साधु-साध्वियों को तो खुले मुंह बोलना भी नहीं चाहिए- आचार्य श्री महाश्रमण,
अक्षय तृतीया का भव्य आयोजन आज, 400 से अधिक तपस्वी करेंगे ईक्षुरस का दान



लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने रविवार को सुधर्मा सभा में अपने प्रवचन में कहा कि साधु की चर्या में पांच समितियों की बात आती है। जो समितियों से युक्त होता है, वह समित हो जाता है। आगमिक परिभाषा में कहा गया है कि जो प्राणों का अतिपात नहीं करता अर्थात् जिसके जीवन में अहिंसा हो, सम्यक् प्रवृत्ति वाला हो, वह समित होता है। पांचों समितियां मानों अहिंसा पर ही आधारित होती हैं। ईर्या समिति को देखें तो देख-देखकर चलना। भाषा समिति में अहिंसा का दर्शन किया जा सकता है। हमारे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में साधु-साध्वियों को तो खुले मुंह बोलना भी नहीं चाहिए। गोचरी-पानी, प्रमार्जन-प्रतिलेखन आदि में ध्यान रखना, ताकि कहीं हिंसा न हो जाए। ऐसे अहिंसा के पालक को समित कहा जाता है। जो साधु समित होता है, उसके दर्शन से भी पाप झड़ते हैं। साधु का जीवन तो पूर्णतया अहिंसा से ही जुड़ी हुई होती है। अंधेरे में पूंज कर चलना, बैठना है तो रजोहरण से साफ कर बैठना चाहिए। रजोहरण, प्रमार्जनी वस्त्र, कंबल आदि का प्रतिलेखन करने का प्रयास करना चाहिए। कोई चीज से भूल से रह जाए, तो उसकी आलोयणा का भी ध्यान रखने का प्रयास करना चाहिए। प्रवचन के बाद आचार्यश्री ने साधु-साध्वियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
अक्षय तृतीया महोत्सव आज, 400 तपस्वी करेंगे व्रत सम्पन्न
तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता-अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में होने वाले अक्षय तृतीया महोत्सव के भव्य समारोह में करीब 400 तपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण को ईक्षु-रस का दान कर व्रत को सम्पन्न करेंगे। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु लाडनूं पहुंचे हैं। आयोजन को भव्य बनाने में योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति जुटी हुई है।






