महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। 24 फरवरी* से 1 मार्च तक अजमेर के ऋषि उद्यान में ध्यान, योग, स्वाध्याय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा। 28 फरवरी व 1 मार्च को जयपुर स्थित दशहरा मैदान में ‘गोरक्षा महायज्ञ’ का आयोजन किया जाएगा। 19 मार्च से 21 मार्च तक भीनमाल में वैदिक नववर्ष एवं आर्य समाज स्थापना दिवस पर आयोजित प्रान्तीय आर्य महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। 22 मार्च को अजमेर में ‘सत्य स्थल’ का लोकार्पण समारोह आयोजित होगा। इन सभी गतिविधियों को लेकर सभा के पदाधिकारियों के प्रवास, संभाग अनुसार प्रचार रथ यात्रा की योजना, सभी आर्य समाजों में आर्य वीर दल अधिष्ठाता की नियुक्ति व शाखा संचालन, अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती के बलिदान शताब्दी की विशेष गतिविधियों का आयोजन व 22 फरवरी को जन्मोत्सव पर प्रश्नोत्तरी व चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित किया जाने के अलावा आर्य वीर दल राजस्थान के प्रान्तीय शिविर 19 मई से 28 मई तक श्री गुरुकुल चितौड़गढ़ में प्रत्येक जिले की सहभागिता सुनिश्चित किए जाने पर विचार-विमर्श किया गया। संगोष्ठी में प्रारम्भ के 10 मिनट में महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के जीवन पर आधारित गीत, कविता, संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया। 15-15 मिनट के लिए सभी संभागों के उपप्रधानों द्वारा विवरण प्रस्तुत करने के साथ अन्य सुझाव व विचार प्रकट किए गए।
जनांदोलन चलाएंगे अजमेर की दयानन्द चैयर को लेकर
आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान के मंत्री आचार्य जीववर्धन शास्त्री ने सभी कार्यक्रमों में प्रत्येक आर्य समाज से उपस्थिति की आवश्यकता बताई तथा अजमेर के महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय में स्थापित दयानंद चेयर को समाप्त करने की साज़िश की जानकारी सबको देते हुए इसके लिए प्रदेश-व्यापी आंदोलन छेड़े जाने और किसी भी हालत ऋषि दयानन्द और वैदिक साहित्य व व्याकरण सम्बंधी शोध आदि कार्यों को बंद होने से बचाने का आह्वान किया। उन्होंने प्रोफेसर को नहीं हटाने अथवा दूसरा प्रोफेसर लगाने और दयानन्द चैयर के काम को बराबर संचालित किए जाने की मांग पर जोर दिया। लाडनूं आर्य समाज प्रधान डॉ. जगदीश यायावर सैनी ने अजमेर के विश्वविद्यालय में दयानन्द चैयर को लेकर पूरे प्रदेश में कलेक्टरों व उपखंड अधिकारियों को एक साथ ज्ञापन दिए जाने का सुझाव दिया। आचार्य जीववर्धन ने अपने वक्तव्य के दौरान आर्य समाज लाडनूं के प्रधान जगदीश यायावर, कोषाध्यक्ष मेघाराम आर्य, संरक्षक ओम मुनि आदि का नाम लेते हुए उन्होंने आर्य समाज को कब्जे की नियत धारियों के कब्जे से मुक्त करवाने और सारा कामकाज संभाल कर संगठन को मजबूती से खड़ा करने की सराहना की। उन्होंने हनुमानगढ़ आर्य समाज के ताले खुलवाने की भी जानकारी दी।
समस्त आर्य समाजों को विवाद रहित बनाया जाएगा
आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान के प्रधान जयसिंह गहलोत ने प्रदेश की सभी आर्यसमाजों के सक्रिय होने और निरन्तर कार्यरत रहने की सराहना की तथा चेतना में कोई कमी नहीं आने देने तथा फरवरी व मार्च के प्रदेश भर में आयोज्य कार्यक्रमों में सभी से अधिकतम भागीदारी निभाने का आह्वान किया। पूर्व प्रधान किशनलाल गहलोत ने भी आर्य समाजों और प्रतिनिधि सभा की गतिविधियों पर संतोष व्यक्त किया तथा आर्य समाज में कहीं भी कोई विवाद हो तो उसकी सूचना दें, ताकि उसका निपटारा किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे महर्षि के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने भी लाडनूं आर्य समाज का जिक्र किया। इसी प्रकार अशोक आर्य व अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। माउंट आबू स्थित गुरुकुल के स्वामी ओमानन्द सरस्वती ने अंत में आशीर्वचन प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन गगेन्द्र सिंह आर्य जैसलमेर ने किया। संगोष्ठी में लाडनूं से जगदीश यायावर, मेघाराम स्वामी व डॉ. राजेन्द्र सिंह आर्य शामिल रहे। इनके अलावा संगोष्ठी में अशोक आर्य, बृजेश कुमार, बीरबल सिंह, डॉ. लाजपति शर्मा, डॉ. रजनीकांत आर्य, गौवर्धन सिंह, जय सिंह, केवलचन्द आर्य, मानसिंह, नर्वदा आर्य, नवीन मिश्रा, प्रदीप आर्य, राजेश सिंह, सत्यम आर्य, सवाई आर्य, सुखलाल, अशोक टोडावल, विक्रम सिंह, विमला मित्तल, विशाल साबू, विश्वामित्र सोनी, यतिंद्र शास्त्री आदि उपस्थित रहे।






