चार अवैध तिरपाल गोदामों को नगर परिषद सुजानगढ ने किया 6-6 माह के लिए सीज, बिना भूमि कन्वर्जन करवाए आवासीय परिसर में चल रही थी तिरपाल कारोबार की व्यावसायिक गतिविधियां, इन पर न निर्माण स्वीकृति थी और न फायर एनओसी, अवैध रूप से संचालित 176 तिरपाल गोदामों से 172 पर कार्रवाई अभी बाकी

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चार अवैध तिरपाल गोदामों को नगर परिषद सुजानगढ ने किया 6-6 माह के लिए सीज,

बिना भूमि कन्वर्जन करवाए आवासीय परिसर में चल रही थी तिरपाल कारोबार की व्यावसायिक गतिविधियां, इन पर न निर्माण स्वीकृति थी और न फायर एनओसी,

अवैध रूप से संचालित 176 तिरपाल गोदामों से 172 पर कार्रवाई अभी बाकी

सुजानगढ़ ()। सुजानगढ में तिरपाल मंडी में अवैध रूप से चल रहे गोदामों पर नगर परिषद ने सख्ती बरतते करते हुए कार्रवाई करके 4 गोदामों को 6-6 महिनों के लिए सीज कर दिया है। इससे सैंकड़ों अन्य तिरपाल गोदाम संचालकों में खलबली मच गई है। यह बड़ी कार्रवाई शुक्रवार को नगर परिषद के सचिव सुरेश चैहान की अगुवाई में सुजानगढ़ नगर परिषद की टीम ने अंजाम दी। उनकी टीम ने अवैध रूप से संचालित गोदामों के बंद दरवाजों पर सीजर मेमो चस्पा कर चपड़ी लगाई है। यह कार्रवाई राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 194/7 (च) के तहत की गई है और कार्रवाई के बाद सभी 4 गोदामों को 6-6 माह के लिए सीज किया गया है। बताया जाता है कि इन अवैध गोदाम मालिकों को 27 अप्रेल को पहला नोटिस और 10 सितम्बर को दूसरा नोटिस दिया गया था और सार्वजनिक सूचना का प्रकाशन भी किया गया था। इसके बावजूद गोदाम मालिकों नउनका कोई जवाब तक नहीं दिया।

भू उपयोग परिवर्तन, निर्माण स्वीकृति व फायर एनओसी बिना कारोबार

नगर परिषद आयुक्त दिलीप शर्मा के अनुसार अवैध रूप से संचालित इन तिरपाल गोदामों में गौरीशंकर माली, अख्तर हुसैन पुत्र मोहम्मद याकब नूर नगर, रोशन खींची पुत्र फारूक चाड़वास फाटक और इस्लाम दईया पुत्र अशफाक के तिरपाल गोदाम शामिल हैं, जिनको सीज किया गया है। इन गोदामों में बिना परमिशन के आवासीय परिसर में व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थी, जिनका कन्वर्जन नहीं हुआ था। इन्होंने भू उपयोग परिवर्तन, निर्माण स्वीकृति व फायर एनओसी लिए बिना ही तिरपाल गोदान बना कर कारोबार कर रखा था। पिछले दिनों इनकी हुई शिकायत पर कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया, जिसके बाद इन्हें सीज कर दिया गया है। सुरेश चैहान ने बताया कि जिन व्यवसायियों ने कन्वर्जन की फाइलें लगा रखी है उनको सीज नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि आगे भी अगर इस तरह की अवैध गोदाम संचालित करनी पाई गई तो फिर कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में सहायक लेखाधिकारी भंवरलाल मेहरड़ा, एटीपी उदय सिंह, लोकेश जांगिड, आरआई मुन्नालाल मीणा, एसआई ओमप्रकाश स्वामी, सहायक धीरज आर्य, जमादार पुखराज, नथमल, नवरत्न, अनिल कुमार, संदीप, राजू, नितेश आदि कर्मचारी सचिव सुरेश चैहान के साथ रहे।

सभापति की शह पर हो रहे अवैध गोदाम संचालित

नगर परिषद द्वारा की गई गोदाम सीज करने की कार्रवाई पर नेता प्रतिपक्ष जयश्री दाधीच ने कहा कि सभापति की सह से अवैध गोदाम संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन अवैध गोदामों के कारण नगर परिषद को बड़े राजस्व का नुकसान हो रहा था, जिसको लेकर उन्होंने सबसे पहले नगर परिषद आयुक्त को ज्ञापन देकर शिकायत की थी। यहां सुनवाई नहीं होने पर डीएलबी और स्वायत शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा से मिलकर उनके पास भी इस सम्बंध में शिकायत की थी।

176 अवैध गोदामों पर कार्रवाई करके 172 को बख्सने पर खड़ा हुआ सवाल

राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मलन समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनेाज पारीक ने एनजीटी की ओर से सन 2022 में गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट भेज कर मुख्य सचिव और जिला कलेक्टर को 11 मई को पत्र लिखकर राजस्व नुकसान होने का हवाला देते हुए पत्र देकर नगर परिषद की चुप्पी पर सवाल उठाया था। एनजीटी ने पत्रावली सं. 556/2022 में एसडीएम सुजानगढ व राजस्थान स्टेट पाल्युशन कंट्रोल बोर्ड नागौर के क्षेत्रीय अधिकारी को सुजानगढ में कार्रवाई करने को लिखा था। इसके बाद 176 अवैध तिरपाल गोदामों में से मात्र 4 को ही सीज करके खानापूर्ति की गई है। शिाकयत कर्ता मनोज पारीक ाक आरोप है िकयह मात्र दिखावा किया गया है। नियमविरूद्ध चल रहे शेष 172 गोदामों पर कार्रवाई कब की जाएगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।

80 पट्टों की फाइलें लगाई, दो करोड़ से ज्यादा राजस्व दिया

दूसरी तरफ तिरपाल एसोसिएशन के सदस्य एवं पार्षद प्रतिनिधि जावेद खींची ने कहा कि हमने 50 से ज्यादा गोदामों के पट्टों की फाइलें एक साल से भी ज्यादा समय से लगाई हुई है। इनके अलावा 30 फाईलें कुछ समय पहले लगाई है। इनमें दो करोड़ से ज्यादा राजस्व नगर परिषद को दिया है। नगर परिषद ने एक गोदाम पर गलत तरीके से भी कार्रवाई की है। सीज की गई एक गोदाम की भी पट्टे की फाइल 2022 से लगाई हुई है। उसने नोटिस का जवाब भी दिया था। ऐसे में गलत तरीके से कार्रवाई की गई है।

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Author: kalamkala

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