लाड़नूं में राजस्थानी साहित्य में प्रकृति चित्रण और पर्यावरणीय चेतना पर एक दिवसीय परिसंवाद 30 जून को

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भारत सरकार की साहित्य अकादेमी और सुभाष बोस स्कूल द्वारा आयोजित

Ladnun kalamkala.in । भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से सम्बद्ध साहित्य अकादेमी नई दिल्ली और सुभाष बोस शिक्षण संस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 30 जून को एक दिवसीय परिसंवाद कार्यक्रम आयोजित होगा। आयोजन के संयोजक रामगोपाल मील ने बताया कि ” राजस्थानी साहित्य में प्रकृति चित्रण एवम् पर्यावरणीय चेतना” विषयक इस आयोजन में राजस्थानी भाषा के ख्यातनाव रचनाकार भाग लेंगे। स्टेशन रोड़ स्थित रोडा भवन में आयोज्य इस परिसंवाद का उदघाटन सत्र 30 जून 2022 को प्रातः 10 बजे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.सोहनदान चारण के मुख्य आतिथ्य में और प्रधानाचार्य भँवरलाल मील की अध्यक्षता में होगा। लाड़नूं के वरिष्ठ रचनाकार रामकुमार तिवाड़ी के सारस्वत सान्निध्य में बीज भाषण साहित्य अकादेमी के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक मधु आचार्य ” आशावादी” व स्वागत वक्तव्य अकादेमी के सह-संपादक ज्योतिकृष्ण वर्मा देंगे।इसके बाद प्रथम सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.शारदा कृष्ण की अध्यक्षता में आयोजित आयोजन में उदयपुर के डॉ.दिनेश पांचाल ‘ राजस्थानी कथा साहित्य में प्रकृति चित्रण व पर्यावरण चेतना’ , रायसिंहनगर की किरण बादल ‘ राजस्थानी ललित निबन्ध में प्रकृति चित्रण व पर्यावरण चेतना ‘ और बीकानेर के गौरीशंकर प्रजापत “राजस्थानी काव्य में प्रकृति चित्रण व पर्यावरण चेतना” पर आलेख पाठ करेंगे। संयोजक रामगोपाल मील ने बताया भोजनावकाश के बाद दोपहर ढाई बजे श्रीडूँगरगढ़ के वरिष्ठ कथाकार प्रो.डॉ.मदन सैनी के अध्यक्षता में द्वितीय सत्र होगा।जिसमें सुजानगढ़ के चर्चित साहित्यकार डॉ.घनश्याम नाथ कच्छावा ” राजस्थानी कथेतर साहित्य में प्रकृति चित्रण व पर्यावरण चेतना” , उदयपुर की डॉ.रीना मैनारिया ‘राजस्थानी लोक साहित्य मैं प्रकृति चित्रण व पर्यावरण चेतना और हनुमानगढ़ के डॉक्टर भूपेंद्र सिंह राजस्थानी आधुनिक साहित्य में प्रकृति चित्रण व पर्यावरण चेतना पर आलेख पाठ करेंगे ।इसके बाद परिसंवाद कार्यक्रम का समापन होगा। इस एक दिवसीय परिसंवाद कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा हैं।

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Author: kalamkala

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