धर्माचरण से बने अच्छे गृहवासी– आचार्य महाश्रमण

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देशनोक, बीकानेर (कलम कला संवाददाता)
पांव–पांव चल कर भारत के 23 राज्यों में जनकल्याण के लिए हजारों किलोमीटर पदयात्रा करने वाले अहिंसा यात्रा प्रणेता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी कालू, लूणकरणसर, उदासर, मोरखाणा, देशनोक आदि क्षेत्रों से होते हुए बीकानेर की ओर अग्रसर है। आचार्यश्री का लगभग 10 किलोमीटर विहार कर शुक्रवार को पलाना पधारना हुआ। शनिवार 11 जून को भीनासर, 12, 13 को बीकानेर, 14 से 17 जून तक गंगाशहर में गुरूदेव का प्रवास रहेगा। इस दौरान आचार्यप्रवर के सान्निध्य में विभिन्न कार्यक्रमों का भी समायोजन होगा।

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पलाना के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में उपस्थित जनता को प्रतिबोध देते हुए गुरुदेव ने कहा – मानव जीवन का परम लक्ष्य क्या है? यह चिंतन हमारे भीतर होना चाहिए। मोक्ष हमारा परम लक्ष्य है। अध्यात्म की दृष्टि से मोक्ष सर्वोच्च स्थिति होती है। मोक्ष में किसी प्रकार का कोई दु:ख नहीं, कोई तकलीफ नहीं, केवल सुख ही सुख होता है। मोक्ष प्राप्ति के लिए कषाय मुक्ति की साधना जरूरी है। क्रोध, मान, माया, लोभ रूपी कषाय मोक्ष की राह में बाधक तत्व है। क्रोध को मनुष्य का शत्रु कहा गया है। गुस्से में व्यक्ति क्या कर रहा है, इसका उसे भान भी नहीं रहता। क्रोध का फल भी बुरा ही होता है।

आचार्यश्री ने आगे कहा कि किसी को अपने ज्ञान, पद, पैसे का घमंड हो सकता है, पर घमंड किस बात का, जब मृत्यु होती है तो सब यही रह जाता है। किसी के बारे में दुर्वचन, चुगली आदि भी नहीं कहनी चाहिए। जीवन में जितने सद्गुण होंगे उतना ही जीवन उत्तम बन सकेगा। हर कोई सन्यासी नहीं बन सकता पर गृहस्थ होकर भी जीवन में धर्माचरण कर अच्छे गृहवासी बनने का प्रयास करे।
तत्पश्चात आचार्यश्री के आव्हान पर पलाना ग्रामवासियों ने सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति के संकल्पों को स्वीकार किया।

मध्यान्ह में आचार्यप्रवर के सान्निध्य में आरएसएस कार्यकर्त्ता दर्शनार्थ पहुंचे। आचार्यश्री ने उन्हें प्रेरणा प्रदान करते हुए कार्यकर्ता कैसा हो, कार्यकर्ता के क्या कर्तव्य होने चाहिए आदि के बारे में उद्बोधन दिया। शांतिदूत ने कहा कि स्वयं का जीवन अच्छा हो तो दूसरों का जीवन सुधारना चाहिए। कार्यकर्ताओं को हर परिस्थिति में अपना मनोबल बनाए रखना चाहिए। कार्यकर्ताओं कि परिभाषा बताते हुए कहा कि निम्न श्रेणी के कार्यकर्ता बाधाओं को देख कर काम शुरू ही नहीं करते। मध्यम श्रेणी के कार्यकर्ता काम शुरू कर देते हैं, परंतु बाधाएं आने पर काम छोड़ देते हैं, वहीं श्रेष्ठ श्रेणी के कार्यकर्ता बाधाएं आने पर भी नया रास्ता खोज कर सफलता प्राप्त करते हैं। संगोष्ठी में आरएसएस बीकानेर विभाग के संघचालक टेकचन्द बरडिय़ा, कार्यवाहक संघ चालक गोमाराम जीनगर, गंगाशहर नगर संघ चालक डॉ. जतनलाल बाफना, लक्ष्मीनाथ नगर संघचालक ब्रह्मदत आचार्य, प्रान्त ग्राम विकास संयोजक निर्मल बरडिय़ा आदि कई आरएसएस कार्यकर्त्ता संभागी बने। संचालन श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर की ओर से जैन लूणकरण छाजेड़ ने किया।

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Author: kalamkala

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