पति-पत्नी ने अदालत में ही परस्पर पहनाई फूलमालाएं और अपने बेटे-बेटियों के साथ खुशी-खुशी घर गए

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8 सालों से लंबित एक ही परिवार के 7 प्रकरणों का लोक अदालत में आपसी समझाईस से निस्तारण

 लाडनूं। तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत में यहां पिछले 8 सालों से न्यायालय में लम्बित एक ही परिवार के कुल 7 प्रकरणों का निस्तारण कर परिवार का पुनर्मिलन करवाया गया, जिसकी यहां सर्वत्र सराहना की जा रही है। इसे पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है। इन प्रकरणों में दोनों पक्षकार पति व पत्नी है तथा उन दोनों का पुत्र व पुत्रियां हैं। यह परिवार सन् 2014 से अनबन व आपसी झगड़े के कारण अलग-अलग रह रहे थे तथा न्यायिक मामलों में फंसे हुए थे। उर्मिला व कैलाश दोनों पति-पत्नी हैं। उर्मिला अपने पुत्र के साथ अलग रहती थी और कैलाश अपनी दो पुत्रियों के साथ अलग रह रहा था। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटके न्यायालय में इस एक ही परिवार के कुल 7 प्रकरण लंबित थे। इन उर्मिला बनाम कैलाश अनवान के मुकदमों का एक साथ ही लोक अदालत की भावना से आपसी समझाईस कराते हुए निस्तारण कर दिया गया। इनमें प्रार्थीया उर्मिला की ओर से अधिवक्ता इन्द्रचंद घोटिया तथा अप्रार्थी कैलाश की ओर से अधिवक्ता रविन्द्रसिंह मेडतिया न्यायालय में पैरवी कर रहे थे। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में लोक अदालत बैंच अध्यक्ष डॉ. विमल व्यास (वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लाडनूं) तथा लोक अदालत बैंच के सदस्य अधिवक्ता चेतनसिंह शेखावत एवं दोनों पक्षकरों के अधिवक्ताओं ने लोक अदालत की भावना से प्रयास करते हुए पूरे परिवार को एक साथ सामने बैठाकर समझाया। न्यायाधीश डॉ. विमल व्यास ने प्रार्थीया उर्मिला व अप्रार्थी कैलाश को समझाया कि अब उन्हें सारे पुराने मनमुटाओं को भुलाकर अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के बारे में सोचना चाहिए तथा बच्चों को भी अपने माता-पिता दोनों का सहारा बनकर उनकी सेवा करनी चाहिए। यह समझाईस और प्रयास सफल रहे। आखिर 8 साल बाद पति-पत्नी का पुनर्मिलन संभव हुआ। इस अवसर पर लोक अदालत में ही पति-पत्नी ने एक-दूसरे को माला पहना कर खुशी जताई व मनमुटावों को दरकिनार किया। वे दोनों पति-पत्नी खुशी-खुशी अपने पुत्र-पुत्रियों के साथ अपने घर गये, जिससे उपस्थित अन्य पक्षकार भी इस हर्षजनक प्रकरण को देखकर प्रेरित हुए और अन्य प्रकरणों को लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित करवाने को राजी हुए। इसी कारण इस लोक अदालत में प्रकरणों के निस्तारण का आंकड़ा 182 पहुंच पाया।

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Author: kalamkala

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