विश्व की श्रेष्ठतम भाषा संस्कृत का माधुर्य और सौरभ आज भी कायम- सीताराम सोनी,
लाडनूं के वरिष्ठ साहित्यकार सीताराम सोनी की नवीन पुस्तक ‘संस्कृत सौरभम्’ का विमोचन
लाडनूं (kalamkala.in)। क्षेत्र के संस्कृत व हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार सीताराम सोनी की
संस्कृत काव्य संग्रह की नवीनतम चौथी कृति ‘संस्कृत सौरभम्’ का पुस्तक विमोचन समारोह स्थानीय रामद्वारा सत्संग भवन में रामस्नेही संप्रदाय के संत अजबरामजी महाराज के सान्निध्य में किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित रंवती रमन काकड़ा ने की। कार्यक्रम में समागत क्षेत्र के विभिन्न साहित्यकारों ने इस पुस्तक को एक सुंदर रचना बताते हुए इसकी विषय-वस्तु की सराहना की और कहा कि आज के दौर में संस्कृत भाषा में रचना करने वाले सुधी लेखक काफी कम नजर आते हैं। ऐसे में इसका महत्व और अधिक हो जाता है। गौरतलब है कि सीताराम सोनी कि यह चौथी पुस्तक है। इनकी रचित हर पुस्तक की सराहना साहित्य जगत, शिक्षा जगत और आम पाठकों में हुई है।
विश्व की सबसे श्रेष्ठ भाषा है संस्कृत
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विमोचित पुस्तक के लेखक सीताराम सोनी ने कहा कि देव वाणी संस्कृत बहुत ही समृद्ध भाषा रही है। यह सबसे अधिक वैज्ञानिक, सुव्यवस्थित और सुमधुर भाषा है, जिसकी तुलना विश्व की किसी भी भाषा से नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि आज संस्कृत के लेखकों की कमी अवश्य आई है, लेकिन भाषा का माधुर्य और सौरभ आज भी कायम है। उन्होंने अपनी नवीन पुस्तक की विषयवस्तु और सामग्री व संदर्भों की जानकारी देते हुए बताया कि इस पुस्तक की रचना में विभिन्न स्रोतों से तथ्यात्मक जानकारी अवश्य ली गई, ताकि किसी तरह की भूल या कमी नहीं रहे, लेकिन पुस्तक की विषयवस्तु, रचना और भाषा-शैली का प्रवाह पूर्ण रूप से मौलिक और स्वतंत्र रहा है। इस पुस्तक ने एक कमी को पूरा किया है। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में समागत साहित्यकारों में पं. परमानंद शर्मा नंद, रामकुमार तिवाड़ी, राजेश विद्रोही, प्रेमलता बैगवानी, कालीप्रसाद शर्मा, छगनलाल स्वामी, रामबाबू शर्मा, लीलाधर शर्मा, मुनींद्र शर्मा मित्र, अभय नारायण शर्मा, रामचंद्र सोनी, रामानुज शर्मा, रामस्वरूप, गौरीशंकर नंदकिशोर आदि उपस्थित रहे।


