भाषाओं से मिलती है संस्कृतियां और विचारधारा को मजबूती- प्रो. जैन,
लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में भाषा मेले का आयोजन

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में एन.सी.टी.ई. एवं यू.जी.सी. द्वारा प्राप्त पत्रानुसार ‘भारतीय भाषा उत्सव’ के अंतिम दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मातृभाषा के प्रति प्रेम बढ़ाना, सभी भारतीय भाषाओं के बीच आपसी सद्भाव, विविधता में एकता का अनुभव कराना और भाषाओं को केवल किताबी न रखते हुए उन्हें जीवंत और इंटरैक्टिव तरीके से सीखना है। यह एक ऐसा कार्यक्रम है जहां लोग विभिन्न भाषाओं को मज़ेदार और सहभागी तरीकों से सीखते और अनुभव करते हैं, जिसमें शैक्षिक खेल, हस्तनिर्मित किताबें, कहानी सुनाना और ऐसे रंगमंच प्रदर्शन शामिल होते हैं, जहां दर्शक भी कहानी का हिस्सा बन सकें, जिसका लक्ष्य भाषाई सद्भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि भाषाएं संस्कृतियों और विचारधारा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। व्यक्ति और समाज की वास्तविक पहचान का महत्वपूर्ण घटक भाषा ही होती है। हिन्दी ही एकमात्र इस प्रकार की भाषा है, जिसमें हम अपने भावों को लिपिबद्ध कर सकते हैं। भारतीय भाषा उत्सव के अंतिम दिवस विद्यार्थियों ने भाषा मेला के रूप में स्वाति ने कविता, कविता स्वामी एवं पूजा प्रजापत ने कहानी, शारदा ने दोहा, पलक, आरती पारीक, उर्मिला, निशा, ललिता, कोमल, भारती ने सामूहिक रूप से लघु नाटिका के रूप में अपने भावों को उद्वेलित किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अमिता जैन ने किया। कार्यक्रम में समस्त संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।







