अपने हुनर को विकसित कर बनाएं अपनी नई पहचान- प्रो. जैन,
विश्व युवा कौशल दिवस पर कार्यक्रम आयोजित, छात्राध्यापिकाओं को किया प्रेरित
लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ मनाया गया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ को मनाने की शुरुआत की थी। यह दिवस युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के लिए कुशल बनाने हेतु प्रेरित करता है। आज का युग केवल किताबी ज्ञान या बड़ी-बड़ी डिग्रियों का नहीं है। आज का युग ‘कौशल’ का है। पुरानी कहावत है, ‘ज्ञान से आप समझदार बनते हैं, लेकिन हुनर से आप आत्मनिर्भर बनते हैं।’ कोई डिग्री इंटरव्यू के दरवाजे तक ले जा सकती है, लेकिन उस दरवाजे के अंदर की सफलता कौशल से ही तय होती है। बदलते दौर में सिर्फ पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। डिजिटल और तकनीकी कौशल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिसिस और कोडिंग, सॉफ्ट स्किल्स, टीम वर्क, समस्या-समाधान की क्षमता और प्रभावी संवाद, हरित कौशल, पर्यावरण के अनुकूल, तकनीकों और सस्टेनेबिलिटी को समझना आवश्यक है। भारत सरकार ने ‘स्किल इंडिया’ अभियान द्वारा युवाओं के हुनर को तराशने की मुहिम प्रारम्भ की है। जिसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी रुचि को पहचान कर प्रत्येक छात्राध्यापिका को अपना नया हुनर विकसित करना चाहिए और अपने कौशल के आधार पर अपनी पहचान बनानी चाहिए। अपने हुनर के आधार पर कम से कम स्थानीय क्षेत्र में अपनी पहचान बनानी चाहिए। जिन्होंने अपना कौशल निर्धारित नहीं किया है, वे निर्धारित करें और जिन्होंने निर्धारित कर रखा है, उसे और संवर्धित करें।जब देश का युवा कुशल होगा, तभी देश आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगा। कार्यक्रम में डॉ. अमिता जैन एवं शिक्षा विभाग की बी.एड, बी.ए.-बी.एड एवं बी.एस.सी-बी.एड की छात्राध्यपिकाएं उपस्थित रही।







