बस स्टेंड की गंदगी के असली दोषी लोगों पर हो सख्त कार्रवाई, सफाई के साथ उनकी तरफ भी ध्यान दे नगर पालिका,
आखिर कब तक चलेगा यह गंदगी फैलाने का कारोबार, कब तक नगर पालिका सुनेगी लोगों के ताने, नियमित सफाई के बाद भी बनी रहती है नगर पालिका ही दोषी


लाडनूं (kalamkala.in)। यहां बस स्टेंड सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां केवल शहर भर के लोग ही नहीं, बल्कि बाहर से आने वाले समस्त यात्रीगण, अतिथिगण, व्यापारी और एजेंट आदि का गुजरना रोजमर्रा रहता है। यहां की सफाई पर नगर पालिका इसी कारण पूरा ध्यान रखती है और सुबह-शाम दोनों समय यहां सफाई के लिए व्यवस्था कर रखी है, समय-समय पर पूरी टीम भी आकर सफाई करती है, लेकिन फिर भी हालत यहां हमेशा बदतर ही बने रहते हैं। आखिर ऐसा क्यों है? इस बारे में सभी जानते हैं। यहां दिन भर कचरा डाल कर गंदगी फैलाने वाले कोई बाहरी लोग नहीं हैं, यहां यह सारी गंदगी यहां आसपास के दुकानदार, ठेला चालक सब्जी आदि के विक्रेता ही कचरा लाकर डालते हैं। नगर पालिका कितनी ही सफाई कर दे, ये अपनी आदतों से बाज नहीं आते और कुछ ही देर में वहां वापस गंदगी फैला देते हैं। यहां फल-सब्जियों के अपशिष्ट, सड़ी-गली सब्जियां आदि डाली जाने और गन्ना रस निकालने वाले, ज्यूस वाले सारे अवशेष यहां बस स्टेंड पर लाकर डालते हैं और गंदगी फैलाते हैं। कुछ दुकानदार तो अपना मलबा, पत्थर आदि तक यहां लाकर बहुत ही बेशर्मी से डाल जाते हैं, जो आवागमन तक में बाधक रहता है। यह कचरा ऐसे दुकानदारों से खुद से ही वापस हटवाया जाना चाहिए। अन्यथा सफाई के बाद उसके शुल्क की रसीद बना कर ऐसे दुकानदारों से वसूली होनी चाहिए।
क्यों कोसा जाता है लगातार और बार-बार नगर पालिका को ही
बस स्टेंड पर सड़ी गली सब्जियों, फल व गन्ना के अवशेष आदि डाले जाने के बाद रही-सही कसर यहां बस स्टेंड के आसपास घूमने वाले गाय-सांड आदि पशुओं द्वारा उन्हें इधर-उधर फैला देने से निकल जाती है। गंदगी होने पर यहां के आसपास के ही कुछ अन्य दुकानदार नगर पालिका को कोसने लगते हैं और सारा ठीकरा सफाई कर्मियों के सिर पर फोड़ते हैं। यह सरासर अनुचित है। सब जानते समझते हुए भी कचरा लाकर डालने वाले किसी व्यवसायी को कोई कुछ नहीं कहता, बल्कि कचरा फैलने के बाद उनके फोटो लेकर नगर पालिका को दोषी ठहराने में जुट जाते हैं।
छाती पर कचरा डालने पर भी बनी रहती है मंदिर के कार्मिकों की चुप्पी
यहां पास में ही शहर का प्रमुख धार्मिक दर्शनीय स्थल सुखदेव आश्रम आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर है, जिसमें चौकीदार, सफाईकर्मी, व्यवस्थापक आदि स्टाफ निजी स्तर पर लगाया हुआ है। इस स्टाफ को सब पता है कि यहां बस स्टेंड पर गंदगी क्यों और कैसे फैलती है, लेकिन ये कभी ऐसा करने वालों को रोकते-टोकते नहीं। अगर ये लोग कुछ दिन पूरा ध्यान रखे तो यहां कचरा फेंकने वाले लोग आना बंद कर देंगे और यहां स्वत: ही सफाई रहने लगेगी। यहां के व्यवस्थापक और संचालकों को इस तरफ भी ध्यान देकर नगर पालिका के काम में सहयोगी बनना चाहिए। आखिर ऐसे दर्शनीय धार्मिक स्थल की शोभा को भी कचरा डालने से आंच आती ही है। नगर पालिका ने आज तक यहां की सफाई के सम्बन्ध में लाखों रुपए खर्च किए हैं, बहुत सारे कर्मचारी भी जुटे रहते हैं।
कचरा डालने वालों के प्रति सख्ती बरते नगर पालिका प्रशासन
यहां आसपास के दुकानदार और सब्जी विक्रेता आदि अपने यहां होने वाले कचरे को एकत्र करके बाकी शहरवासियों की तरह कचरा संग्रहण करने वाले ऑटो टीपर में या ट्रेक्टर में डालना शुरू कर देंगे तो समस्या समाधान में कोई रुकावट ही नहीं रहेगी। सभी लोगों को नगर पालिका ने गीला कचरा और सूखा कचरा के लिए अलग-अलग बाकेट दिए थे, उनका प्रयोग कर सकते हैं और अन्यथा जैसे लोग अपने घरों में व्यवस्था करते हैं, उसी तरह से दुकानों में व्यवस्था की जा सकती है। इन कचरा फैलाने वाले दुकानदारों पर नगर पालिका प्रशासन द्वारा सख्ती बरते जाने और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाकर वसूली की जाने की शुरुआत करनी जरूरी है। ये ठेला चालक नगर पालिका को किसी तरह का कोई लाभ नहीं पहुंचाते। इनका न तो कोई खाद्य लाइसेंस बनाया जाता है और न कोई वाणिज्यिक अनुज्ञा दी जाती है। उलटा इनको स्ट्रीट वेंडर्स के रूप में चिह्नित किया जाकर विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जाता है। ये ठेले गलियों में घूमने के बजाय बस स्टेंड पर व आसपास में एक ही जगह जमकर खड़े होकर नगर पालिका, पुलिस, यातायात और वाहन चालकों व नागरिकों के लिए समस्याएं खड़ी करते हैं। ऐसे लोगों को स्ट्रीट वेंडर सूची तत्काल हटाया जाना चाहिए। सबसे अधिक कचरा इनके द्वारा ही फेंका जाता है। बेसहारा पशुओं का विचरण इन लोगों के कारण ही होता है और उनसे लोगों को जान-माल का नुक़सान होने की घटनाएं होती रहती हैं।







