लाडनूं में मातमी धुनों के साथ परम्परागत ढंग से निकाला गया ताजियों का जुलूस, वहाबी करते रहे ताजियों का विरोध, बताया हराम व शरीयत के विरुद्ध

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लाडनूं में मातमी धुनों के साथ परम्परागत ढंग से निकाला गया ताजियों का जुलूस,

वहाबी करते रहे ताजियों का विरोध, बताया हराम व शरीयत के विरुद्ध

लाडनूं (kalamkala.in)। मातमी धुनों के बीच हजारों लोगों ने मुहर्रम के अवसर पर परम्परागत रूप से ताज़िए निकाले और शांतिपूर्वक जुलूस के साथ बस स्टेंड के समीप क़ब्रिस्तान स्थित कर्बला मैदान ले जाया जाकर धार्मिक रस्म अदायगी की गई। इस जुलूस के साथ पुलिस व प्रशासन का माकूल प्रबंध रहा। भारी पुलिस बल जुलूस के साथ चला और पूर्व निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए हजारों लोगों ने हज़रत इमाम हुसैन को याद किया। यहां तीन स्थानों सेवक चौक स्थित हदीरा पोल, गांधी चौक स्थित बटभोड़ा मस्जिद और बड़ा बास स्थित मोहिलों की पोल से ताजिए निकाले गए। इन ताजियों को बड़ी संख्या में लोगों ने ढोल-नगाड़ों और मातमी धुनों के साथ निकाला। सभी तीनों ताज़िए राहूगेट चौक में एक जगह एकत्र हुए और फिर लाठी-चालन आदि का विभिन्न प्रदर्शन करते हुए उमरशाह सैयद की दरगाह स्थित कब्रिस्तान ले जाया गया। मोहर्रम के जुलूस में नगर पालिका के अध्यक्ष रावत खां लाडवाण सहित मुस्लिम समाज के प्रमुख लोगों ने शिरकत की। इस अवसर पर तीनों ताजियों के लाइसेंसधारकों का सम्मान किया गया। जुलूस के दौरान उपखंड अधिकारी मिथलेश कुमार, तहसीलदार अनिरुद्ध देव पांडे, पुलिस उप अधीक्षक विक्की नागपाल, थानाधिकारी सीआई महीराम बिश्नोई, निम्बी जोधां थानाधिकारी रामेश्वर लाल आदि भी मौजूद रहे।

लाडनूं के ताजियों को लेकर मुस्लिमों में परस्पर विरोधी दो पक्ष नजर आए

लाडनूं में पहले छह से अधिक ताजिया निकाले जाते रहे थे। यहां धीरे-धीरे वहाबी (अहले-हदीस) सम्प्रदाय का प्रभाव बढ़ने से ताजियों की संख्या कम होने लगी। अब तीन ताजिया शेष रहे हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय में इनका भी विरोध तेजी से मुखर होता जा रहा है। सोशल मीडिया पर इस तरह की अनेक पोस्ट देखने को मिली। वहाबी लोग इन ताजियों को हराम और शरीयत के विपरीत मानते हैं, जबकि अन्य सुन्नी मुस्लिम इनको अपनी सैंकड़ों सालों की परम्परा बताया जाता है। बड़ा बास में भी इस वर्ष दो पक्ष नजर आए। इनमें एक पक्ष ताजियों का विरोधी रहा और दूसरे पक्ष ने विधिवत ताजिया का जुलूस निकाला। इस जुलूस में किसी तरह का विघ्न नहीं हो और शांति व कानून-व्यवस्था बनी रहे इसके लिए पुलिस व प्रशासन पूरी तरह से चुस्त-दुरुस्त रहा। इस कारण यह धार्मिक रिवाज पूर्ण शांति से सम्पन्न हुआ।

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Author: kalamkala

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