इमर्सिव जैन समर स्कूल में विभिन्न देशों के 40 से अधिक सहभागी शामिल,
लाडनूं में ले रहे हैं प्राकृत, संस्कृत, हिंदी, जैन विद्या, योग, ध्यान व पांडलिrपि संरक्षण का प्रशिक्षण


लाडनूं (kalamkala.in)। फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के जैन स्टडी प्रोग्राम की ओर से जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के सहयोग से यहां जैन विश्व भारती एवं जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय परिसर में जैन एज्यूकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के डा. जसवंत भाई मोदी के सह प्रायोजन से आयोजित किए जा रहे तीन सप्ताह के इमर्सिव जैन समर स्कूल प्रोग्राम में विभिन्न देशों के 40 से अधिक उच्च शिक्षित विद्यार्थी-शोधार्थी भाग ले रहे हैं। वे यहां प्राकृत, संस्कृत व हिंदी भाषाओं के साथ जैन दर्शन, प्रेक्षा ध्यान, योग, पांडुलिपि संरक्षण आदि का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 19 जुलाई से शुरू हुई यह इंटरनेशनल समर स्कूल आगामी 7 अगस्त तक चलेगी। समर स्कूल को लेकर शुक्रवार को यहां जैन विश्व भारती के सचिवालय में इमर्सिव समर स्कूल के कार्यक्रम निदेशक निर्मल बैद सरदार शहर, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लूंकड़, संयुक्त सचिव नवीन बैंगाणी, प्रो. जगतराम भट्टाचार्य, जैन इंटरनेशनल ट्रेड आॅर्गेनाईजेशन जीतो की महिला विंग की अध्यक्षा शर्मिला ओसवाल, केलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी लाॅंग बीच की डा. शिवानी बोथरा, लाम्स एंजेल्स अमेरिका के प्रो. जेड फाॅरमेन व केलिफोर्निया अमेरिका के केविन पौ ने प्रेस से रूबरू होते हुए विस्तार से जानकारी दी।
नजरिया बदलने के लिए प्रतिदिन करवाया जा रहा है संतों से संवाद
समर स्कूल के प्रोग्राम डायरेक्टर निर्मल बैद ने बताया कि यहां सभी निर्धारित विषयों की प्रतिदिन 10 कक्षाएं आयोजित की जा रही है। हमने इन क्लासरूम को समाज से जोड़ा है और दिन भर की कक्षाओं और अन्य गतिविधियों के पश्चात सायंकाल यहां विराजित 500 साधु-संतों के साथ समर स्कूल के सभी विद्यार्थियों का संवाद कार्यक्रम भी रखा जाता है। इससे उन्हें अपने विषयों के सम्बंध में जिज्ञासाएं शांत करने के साथ ही आध्यात्मिक प्रेरणा भी प्राप्त होती है। यह सब इन विद्यार्थियों का प्राकृतिक रूप से दृष्टिकोण बदलने में अहम् भूमिका निभागता है। जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लूंकड़ ने बताया कि आचार्य श्री महाश्रमण के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के सम्मानित निर्देशन में यह इंटरनेशनल समर स्कूल कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें विश्वविद्यालय के जैन विधा एवं तुलनात्मक धर्म व दर्शन विभाग, प्राकृत एवं संस्कृत विभाग, योग एवं जीवन विज्ञान विभाग तथा अहिंसा एवं शांति विभाग का पूरा सहयोग मिल रहा है। यहां आए हुए सहभागियों को इन कक्षाओं के अलावा पारमार्थिक शिक्षण संस्थान, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल, समण संकाय एवं अणुव्रत विश्व भारती का ज्ञानवर्द्धक भ्रमण करवाया जा चुका है। अभी इन सबको अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद, प्रेक्षा इंटरनेशनल मेडिटेशन एंड योगा प्रशिक्षण केन्द्र, तेरापंथ महासभा, जैन विश्व भारती मुख्यालय एवं जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का भ्रमण भी ज्ञानार्थ करवाया जाएगा।
इन प्रशिक्षकों द्वारा दिया जा रहा है विभिन्न विषयों का ज्ञान
जीतो की महिला अध्यक्ष शर्मिला ओसवाल ने बताया कि इस इमर्सिव समर स्कूल में डाॅ. नलिनी बलबीर, डाॅ. निर्मल बैद, प्रो. जगतराम भाट्टाचार्य, डाॅ. अलेक्जेंडरा सशा रेस्टिफो, समणी पुण्य प्रज्ञा, डाॅ. शिवानी बोथरा, डाॅ श्री नाहटा, मीना चैकसी, शैलेश शिंदे आदि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जैन एज्यूकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना 2010 में की गई थी, तब से जैन धर्म व दर्शन के प्रचारार्थ काम कर रहा है तथा 50 से अधिक संस्थानों में प्राग्राम दिए हैं और उनका खर्च डाॅ जसंवत भाई मोदी उठा रहे हैं। प्रो. जगतराम भट्टाचार्य ने बताया कि समर स्कूल में 40 से अधिक सहभागी हैं, जो यूरोप, अमेरिका, साउथ अमेरिका, पौलेंड, यूक्रेन, इंग्लैंड, जर्मनी, ब्राजिल आदि देशों से इसमें भाग लेने के लिए भारत आए हैं और यहां प्रवास कर रहे हैं।







