जीवन को साधने के लिए ध्यान और योग बहुत आवश्यक- डॉ. शंकर आकाश,
लाडनूं के इंटरनेशनल प्रेक्षा मेडिटेशन सेंटर में चित्त समाधि शिविर का आयोजन


लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्व भारती के अंतरराष्ट्रीय प्रेक्षाध्यान केंद्र में आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में चित समाधि शिविर चल रहा है। जैन विश्व भारती की निदेशक एडवोकेट डॉ. विजय श्री शर्मा ने बताया कि चित्त समाधि शिविर एक महत्वपूर्ण उपक्रम है, जो प्रतिमाह संचालित होता है। शिविर में दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, सूरत, असम आदि राज्यों सहित देश भर के विभिन्न कोनों से आए शिवरार्थी भाग ले रहे हैं। गुरुवार को शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में मोटिवेशनल गुरु डॉ. शंकर आकाश ने कहा कि जीवन में पचास वर्ष के बाद का समय उम्र की ढलान का और जीवन के नए प्लान का होता है। यह दौर जीवन का वह मोड़ होता है, जब उसे अपने आने वाले समय के लिए मानसिक, भौतिक और आर्थिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न प्रकार के निर्णय लेने होते हैं। इन सबके बावजूद अपने जीवन के संतुलन को बनाए रखते हुए ऐसे समय में स्वयं को व्यस्त और मस्त रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि खुशहाल जीवन के लिए विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराना पड़ता है और कई अप्रिय बातों और घटनाओं को नजरअंदाज भी करना पड़ता है, तभी जीवन सुखी बन सकता है। डॉ. आकाश ने कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की भावनाओं का सम्मान करता है। उसकी हर मनोकामना को ईश्वर पूर्ण करता है। उन्होंने जीवन को साधने के लिए ध्यान और योग को आवश्यक बताया।
वैराग्य भाव आना ही समाधि की ओर बढ़ना है
शिविर में डॉ. शांता जैन ने चित समाधि का उद्भव और विकास की विधियों पर प्रकाश डाला और कहा कि चित्त में वैराग्य का भाव आना समाधि की ओर बढ़ने का प्रमाण है। कार्यक्रम में पिंकी तेदा (बेंगलुरु) ने रूपरेखा प्रस्तुत की। पूनम तलेसरा में शिविर की व्यवस्थाओं के बारे में बताया। शिविर में चित समाधि का लाभ देश भर के विभिन्न राज्यों से समागत शिविरार्थी उठा रहे हैं।






