लाडनूं में पावर ग्रिड ट्रांसमिशन लाइन सर्वे को लेकर उठाए गए सवाल- ज्ञापन देकर लगाए खनन कार्य को प्रभावित करने के आरोप, भ्रष्टाचार को लेकर उठाई अंगुलियां, व्यापक जांच की मांग

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लाडनूं में पावर ग्रिड ट्रांसमिशन लाइन सर्वे को लेकर उठाए गए सवाल-

ज्ञापन देकर लगाए खनन कार्य को प्रभावित करने के आरोप, भ्रष्टाचार को लेकर उठाई अंगुलियां, व्यापक जांच की मांग

लाडनूं (kalamkala.in)। भड़ला सीकर 765 केवीए ट्रांसमिशन लाइन के लिए लाडनूं क्षेत्र के निम्बी जोधां, दुजार गांवों के खेतों और खनन क्षेत्रों के लिए चल रही मुआवजे और नुकसान की जद्दोजहद को लेकर पूरे मामले की जांच करवाने के लिए एक किसान ने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच के बिंदु भी प्रस्तुत किए हैं। यह पत्र पुलिस जवाबदेही समिति राजस्थान के अध्यक्ष एचआर कुड़ी एवं जिला कलेक्टर को ज्ञापन के रूप में देकर अखिल भारतीय किसान सभा के पूर्व तहसील अध्यक्ष दुर्गाराम खीचड़ ने ग्राम पंचायत निम्बी जोधां और दुजार में भडला 3 सीकर-2 ट्रांसमिशन लाइन 765 केवीए (2-3) के लो प्रोफाइल में बदलाव एवं खनन कार्य प्रभावित होने की जांच करने की मांग की है।

सर्वे में भारी अनियमितताएं और खनन को किया जा रहा प्रभावित

ज्ञापन में बताया गया है कि पावर ग्रिड और सर्वे कंपनी द्वारा किए गए सर्वे में अनियमितता के कारण खनन कार्य प्रभावित हो रहा है। पूर्व में ट्रांसमिशन लाइन हेतु सर्वे दक्षिण दिशा में किया गया था, लेकिन अप्रेल 2024 के बाद इसे खनन क्षेत्र की ओर मोड़ दिया गया। यह बदलाव बिना उचित कारण के किया गया है, जो कि आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी से मेल नहीं खाता। इसके अतिरिक्त लीज संख्या एमएल नं. 30/2011 (इंद्रा देवी पत्नी दुर्गाराम खीचड़) के आगे पूरा क्षेत्र खनन क्षेत्र है। बीकानेर में पावर ग्रिड के मैनेजर एसके सिंह में शिकायत के जवाब में बताया कि इस ट्रांसमिशन लाइन के 300 मीटर के दायरे में ब्लास्टिंग नहीं की जा सकती। आरटीआई में भी यही जानकारी दी गई है, लेकिन एमएल नं. 30/2011 और अन्य लीज क्षेत्र की दूरी भी 300 मीटर नहीं है। इस कारण खनन कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होगा।

इन सभी बिंदुओं की जांच की मांग उठाई

ज्ञापन में उन्होंने जांच के मुख्य बिंदु बताते हुए लिखा है कि सर्वे में बदलाव के कारण का सर्वे होना चाहिए। फरवरी-मार्च 2024 में दक्षिण दिशा में किए गए सर्वे को बदलकर खनन क्षेत्र में क्यों ले जाया गया? खनन क्षेत्र की अनदेखी भी जांच का बिंदु रहे, क्योंकि जब यह क्षेत्र खनिज क्षेत्र है और यहां खनन कार्य चल रहा है, तो सर्वे को बदलकर यहां टावर लगाने की अनुमति कैसे दी गई? इसमें पावर ग्रिड अधिकारियों की भूमिका की भी जांच आवश्यक है। सीएमडी रविन्द्र कुमार को शिकायत देने के बाद जांच का आश्वासन मिला, लेकिन पावर ग्रिड के अधिकारियों ने मैनेजर अंजलि को मौके पर नहीं आने दिया और केवल दो इंजीनियरों को शाम 5 बजे बाद भेजा, जिन्होंने कोई जांच नहीं की। आरटीआई में दी गई जानकारी में जो अंतर सर्वे रिपोर्ट में जानकारी दी गई है, वो वर्तमान कार्य से भिन्न है। क्या इस बदलाव में किसी तरह की अनियमितता व भ्रष्टाचार हुआ है? सर्वे कम्पनी की भूमिका भी जांच के दायरे में होनी चाहिए। सर्वे कम्पनी के अधिकारियों ने कहा था कि वे उचित स्थान से लाइन निकालते हैं और सर्वे कई स्थानों पर किया जाता है। फिर भी रिश्वत लेकर सर्वे स्थान को क्यों बदला गया? लीज क्षेत्र पर प्रभाव की जांच भी आवश्यक है। एमएल नं. 30/2011 के अलावा अन्य लीज भी इस ट्रांसमिशन लाइन के 300 मीटर के दायरे में आते हैं, जिसमें ब्लास्टिंग प्रतिबंधित रहेगी। इससे खनन कार्य प्रभावित होगा। अदालत में लम्बित वाद पर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक है। 7 फरवरी 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट में एक वाद की सुनवाई होनी है। इसलिए सुनवाई से पूर्व इस मामले की निष्पक्ष व उचित जांच करवाई जानी आवश्यक है। खीचड़ ने इस बदलाव को अपने खनन कार्य को तो प्रभावित कर ही रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से अनुचित प्रक्रिया है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाने की मांग की गई है।

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Author: kalamkala

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