समाज को शिक्षित करने के साथ युवा शक्ति को सृजनात्मक सोच देने का कार्य करती हैं महिला शिक्षिकाएं- डॉ. सिद्धेश्वर शुक्ला,
सालासर में राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) का दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन सम्पन्न, हितरक्षक प्रस्ताव पारित कर भेजे सरकार को






लाडनूं/ सालासर (kalamkala.in)। राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) का दो दिवसीय प्रांतीय शैक्षिक सम्मेलन ‘सार्वजनिक शिक्षा को बचाने व हमें पढ़ाने दो’ थीम पर सालासर में 19-20 दिसम्बर को आयोजित किया गया। शैक्षिक सम्मेलन में राज्य के विभिन्न हिस्सों से शिक्षक उमड़े। बांसवाड़ा से भरतपुर तक और गंगानगर से कोटा बारां तक से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सालासर पहुंच कर सम्मेलन में हिस्सा लिया। लाडनूं सहित डीडवाना कुचामन जिले से हजारों शिक्षकों ने भाग लिया।
इन अतिथियों का मिला सम्मेलन को लाभ
इस शैक्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व शिक्षा मंत्री व कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सम्मिलित हुए। सम्मेलन की अध्यक्षता संगठन के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिंह सिहाग ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सुजानगढ़ से विधायक मनोज मेघवाल, रतनगढ़ के विधायक पूसाराम गोदारा व राजस्थान देवस्थान बोर्ड के अध्यक्ष भंवरलाल पुजारी उपस्थित रहे। सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सिद्धेश्वर शुक्ला व सह वक्ता के रूप में एसटीएफआई के राष्ट्रीय सचिव पंजाब से सुरेन्द्र कम्बोज थे।
समाज की समग्र सोच का विकास शिक्षा से ही संभव
सम्मेलन के मुख्य वक्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. सिद्धेश्वर शुक्ला ने कहा कि शिक्षा से ही समाज की समग्र सोच का विकास होता है। सरकारों को चाहिए कि सार्वजनिक शिक्षा के शैक्षणिक और इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे को सुदृढ़ करें और विद्यार्थियों के लिए शिक्षण संस्थाओं में मूलभूत सुविधाएं प्रदान करें। जिस देश की सार्वजनिक शिक्षा सुदृढ़ है वह देश भी सुदृढ़ है।शुक्ला ने बताया कि ‘एनईपी’ के तहत ऐसे माॅडल को विकसित करने का प्रयास हो रहा है, जिससे सार्वजनिक शिक्षा धीरे-धीरे निजीकरण की तरफ बढेगी। उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित महिला शिक्षिकाओं को इंगित करते हुए कहा कि वर्तमान के दौर में महिला शिक्षकों की भूमिका बड़ी हो रही है। महिला शिक्षिकाएं समाज को शिक्षित करने व देश की युवा शक्ति को नई सृजनात्मक सोच देने का कार्य कर सकती है।
प्रगतिशील समाज और नई पीढ़ी तैयार करते हैं शिक्षक
सम्मेलन के मुख्य अतिथि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि समाज में शिक्षक की भूमिका बहुत बड़ी होती है। शिक्षक समाज में प्रगतिशील सोच पैदा करने व नई पीढ़ी को तैयार करने में अहम् योगदान देता है। सरकारों को चाहिए कि शिक्षकों के हितों का ध्यान रखें। सम्मेलन को सहवक्ता एसटीएफआई के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र कम्बोज, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल व रतनगढ़ विधायक पूराराम गोदारा ने भी संबोधित किया।
शिक्षा, शिक्षकों और शिक्षार्थियों के हितों के लिए पारित किए गए महत्वपूर्ण प्रस्ताव
दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन ‘खुला अधिवेशन’ आयोजित किया गया। इसमें ‘शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों’ के मुद्दों पर चर्चा की गई। उपस्थित पदाधिकारियों ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद सभी ज्वलंत मुद्दों के सम्बन्ध में प्रस्ताव लिए। इनमें सन् 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से मुक्त रखने, सभी वर्गों के शिक्षकों की बकाया चल डीपीसी करने, पारदर्शी स्थानान्तरण नीति बनाने व डार्क जोन में लम्बे समय से कार्यरत तृतीय श्रेणी शिक्षकों के भी स्थानांतरण करने, आठवें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से ही लागू करने, सभी वर्गों के शिक्षकों की वेतन विसंगतियों का निस्तारण करने, कम्प्यूटर अनुदेशकों के आकस्मिक अवकाश प्रकरणों का समाधान व कम्प्यूटर अनुदेशक, प्रबोधकों, पंचायत सहायकों का पदनाम ‘शिक्षक’ किया जाये। इनके अलावा सभी सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में सामाजिक विज्ञान व हिन्दी सहित सभी छह विषयों के द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के पद अनिवार्य रूप से रखे जाने, पीएफआरडीए बिल को कैंसिल कर पुरानी पेंशन स्कीम को जारी रखा जानू, एनपीएस पेंशन स्कीम के तहत कटौती की गई कर्मचारियों की अंशदाई राशि को लौटाया जाने, बीएलओ सहित सभी प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त रखा जाए, को पारित किया गया। साथ ही नई शिक्षा नीति में संशोधन करते हुए शिक्षा का निजीकरण व स्कूलों का मर्जीकरण बंद हो, महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों, कम्प्यूटर शिक्षकों व प्रशासनिक सहायकों के पदों पर नियुक्ति करें, डीपीसी करने के बाद रिक्त होने वाले लगभग एक लाख शिक्षकों के पदों की भर्ती निकाल कर बीएड व एसटीसी किए हुए बेरोजगार को रोजगार उपलब्ध कराया जाए, कुक कम हैल्पर का मानदेय बढ़ाते हुए समय पर भुगतान किया जाए।विद्यार्थियों को पाठ्य-पुस्तक, छात्रवृत्ति, ट्रांसपोर्ट वाउचर राशि व अन्य सुविधाओं का लाभ समय पर किया जाये, के ज्वलंत मुद्दों पर प्रस्ताव लेकर विभाग व सरकार को भिजवाये गये।
लाडनूं के गोदारा ने भी प्रस्तुत किए शिक्षक हितों के सुझाव
सम्मेलन में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दी गईं। शिक्षक संघ शेखावत के लाडनूं ब्लॉक अध्यक्ष नानूराम गोदारा ने सांगठनिक मजबूती को आवश्यक बताते हुए शिक्षकों की मांगों से संबंधित अपने सुझाव व प्रस्ताव दिए तथा प्रांतीय नेतृत्व, मेजबान जिला चूरू व सुजानगढ़ ईकाई को सम्मेलन के आयोजन व अच्छी व्यवस्थाओं के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के संचालन की सम्पूर्ण व्यवस्था महामंत्री उपेन्द्र शर्मा ने की।








