क्यों भाजपा को नुक्सान पहुंचाने में लगे हैं कुछ लोग,
लाडनूं का सौभाग्य है कि बीएल भाटी जैसा दिग्गज मिल रहा है पंचायत को, पर कुछ लोग उतरे विरोध के लिए,
बीएल भाटी के कथित विरोध से पनपा लाडनूं के एससी वर्ग में असंतोष, एससी समाज के लोग एकजुट होकर सिखाएंगे उन लोगों को सबक
लाडनूं (kalamkala.in)। लाडनूं की एक ऐसी शख्सियत, जो प्रदेश भाजपा में अनुसूचित जाति के नेताओ में दिग्गज कहे जा सकते हैं। वे अगर लाडनूं की राजनीति में उतरते हैं तो यह समूचे लाडनूं के लिए सौभाग्य की बात होगी, लेकिन लाडनूं के कतिपय गुटबाजी फैला रहे लोगों को उनका लाडनूं की राजनीति में आना गवारा नहीं हो रहा है और उनकी धमक को लेकर ऐसे लोग विरोध में उतर आए हैं। ऐसे लोग लाडनूं क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत और सतासीन होते नहीं देखना चाहते। पिछले विभिन्न चुनावों में लोगों को यही दृश्य देखने को मिले थे। हाल ही का नगर पालिका चुनाव इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, कि लाडनूं के बच्चे-बच्चे की जुबान पर भाजपा के गद्दारों के नाम आने लगे हैं। अब भाजपा के दिग्गज अनुसूचित जाति नेता बीएल भाटी का विरोध इन्हीं कुछ लोगों ने शुरू कर दिया है।
अंदर से निकल कर लोगों में फैल गई विरोध की बातें
लाडनूं की राजनीति में अनुसूचित जाति (एस.सी.) वर्ग समाज के वरिष्ठ नेता बीएल भाटी की टिकट को लेकर कथित विरोध का मुद्दा बना रहे हैं, उसे लेकर भी चर्चाएं तेज है। इस चुनावी माहौल में हर छोटी-बड़ी बात जंगल की आग की तरह तेजी से फैल जाती है। कुछ लोगों का आरोप है कि भाजपा में स्वयं को लाडनूं के बड़ा नेता मानने वाले कुछ लोगों को बीएल भाटी धमक से अपनी राजनीतिक पकड़ कमजोर होने की बढती आशंकाओं के कारण ही वे बीएल भाटी का विरोध करने पर उतर आए हैं और आम जन के समक्ष वापस भाजपा की फूट को दर्शाने पर उतर आए हैं। ऐसे स्थानीय नेताओं को इस बात की चिंता होने लगी है कि यदि बीएल भाटी के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समाज वर्ग भाजपा नेता ठाकुर करणी सिंह के साथ मजबूती से जुड़ गया, तो क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं। बीएल भाटी के समर्थक भी अब उठ खड़े हुए हैं। इन समर्थकों का कहना है कि बीएल भाटी जैसे अनुभवी नेताओं की उम्मीदवारी पर विचार करते समय उनके सामाजिक योगदान, जनसंपर्क और क्षेत्र में स्वीकार्यता को महत्व दिया जाना चाहिए। केवल व्यक्तिगत राजनीतिक समीकरणों के आधार पर किसी नेता का विरोध करना उचित नहीं है। इधर इन समर्थकों द्वारा एकजुट होकर अनुसूचित जाति समाज के लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व और समाज के हितों से जुड़े मुद्दों पर गांव-गांव तथा मोहल्ले-मोहल्ले में बैठकें आयोजित करें। इन बैठकों में बीएल भाटी की उम्मीदवारी, टिकट वितरण की प्रक्रिया और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के कार्यों पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा की जाए।
दूर रखा जाए भाजपा के दुष्टों को टिकट वितरण से
इधर इस प्रकार की जानकारी भी सामने आ रही है कि पंचायत राज चुनाव के लिए होने वाले टिकट वितरण में कुछ ऐसे लोगों को भी प्राथमिकता दी जा सकती है, जिनके प्रति इस क्षेत्र में लोगों में गहरा असंतोष व्याप्त है।काफी लोगों का आरोप है कि पिछले चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतने के बावजूद कुछ जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहे और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए। इन दावों की पुष्टि उन संबंधित जनप्रतिनिधियों के कार्यों और स्थानीय लोगों की राय के आधार पर की जानी चाहिए। इधर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने अपने समाज के लोगों से आग्रह किया है कि चुनाव के समय वोट मांगने आने वाले नेताओं से उनके कार्यों, जनसेवा और समाज के प्रतिनिधित्व के संबंध में सवाल पूछें। किसी भी उम्मीदवार का समर्थन या विरोध तथ्यों, कार्यों और जनहित के आधार पर किया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति समाज को अपने अधिकारों, सम्मान और उचित राजनीतिक भागीदारी के प्रति जागरूक रहना चाहिए। भाजपा नेतृत्व से भी मांग की जानी चाहिए कि टिकट वितरण में पारदर्शिता रखी जाए और योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिले। समाज की एकता का उद्देश्य किसी व्यक्ति के प्रति व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं, बल्कि सम्मानजनक प्रतिनिधित्व और क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए।



