लाडनूं क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग की भाजपा द्वारा लगातार उपेक्षा से फैला असंतोष क्या चुनाव को प्रभावित करेगा? जिला कार्यकारिणी के बाद जिला परिषद चुनाव में टिकट कटवाने को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ लोगों में नाराजगी, अब उनकी क्या भूमिका रहेगी असंतोष मिटाने के लिए

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लाडनूं क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग की भाजपा द्वारा लगातार उपेक्षा से फैला असंतोष क्या चुनाव को प्रभावित करेगा?

जिला कार्यकारिणी के बाद जिला परिषद चुनाव में टिकट कटवाने को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ लोगों में नाराजगी, अब उनकी क्या भूमिका रहेगी असंतोष मिटाने के लिए

लाडनूं (kalamkala.in)। भारतीय जनता पार्टी के जिला नेतृत्व द्वारा लाडनूं क्षेत्र में अनुसूचित जाति को लेकर निरन्तर उपेक्षित रखे जाने को लेकर काफी असंतोष पनप रहा है, अगर इसका समय पर निराकरण नहीं किया गया तो वह पंचायत चुनाव परिणामों को भी प्रभावित कर सकता है। चुनाव में जमीनी स्तर पर भाजपा के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं एवं नेतृत्व वर्ग में असंतोष पनपने से उनकी कार्यक्षमता में कमी आती है और उसका असर मतदान पर पड़ना स्वाभाविक है। जिला परिषद चुनाव को लेकर लाडनूं क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग को भाजपा की ओर से प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर काफी लोगों में नाराजगी सामने आ रही है।

भाजपा जिलाध्यक्ष को किया जा रहा है उपेक्षा के लिए आरोपित

पंचायत राज चुनाव में जिला परिषद डीडवाना-कुचामन में लाडनूं क्षेत्र से अनुसूचित जाति की दावेदारी का भाजपा में विरोध करने को लेकर विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं और ऐसे आरोप भी सामने आए हैं कि अनुसूचित जाति का विरोध करके टिकट कटवाने में भाजपा जिलाध्यक्ष की भूमिका रही है। आजा वर्ग के कुछ लोगों का आरोप है कि जिलाध्यक्ष और उनकी टीम ने अनुसूचित जाति के दावेदार को टिकट दिलाने के लिए प्रभावी प्रयास करने के बजाय नहीं उसकी दावेदारी को कमजोर बनाने में भूमिका निभाई। अजा समाज के लोगों का कहना है कि जब कांग्रेस ने जिला परिषद चुनाव में अजा वर्ग को दो सीटें दे दी हैं, तो भारतीय जनता पार्टी द्वारा कोई प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिए जाने के पीछे कैसी सोच रही होगी? उनका आरोप है कि भाजपा की जिला कार्यकारिणी में बी लाडनूं के अनुसूचित जाति वर्ग समाज को उचित स्थान नहीं दिया गया था और अब चुनाव के समय में भी उनकी पूरी उपेक्षा किए जाने से उपजे असंतोष से चुनाव के प्रभावित होने की आशंकाएं भी प्रतीत होने लगी है। इसी कारण अनुसूचित जाति समाज से वोट मांगने और संगठन में भागीदारी देने के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।समाज के लोगों के अनुसार, लाडनूं विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति समुदाय का महत्वपूर्ण मताधार होने के बावजूद उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से आम समुदाय में ही नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं में भी असंतोष पनपा है। जिला परिषद की टिकट को लेकर भाजपा की उपेक्षा से नाराज कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी शिकायत वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाने की बात भी सामने आई है। अजा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि भाजपा सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहती है, तो उसे प्रतिनिधित्व और सम्मान से जुड़े सवालों का समाधान करना होगा।

सभी सवालों का समय पर जवाब दिया जाकर असंतोष पर लगाम जरूरी

इन सभी लोगों का कहना है कि केवल चुनाव के समय वोट मांगने से विश्वास कायम नहीं होता। संगठन में सम्मान, जिम्मेदारी और टिकट वितरण में उचित भागीदारी भी जरूरी है। नगर पालिका चुनाव के अनुभवों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व को आगामी पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों से पहले संगठन की कार्यप्रणाली तथा सामाजिक प्रतिनिधित्व की समीक्षा करनी चाहिए थी।
अब सवाल यह है कि भाजपा की जिलाध्यक्ष को इस प्रकार के असंतोष और आरोपों पर अपना जवाब देना चाहिए, ताकि लाडनूं में पनपी अजा समुदाय की नाराजगी दूर करने में कोई सहयोग मिल सके।

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Author: kalamkala

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