आंतरिक शुद्धि, सकारात्मक सोच और चरित्र निर्माण की दिशा में आगे बढें- आचार्यश्री महाश्रमण, जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में हुआ आचार्यश्री महाश्रमण का प्रवचन

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आंतरिक शुद्धि, सकारात्मक सोच और चरित्र निर्माण की दिशा में आगे बढें- आचार्यश्री महाश्रमण,

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में हुआ आचार्यश्री महाश्रमण का प्रवचन

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य-विश्वविद्यालय) के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने शनिवार को जैन विश्वभारती संस्थान के प्रांगण में आयोजित विशेष प्रवचन कार्यक्रम में नैतिकता, सद्भावना और नशामुक्ति का प्रेरक संदेश दिया। अपने उद्बोधन में उन्होंने ने कहा कि वर्तमान समय में मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता नैतिक मूल्यों की पुर्नस्थापना है। नैतिकता ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाती है। आचार्यश्री ने उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और नागरिकों को जीवन में ईमानदारी, संयम और सद्भावना को अपनाने का आह्वान करते हुए नशामुक्त जीवन का संकल्प भी करवाया। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति की चेतना और संस्कारों को क्षीण करता है, जबकि संयम और सदाचार जीवन को ऊंचाई प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी को आंतरिक शुद्धि, सकारात्मक सोच और चरित्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

यह धर्माचार्यों से जुड़ा हुआ संस्थान

इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण ने विद्यार्थियों से कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में ज्ञान का विकास, संस्कार निर्माण व आत्मनिर्भरता का विकास होना चाहिए। उन्होनें संस्थान के पाठ्यक्रर्मो की चर्चा करते हुए कहा कि जैन विश्वभारती संस्थान सामान्य संस्थान नहीं होकर जैन धर्म के धर्माचार्यो से जुड़ा विशिष्ट संस्थान है, इसलिए यहां प्रत्येक व्यक्ति में नैतिकता, ईमानदारी व मूल्य जुड़े होने चाहिए। इस अवसर पर आचार्यश्री ने कहा कि संस्थान परिसर के अंदर व परिसर से बाहर भी खान-पान की शुद्धि के साथ मर्यादा व संस्कृति का पूरा ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी है।

यहां शिक्षा के साथ है संस्कारों का समन्वय

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड ने संस्थान की शैक्षणिक व आध्यात्मिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए आचार्यश्री महाश्रमण का भावपूर्ण स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री के मार्गदर्शन से संस्थान में शिक्षा के साथ संस्कारों का भी समन्वय सुदृढ़ हो रहा है। इस अवसर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में मुख्य मुनि महावीर कुमार, संस्थान के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनिश्री कुमार श्रमण, मुनिश्री योगेश कुमार, प्रोफेसर दामोदर शास्त्री आदि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए आचार्यश्री के संदेश को जीवन में उतारने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. युवराज सिंह खंगारोत ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षकगण, श्रावक-श्राविकाएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने आचार्य श्री महाश्रमण के प्रेरणादायी संदेश से लाभान्वित होकर जीवन में नैतिकता और नशामुक्ति के संकल्प को आत्मसात करने का संकल्प व्यक्त किया।

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Author: kalamkala

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