तप से होता है जन्म-जन्मांतर के कर्मों का क्षय- हाकम साध्वीश्री कार्तिक यशा,
सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार चौरड़िया के अठाई-तप की साधना की समारोह पूर्वक की गई अनुमोदना

लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ की हाकम साध्वीश्री कार्तिकयशा के सान्निध्य में स्थानीय ऋषभद्वार में लाडनूं के सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार चोरड़िया के अठाई तप की अनुमोदना का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हाकम साध्वीश्री ने बताया कि तप के द्वारा जन्म-जन्मांतर के कर्मों का क्षय होता है। आगमों में धर्म के महत्व को परिभाषित करते हुए कहा गया है, अहिंसा, संयम और तप युक्त धर्म ही धर्म का उत्कृष्ट स्वरूप है। भाई राजकुमार स्पष्ट वक्ता और निर्भीक प्रवृति के व्यक्ति हैं। कार्यक्रम में तपस्वी भाई राजकुमार चौरड़िया ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी तपस्या में शासनश्री विजय मुनि व मुनि जयकुमार की विशेष प्रेरणा रही। इस अवसर पर साध्वीश्री युक्ति प्रभा ने वृद्ध साध्वीश्री सूरज कुमारी के भावों की अभिव्यक्ति दी।
चंदेरी में हुए हैं बड़े-बड़े तपस्वी
शासन गौरव साध्वीश्री कल्पलता ने चंदेरी (लाडनूं) के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यहां बहुत बड़े-बड़े तपस्वी हुए हैं। तपस्वी भाई राजकुमार की माताजी भी धार्मिक और सामाजिक महिला थी। कार्यक्रम में साध्वीवृंद द्वारा गीतिका प्रस्तुत की गई। तेरापंथ सभा से कोषाध्यक्ष महेंद्र बाफना, महिला मंडल से उपाध्यक्ष समता बोकड़िया, ओसवाल पंचायत से सुरेश मोदी, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष शांति लाल बैद, युवक परिषद के अध्यक्ष सुमित मोदी, ज्ञानशाला से मुख्य प्रशिक्षिका सपना भंसाली, लाडनूं युवक परिषद से जंवरी मल दूगड़, दिगंबर जैन समाज से चांद कपूर सेठी आदि सभी ने तपस्वी का अनुमोदन अपने मंगल भावों से किया।
परिवारजनों ने भी की अनुमोदना
पारिवारिक बहनों ने गीतिका, छोटे-छोटे दोयता-दोयती तथा पोते जय चोरड़िया ने अपनी भावना रखी। परिवार की ओर से चंद्रकांता दूगड़, राजदेवी सिंघी, कमल सिंघी, वर्षा नाहटा ने तप अनुमोदना की।प्रारंभ में तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण किया। कार्यक्रम का संयोजन महिला मंडल की उपमंत्री सुनीता बैद ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक समाज उपस्थित रहा।





