सरगर्मियां पंचायत चुनाव की- निम्बी जोधां से विजय सिंह सिसोदिया बने जनता की ओर से सरपंच पद के दावेदार, और कौन-कौन आएंगे अभी मैदान में, देखते हैं आखिर क्या करवट लेता है यह चुनाव?

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सरगर्मियां पंचायत चुनाव की-

निम्बी जोधां से विजय सिंह सिसोदिया बने जनता की ओर से सरपंच पद के दावेदार,

और कौन-कौन आएंगे अभी मैदान में, देखते हैं आखिर क्या करवट लेता है यह चुनाव?

लाडनूं (kalamkala.in)। पंचायत राज के चुनाव को लेकर पूरे क्षेत्र में सरगर्मियां तेज हैं और हर इच्छुक व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में आमजन से और अपने नेताओं से दोनों तरफ सम्पर्क साधने में लगे हुए हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव तो राजनीतिक दलों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन ग्राम पंचायतें पूरी तरह से ग्रामीणों के हवाले की हुई हैं। सभी ग्राम पंचायत क्षेत्रों में जो सरपंच पद के लिए दावेदार हैं, वे अपने समर्थकों को जुटाने में जुटे हुए हैं। सम्पर्कों का दौर खासा तेज है। लाडनूं तहसील की सभी ग्राम पंचायतों में कमोबेश यही हालात देखने को मिल रहे हैं। इन सबके बीच निम्बी जोधां ग्राम पंचायत का माहौल सबसे अलग नजर आ रहा है। यहां न तो कोई दावेदार खुद को आगे लाने में सफल है और न कोई राजनैतिक दल किसी को यहां अपनी तरफ से थोप रहा है। निम्बी जोधां के लोग अपना सरपंच दावेदार खुद ही तय करने की कवायद में तत्पर हैं। यहां से ग्रामवासियों की तरफ से शुरू में एक नाम उभर कर सामने आया बंकट लाल शर्मा का। इस नाम पर सभी सहमत भी थे, लेकिन उनके पुत्र ने उनके स्वास्थ्य और उम्र का हवाला देकर उन्हें मैदान में आने से रोक दिया। इनके बाद ग्रामीणों का मंथन फिर चला और एकत्र होकर सर्वसम्मति से एक नाम तय किया। लोगों ने गांव की सरकार के लिए विजय सिंह सिसोदिया के नाम पर सहमति बनाई। अभी तक चुनाव तो कुछ दूर है, लेकिन माहौल ऐसा बना कि बड़ी संख्या में एकत्र हुए लोगों ने विजय सिंह सिसोदिया को फूलमालाओं से लाद दिया। लोगों के समर्थन से इस ग्राम पंचायत के सरपंच पद की सामान्य सीट से ताल ठोक कर विजय सिंह सिसोदिया सामने आए हैं। बंकट लाल शर्मा ने भी अपना समर्थन प्रदान किया है। सिसोदिया को केवल राजपूत, ब्राह्मण व बनियों ने ही नहीं लगभग हर जाति-समुदाय से समर्थन मिल रहा है। ऐसा लगने लगा है कि बिना चुनाव ही लोगों ने उनको सरपंच मान लिया है। हालांकि अभी बहुत से उम्मीदवार और सामने आएंगे, क्योंकि लोग किसी को निर्विरोध तो आने ही नहीं देते। आगे-आगे देखते हैं कि कौन-कौन सामने आता है और मतदान के बाद किसके सिर पर ताज सजता है। आखिर ये चुनाव है और इसमें ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है। पहले कोई कुछ नहीं कह सकता। लोगों द्वारा पहले लगाए गए सारे कयास धराशायी भी हो सकते हैं।

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Author: kalamkala

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