संसार की कोई भी बाधा स्त्री के आत्मविश्वास के आगे नहीं ठहर सकती- तहसीलदार कुटेंद्र राठौड़,
आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में
त्रिदिवसीय दीक्षारम्भ कार्यक्रम का समापन
लाडनूं (kalamkala.in)। तहसीलदार कुटेन्द्र राठौड़ ने कहा कि जब एक स्त्री अपने आपको अबला समझने के बजाय वाणी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के रूप में, जीवन को अर्थवत्ता प्रदान करने वाली देवी लक्ष्मी के रूप में तथा इस चराचर जगत की संचालिका शक्ति माँ दुर्गा के रूप में अपने भीतर के अस्तित्व को तलाश करती है, तो संसार की कोई भी बाधा उसके आत्मविश्वास के आगे नहीं ठहर सकती। उन्होंने यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में आयोजित त्रिदीवसीय दीक्षारम्भ समारोह के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए महाकवि जयशंकर प्रसाद की काव्य पंक्तियां ‘वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों; नाविक की धैर्य परीक्षा क्या, जब धाराएँ प्रतिकूल न हों।’ प्रस्तुत की और छात्राओं को सम्पूर्ण समर्पण भाव के साथ लक्ष्य निर्धारित करने और स्वावलंबन के साथ अपने पैरों पर खड़ा होने की नसीहत दी। साथ ही उन्होंने स्वयं की प्रतिभा के बल पर अपनी व्यक्तिगत पहचान को परिवार एवं समाज में स्थापित करने पल बल दिया। उन्होंने छात्राओं को अपने तहसीलदार के पद तक चुने जाने के दौरान आए अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं को अनुभवों के रूप में साझा किया।
स्त्री से मिलती है समाज के संचालन को गति
आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रविन्द्रसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिथि वक्ता विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एल. के. व्यास ने कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि स्त्री समाज की वह धुरी है, जिसकी वजह से समाज के सम्पूर्ण संचालन को गति मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय का प्राणतत्व बताया और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने एवं विद्यार्थी वर्ग में धीरे-धीरे तिरोहित होती जा रही लिखने की आदत को पुनः विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नेल्सन मण्डेला एवं सुनील गावस्कर का उदाहरण देते हुए छात्राओं को सकारात्मकता का महत्व भी बताया और इसे शारीरिक एवं मानसिक दोनों ही प्रकार की उर्जा संवर्धन हेतु कारगर बताया। प्रो. व्यास ने बताया कि असफलता भी जीवन में बहुत कुछ सिखाती है। अत: जीवन की बाधाओं एवं असफलताओं से भी सीखकर जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
छात्राओं ने किया अनुभवों को साझा
समापन समारोह में अंग्रेज़ी विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. रेखा तिवाड़ी ने छात्राओं को प्रेरक वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में अनेक छात्राओं ने भी अपने अनुभव साझा किए।कार्यक्रम के अंतिम दिवस सभी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के तहत संचालित आचार्य महाप्रज्ञ मेडिकल कॉलेज ऑफ नैचुरोपैथी एण्ड योग का अवलोकन भी करवाया गया।कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया तथा अतिथि वक्ताओं को संस्थान के प्रतीक चिह्न, शॉल एवं पुष्प गुच्छ प्रदान कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रगति भटनागर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक चारण ने किया। कार्यक्रम में समस्त छात्राएं एवं समस्त संकाय सदस्य उपस्थित रहे।







