‘सामायिक’ में स्थिरचित्त रहकर खुद को पहचाना जा सकता है- प्रो. जैतावत, पर्युषण महापर्व के अन्तर्गत सामायिक दिवस मनाया, ‘भागती जिंदगी में ठहरने की कला’ विषय पर विचार प्रस्तुत

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‘सामायिक’ में स्थिरचित्त रहकर खुद को पहचाना जा सकता है- प्रो. जैतावत,

पर्युषण महापर्व के अन्तर्गत सामायिक दिवस मनाया, ‘भागती जिंदगी में ठहरने की कला’ विषय पर विचार प्रस्तुत

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के संरक्षण तथा मार्गदर्शन में चल रहे पर्युषण महापर्व 2026 के अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रमों के तीसरे दिन अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा सामायिक दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के ओएसडी प्रो. अशोक जैतावत ने सामायिक दिवस की थीम ‘भागती जिंदगी में ठहरने की कला’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि सामायिक मानव जीवन के आध्यात्मिक पक्ष का एक महत्वपूर्ण आयाम है, जिससे हम स्थिरचित्त रहकर खुद को पहचान सकते हैं। यह आध्यात्मिक प्रयास हमें सकारात्मक दृष्टिकोण की ओर प्रेरित करता है, अतः हम सभी को इसे जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। प्रो. जैतावत ने जीवन में हमेशा कर्म को प्रधानता देने पर जोर देते हुए कहा कि हमारे द्वारा जो भी कार्य किया गया है, उसके प्रति यदि कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया आती है तो उसके बारे में हमारा निर्णय तुरंत न होकर सोच समझकर, चिंतन एवं मनन के पश्चात प्रतिक्रिया करनी चाहिए।

सामायिक के महत्व को बताया

कार्यक्रम में प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. दामोदर शास्त्री ने ‘सामायिक’ के आध्यात्मिक रहस्य को सरल ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमें मानव जीवन बड़े ही सौभाग्य से मिला है, हमें जीवन में सद्कर्मों को अपनाना चाहिए। यह दिवस हमें मन के स्थान पर आत्मा की आवाज को महत्वपूर्ण करने की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने अनेक दृष्टांतों के माध्यम से पर्युषण पर्व और सामायिक की महत्ता को उजागर किया।सहायक आचार्य डॉ. लिपि जैन ने इबइस अवसर पर व्यावहारिक गतिविधियां भी करवाई, जिनमें दूसरों के प्रति मन में उत्पन्न होने वाले पूर्वाग्रहों एवं गलत धारणाओं का त्याग करने, किए गए कार्यों का परिणाम आकांक्षाओं के अनुरूप न आने पर क्रोध एवं आवेश के स्थान पर संयम, शालीनता तथा सहजता का व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ छात्रा योगिता शर्मा ने ‘हर प्राणी हित में हो दया, हो क्षमा’ गीत प्रस्तुत कर किया। अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने आभार ज्ञापित किया और पर्युषण महापर्व 2026 के चौथे दिन ‘वाणी संयम दिवस’ की जानकारी दी। कार्यक्रम का संयोजन सहायक आचार्य डॉ. बलबीर सिंह ने किया। कार्यक्रम की आयोजना में विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रवीना टैगोर एवं विद्यार्थयों की भूमिका रही। कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवाड़ी, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.बी.एल. जैन, जैन एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामदेव साहू, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़ आदि के साथ सभी विभागों के संकाय सदस्य तथा करीब 250 विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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