लाडनूं में बेसहारा सांड के हमले से महिला घायल, चेहरे पर 10 टांके आए, हाल ही में तेली रोड पर भी हुआ था युवक घायल, निराश्रित गौवंश को गौशाला भेजने के प्रशासन के दावों की पोल खुली, पूरे शहर में अब भी बेसहारा गौवंश की समस्या जस की तस

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लाडनूं में बेसहारा सांड के हमले से महिला घायल, चेहरे पर 10 टांके आए, हाल ही में तेली रोड पर भी हुआ था युवक घायल,

निराश्रित गौवंश को गौशाला भेजने के प्रशासन के दावों की पोल खुली, पूरे शहर में अब भी बेसहारा गौवंश की समस्या जस की तस

लाडनूं (kalamkala.in)। प्रशासन ने गली-मोहल्लों में भटकते बेसहारा गौवंश पर अंकुश लगाने का प्रयास तो अवश्य किया, लेकिन हालात को सुधारने में अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है। अब भी लगभग सभी गली-मोहल्लों में पहले की तरह ही गौवंश विचरण करते, लड़ते-भिड़ते मिल जाएंगे। अभी तक लोगों को किसी प्रकार की कोई राहत नहीं मिल पाई है। लगता है 2026 में आचार्यश्री महाश्रमण के एक वर्षीय प्रवास काल में भी यहां आने वाले लाखों धार्मिक पर्यटकों और अन्य लोगों को इन बेसहारा सांडों के आतंक से रूबरू ही होना पड़ेगा।

बड़ा बास की महिला हुई घायल

रविवार को सांड (नंदी) की मार से एक महिला बुरी तरह से घायल हो गई। शहर के बड़ा बास में वार्ड संख्या 9 में सांड के हमले की चपेट में आकर घायल हुई महिला सायरा बानो पत्नी सुलतान खां खानजानी है, जिसे यहां एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। महिला के 3 दांत टूट गए। उसके सिर पर भी चोटें लगी है। उसे लगी चोटों के कारण चिकित्सक को उसके चेहरे पर 10 टांके लगाने पड़े हैं। कुछ दिन पूर्व ही तेली रोड़ पर भी एक ऐसा ही हादसा हुआ था, जिसमें एक युवक पर सांड का हमला हुआ और वह घायल हो गया था।

गौशाला के गौवंश वापस छोड़ दिए जाने से हुई समस्या

सामाजिक कार्यकर्ता अमजद खान ने बताया कि नगर पालिका कार्मिकों द्वारा गौशाला में ले जाकर छोड़े गए सांडों को गौशाला द्वारा वापस छोड़ दिए जाने से उन खुले सांडो की वजह से हुआ यह हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि शहर के अनेक मोहल्लों में अब भी बेसहारा गौवंश खुले घूम रहे हैं। बताया जा रहा है कि बड़ा बास क्षेत्र में कम से कम 30 सांडों को बेसहारा छोड़ा गया है। इस प्रकार सांडों के लड़ने-झगड़ने और हमलों के कारण हादसे हो रहे हैं, लेकिन नगर पालिका और उपखंड प्रशासन इनकी कोई सुध नहीं ले रहा है।

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Author: kalamkala

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