10 जुलाई से सो रहे हैं देवता, अब 10 जुलाई से 4 नवंबर तक कोई सावा मूहूर्त नहीं

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लाडनूं। इस सीजन का आखिरी सावा 9 जुलाई काे रहेगा। इससे एक दिन पहले 8 जुलाई को भड़ल्या नवमी काे अबूझ मुहूर्त रहेगा। इस दिन अधिक शादियां होंगी। इस सीजन में अब सिर्फ 11 दिन और शहनाई बजेगी। 10 जुलाई से देव सो जाएंगे। फिर 4 माह बाद नवंबर में देवउठनी एकादशी का सावा होगा।

हालांकि, शुक्र तारे के अस्त होने से विधिवत लग्न मुहूर्त 28 नवंबर से शुरू होंगे। यानी भड़ल्या नवमी के बाद विवाह मुहूर्त शुरू होने के लिए 140 दिन इंतजार करना होगा। हालांकि 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर अबूझ मुहूर्त में कई जोड़े दाम्पत्य सूत्र में बंधेंगे।

इस बार चातुर्मास का एक दिन कम, 14 जुलाई से सावन
10 जुलाई को देवशयनी व 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी होने से भगवान श्रीहरि 117 दिन विश्राम करेंगे। पिछले साल 118 दिन विश्राम किया था। 2020 में अधिकमास होने से चातुर्मास की अवधि 148 दिन की थी। देवउठनी एकादशी 4 नवंबर को, नवंबर और दिसंबर में रहेंगे 12 मुहूर्त: जून में 20, 21, 23 और 24 जून को और जुलाई में 3, 4, 6, 7, 8 और 9 जुलाई का इस सीजन का आखिरी सावा रहेगा।

चार माह बाद 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी के अबूझ मुहूर्त में कुछ लोग विवाह कर सकते हैं, लेकिन शुक्र ग्रह इस दौरान अस्त ही रहेगा। शुक्र 26 नवंबर को दोपहर 12:08 बजे पश्चिम दिशा में उदित होगा। अगले सर्दी सीजन का पहला लग्न मुहूर्त 28 नवंबर को होगा।

इसके साथ ही विवाह शुरू होंगे। यानी 9 जुलाई से 28 नवंबर तक देव प्रबोधिनी एकादशी को छोड़कर विवाह की शहनाइयां नहीं बजेंगी। 13 जुलाई को स्नान-दान पूर्णिमा के अगले दिन 14 जुलाई को श्रावण माह की शुरुआत होगी। समापन 11 अगस्त को रक्षाबंधन पर होगा।

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Author: kalamkala

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