करोड़ों की छात्रवृत्ति ठगी के मामले में पुलिस ने बंगाल से दबोचा अन्तर्राज्यीय गैंग का मुख्य सरगना, इनामी बदमाश है गिरफ्तार इमरान अली उर्फ सरजू, राजस्थान में 28 मामले पुलिस के पास दर्ज,
इस गैंग के लोग ठगी के लिए बनाते थे अंगुष्ठ क्लोन, लोगों के आधार कार्ड लेकर खरीदते सिम कार्ड व खोलते थे फर्जी बैंक खाते, आज भी चल रही है गैंग की कार्रगुजारियां,
गिरोह सरगना के पास से मिले 4 मोबाईल फोन, बैक पास बुक, 7 एटीएम कार्ड एवं अन्य सामान तथा 44 हजार नकद

डीडवाना (kalamkala.in)। भारत सरकार के एनएसपी पॉर्टल को हैक कर करोड़ों की ठगी करने वाले अर्न्तराज्यीय गैंग के मुख्य सरगना इनामी आरोपी इमरान अली उर्फ सरजू को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली है। इस आरोपी एवं इसकी गैंग ने केन्द्र सरकार द्वारा 2021-22 एवं 2022-23 में एनएसपी पोर्टल पर अल्पसंख्यक छात्रों को दी गई अरबों रूपयों की छात्रवृत्ति में से करोड़ों रुपयों की ठगी की गई थी। इस गिरफ्तार आरोपी ठगी के अन्तर्राज्यीय गिरोह के मुख्य सरगना इमरान अली उर्फ सरजू पर जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा 21,000 रुपयों का इनाम घोषित किया हुआ था। पुलिस ने इस प्रकरण में सह आरोपी जुबेर आलम, मंसूर आलम व एमडी मुन्ना मुस्ताक को पश्चिम बंगाल से दस्तयाब कर मामला का खुलासा किया था। प्राप्त रेकार्ड के आधार पर स्पष्ट है कि गैंग द्वारा वर्तमान में भी लगातार फर्जी तरीके से केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली छात्रवृति की ठगी की जा रही है।
इस चुनौतीपूर्ण मामले में थे 28 प्रकरण दर्ज, डीजीपी और सेक्रेटरी से मिले थे निर्देशन
इस करोड़ों की छात्रवृत्ति ठगी के मामले के सामने आने पर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के सचिव द्वारा आयोजित मीटिंग में दिये गये निर्देशों की पालना में निदेशालय, अल्पसंख्यक मामलात विभाग राजस्थान, जयपुर द्वारा जारी आदेश के क्रम में राजस्थान के विभिन्न जिलों में अब तक करीब 28 प्रकरण दर्ज होकर अनुसंधानाधीन हैं। डीडवाना कुचामन जिले में पुलिस थाना डीडवाना, नावां एवं मकराना पर छात्रवृति से संबंधित प्रकरण पंजीबद्ध हुए थे। इन समस्त प्रकरणों में महानिदेशक पुलिस राजस्थान एवं मुख्य सचिव राजस्थान सरकार द्वारा लगातार अपने सुपरविजन में निर्देश जारी किये जा रहे थे। इस प्रकरण में वर्ष 2021-22 व 2022-23 को होने से सीडीआर एवं आईपीडीआर प्राप्त होना सम्भव नहीं होने से मामले का खुलासा किया जाना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया था।
ये सब बरामद हुए गैंग और मुख्य सरगना के घर से
मुख्य आरोपी इमरान अली उर्फ सरजू (30) पुत्र निजामुदीन निवासी उत्तर कॉटगांव, थाना चौपडा, जिला उतर दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल के घर से पुलिस को विभिन्न शिक्षण संस्थानों फर्जी मोहरें- 18, अलग-अलग कंपनियों के मोबाईल सिम कार्ड 105, अलग-अलग शिक्षण संस्थानों की 1 करोड़ 58 लाख 970 रूपयों की फर्जी रसीदें, क्लोन अगुंष्ठ निशान 4, चार्जर व मेड इन चाईना की मोबाईल पेमेंट टर्मिनल मशीन, फिंगर मशीन, कैमरे चार्जर मिले एवं एक बांग्लादेश का ग्रीन बेरी जी 5000 का मोबाईल मिला, जिसमें 4 सिमें आती है। सरगना इमरान अली उर्फ सरजू के कब्जे से ठगी के 44,000 रूपये, चार मोबाईल फोन, बैक पास बुक, 7 एटीएम कार्ड एवं अन्य सामान बरामद किये गये हैं। प्राप्त रेकार्ड के आधार पर स्पष्ट है कि गैंग द्वारा वर्तमान में भी लगातार फर्जी तरीके से केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली छात्रवृति की ठगी की जा रही है। इमरान अली उर्फ सरजू के खाते में हाल ही में 4 मार्च 2026 को भी 1, 69, 900 रूपये आये हैं।
वेश बदल खानाबदोश बन बांग्लादेश सीमा औय चाय बागानों में घूमना पड़ा पुलिस को
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नागौर द्वारा इस प्रकार का प्रकरण दर्ज करने पर पुलिस अधीक्षक जिला डीडवाना कुचामन द्वारा जेठू सिंह आरपीएस वृताधिकारी डीडवाना के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस अधीक्षक से लगातार सम्पर्क कर निर्देश प्राप्त करते हुए टीम के सदस्य जेठू सिंह करनोत आरपीएस, हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार, हैड कांस्टेबल प्रेमचंद व कांस्टेबल मनोज कुमार द्वारा वेश बदलकर, दिनरात रैकी कर बांग्लादेश बॉर्डर पर स्थित गांवों एवं चाय के बागानो में खानाबदोश लोगों की तरह घूम-फिरकर मुलजिमानों का पता लगाया और गैंग तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। टीम द्वारा दिन-रात एक कर अपनी कार्य-कुशलता का परिचय देते हुए, कड़ी मेहनत कर, संदिग्ध खाता-धारकों की, बैंकों से डिटेल प्राप्त कर, तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर, एनएसपी पोर्टल के साथ छेड़छाड़ कर, बच्चों की फर्जी तरीके से छात्रवृति उठाने वाली गैंग के मुख्य सरगना इमरान अली उर्फ सरजू की किशनगंज बिहार किशनगंज, काटगांव, सुजाली, इस्लामपुर पं. बंगाल, दरभंगा, लखनऊ आदि जगहों पर तलाश कर दस्तयाब करने में कामयाबी हासिल की।
जिले में पहली बार हुई थी यह रिपोर्ट दर्ज
इस मामले में 6 जून 2025 को जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नागौर गोपालचन्द्र जांगिड़ (निवासी राजसमंद) ने प्रकरण दर्ज करवाया कि भारत सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय हेतु एनएसपी पोर्टल पर छात्रवृत्ति दी जाती है। सत्र 2021-22 एवं 2022-23 में जिला डीडवाना कुचामन की 25 शिक्षण संस्थानों, जिनकी सूची संलग्न है, डाइस कोड (DISE CODE) के माध्यम से स्कूल के एचओआई आवेदक (हेड ऑफ इंस्टिट्यूट) एवं एनओआई (नोडल ऑफ इंस्टिट्यूट, एप्लीकेंट संदेहास्पद पाए गए हैं। उन स्कूलों से किसी अज्ञात लोगों ने एनएसपी पोर्टल के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी तरीके से 150 छात्र-छात्राओं की छात्रवृति उठा ली, उन लोगों के विरूद्ध कार्रवाई करावें। वगैरह पर प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान प्रारम्भ किया गया।
इस तरह करती दी वारदात यह करोड़ों की ठगी करने वाली गैंग, अलग-अलग स्तर पर रहता था गतिविधियों का जिम्मा
इस अन्तर्रप्रांतीय गिरोह की एक गैंग द्वारा सर्व प्रथम शिक्षण संस्थानों की सूची एवं उनके डाईस व आईस कोड प्राप्त की जाती थी, जिसे इस ठगी की गैंग को उपलब्ध करवाया जाता। यह ज्यादातर उन शिक्षण संस्थानों का चयन करते, जो या तो बंद हैं या उन्होंने पोर्टल पर केवाईसी नहीं करवाई है। इस गैंग के पास शिक्षण संस्थानों की सूची एवं उनके डाईस व आईस कोड की पीडीएफ प्राप्त होने पर फर्जी एचओआई एवं एनओआई के नाम भर कर मोबाईल नम्बर गैंग द्वारा प्राप्त फर्जी सिमों के अंकित किये जाते है। उन मोबाईल नम्बरों पर एनएसपी पोर्टल पर ओटीपी प्राप्त कर संस्थान की आईडी एवं पासवर्ड प्राप्त कर रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है।
लोगों के आधार कार्ड प्राप्त कर खोले जाते हैं फर्जी बैंक खाते
गैंग के सदस्यों द्वारा सर्वप्रथम गांवों में घूमकर गरीब लोगों को सरकारी योजना का फायदा उठाने का कहकर उनके खाते लिये जाते हैं एवं इसके अलावा गांव के लोगों के आधार कार्ड प्राप्त कर सीएसपी सेंटरों से फर्जी खाते खोलने का काम करते हैं। इसके बाद इस गैंग के सदस्य इन रजिस्ट्रेशन सस्थानों के रजिस्टर्ड एनएसपी पोर्टल साईट पर असली छात्रों के नामों के स्थान पर फर्जी नाम व बैंक आईएफसी कोड, खरीदे हुए खातों की वास्तविक खाता संख्या अपलोड करके उन खातों मे छात्रवृति आने पर रूपयों को सीएसपी से निकलवा कर ठगी करते हैं। जिस छात्र के खाते में छात्रवृत्ति आनी होती है। उसका वेरिफिकेशन स्थानीय पते के आधार पर सम्बन्धित जिला स्तर पर होता है, इसके लिए दलालों से सम्पर्क कर वेरिफिकेशन करवा दिया जाता है।
अंगूठों के निशान के क्लोन बना कर करते हैं इस्तेमाल
इस गैंग के कतिपय सदस्यों द्वारा लोगों के फर्जी आधार कार्ड बनाकर उनके नाम से मोबाइल सिम निकालने का काम करते हैं। दूसरे सदस्य उस सिम को खाते से लिंक करने का काम करते हैं। इनमें से एक सदस्य जमीनों के डेटा प्राप्त कर किसानों के फिंगर प्रिंट निकालता है। उनसे गैंग के अन्य सदस्यों को फर्जी क्लोन अंगुष्ठ निशान बनाने के लिये कहता है। गैंग का अन्य सदस्य कागज पर प्रिंट निकाल कर उनको फर्जी क्लोन बनाने के लिये किसी केमिकल का इस्तेमाल करके फर्जी क्लोन अंगुष्ठ निशान बनाता है। फर्जी क्लोन बनने के बाद गैंग का एक सदस्य उन क्लोन से रूपये उठाने का कार्य करता है। फिर यह रूपये आपस में बांटे जाते है।
इस पुलिस टीम को मिली प्रकरण में सफलता
इस करोड़ों की ठगी के अनोखे तरीके के प्रकरण में जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारेलाल शिवरान के निर्देशन में एडिशनल एसपी डीडवाना हिमांशु शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुचामन विमल सिंह नेहरा के सुपरविजन में वृताधिकारी डीडवाना जेठूसिंह ने मय टीम के द्वारा प्रभावी कार्रवाई करते हुए भारत सरकार की अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृति को एनएसपी पोर्टल के साथ छेड़छाड़ कर ठगी करने वाली अन्तर्राज्यीय गैंग के मुख्य सरगना इमरान अली उर्फ सरजू को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। इस मामले में सफलता के पीछे रही पुलिस टीम में वृताधिकारी डीडवाना जेठू सिंह करनोत का विशेष योगदान रहा। इनके साथ साइबर सैल के हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार टेपण एवं पुलिस थाना मौलासर के हेड कांस्टेबल प्रेमचंद अडानियां तथा डीडवाना पुलिस थाने के कांस्टेबल मनोज कुमार का भी विशेष योगदान रहा। इस टीम में शामिल साइबर सैल डीडवाना के कांस्टेबल गोपाल राम एवं श्रीमती निशा कंवर का सहयोग भी रहा।







