कब आएगा बैंक को अपने ही उपभोक्ताओं की सुविधा का खयाल, इन ‘ऊंची दुकान, फीके पकवान’ वाली पीएनबी बैंक शाखा में क्यों नहीं है लिफ्ट की सुविधा?

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कब आएगा बैंक को अपने ही उपभोक्ताओं की सुविधा का खयाल,

इन ‘ऊंची दुकान, फीके पकवान’ वाली पीएनबी बैंक शाखा में क्यों नहीं है लिफ्ट की सुविधा?

लाडनूं (kalamkala.in)। बैंकिंग व्यवस्था जन-जीवन में इतनी अधिक घुल-मिल गई है कि यह व्यक्ति की दिनचर्या के अभिन्न अंग का रूप ले चुकी है। आबाल-वृद्ध, महिला-पुरुष सबका काम बैंकों से अवश्य पड़ता है। लाडनूं में कुछ प्रमुख बैंक शाखाएं गलत स्थान पर बनी होने से महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को उनका खामियाजा भुगतना पड़ता है। ऊपरी मंजिलों पर स्थित इन बैंक शाखाओं के कारण ऐसे लोगों का अपने बैंकिंग कार्यों को लेकर सीढ़ियों पर चढना-उतरना भारी पड़ जाता है।

दम फूल जाता है और कराहने लगते हैं दर्द से लोग

लाडनूं में केवल वरिष्ठ नागरिकों ही नहीं बल्कि कम उम्र के लोग तक घुटनों के दर्द का शिकार हैं, और महिलाओं में तो घुटनों, कमर दर्द और जोड़ों के दर्द की समस्या विकराल है। ऐसे में उन्हें किसी को साथ लेकर ही बैंक आना पड़ता है और फिर भी बैंक की सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते ही उनकी हालत खराब हो जाती है। लाडनूं के राहूगेट क्षेत्र में स्थित भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में प्रायः दम फूले हुए, कमर या घुटनों पर हाथ टेके हुए और कराहते हुए महिला-पुरुषों को देखा जा सकता है। इन दोनों ही बैंक शाखाओं में लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। सीढ़ियां चढना, हांफना और कांपना तो इन बैंकों में आने वालों की नियति बन चुकी है। गौरतलब है कि समूची तहसील के लोगों को यहां बैंक में आना पड़ता है।

कतराने लगे हैं लोग बैंक आने-जाने से

काफी संख्या ऐसे लोगों की भी है, जो इन ‘ऊंची दुकान, फीके पकवान’ बैंक शाखाओं के कारण कहीं दूसरी बैंक शाखाओं में अपने खाते खुलवाने पर मजबूर हैं और काफी लोग तो चढ़ने-उतरने की पीड़ाओं के चलते ऐसे हैं, जो अपने बजाय परिवार के किसी सदस्य के नाम से अपने बैंक खाते को ज्वायंट करवाने पर भी मजबूर हुए हैं। भारतीय स्टेट बैंक की ऊंचाई और सीढ़ियों की परेशानियों को लेकर तो पेंशन उपभोक्ताओं ने आंदोलन भी किया और अंत में बैंक शाखा के नीचे उनके लिए अलग काउंटर खोलना पड़ा था। लेकिन पंजाब नेशनल बैंक अपने उपभोक्ताओं की सुविधाओं को लेकर पूरी अनदेखी कर रही है। उसने नीचे अपने एजेंट छोड़ रखे हैं और एकमात्र एजेंट से लेनदेन और व्यवहार व सुविधा का अभाव लोगों को बुरी तरह खलता है। फिर बैंकिंग के सारे काम एजेंट के माध्यम से संभव नहीं है। लोगों को मजबूरन सीढियां चढ़ना-उतरना ही पड़ता है। आखिर इस बैंक शाखा को अपने ग्राहकों उपभोक्ताओं की सुविधाओं का खयाल कब आएगा और आएगा भी या नहीं आएगा?

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Author: kalamkala

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