ईश्वर निराकार स्वरुप है, उसकी कोई प्रतिमा नहीं बनाई जा सकती- पं. भूपेंद्र सिंह आर्य, लाडनूं आर्य समाज मंदिर में वेद प्रचार का भजनोपदेश कार्यक्रम आयोजित

SHARE:

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

ईश्वर निराकार स्वरुप है, उसकी कोई प्रतिमा नहीं बनाई जा सकती- पं. भूपेंद्र सिंह आर्य,

लाडनूं आर्य समाज मंदिर में वेद प्रचार का भजनोपदेश कार्यक्रम आयोजित

लाडनूं (kalamkala.in)। आर्य समाज मंदिर में आयोजित वेद प्रचार के कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए भजनोपदेशक पंडित भूपेंद्र सिंह आर्य भरतपुर ने ईश्वर, मनुष्य के कर्तव्य और महिला उद्धार के बारे में व्याख्या करते हुए विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ईश्वर के गुणों को महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के नियमों में सबसे पहले पूरा उल्लेख किया है। ईश्वर के स्वरूप को लेकर मत-मतांतर विभिन्न आकार-प्रकार बताते हैं, लेकिन ईश्वर निराकार स्वरुप है, उसकी कोई प्रतिमा नहीं बनाई जा सकती। उन्हें किसी भी स्वरूप में नहीं ढाला नहीं जा सकता। उन्होंने ईश्वर को न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अजर और अमर बताया तथा कहा कि ईश्वर विराट् गुणों वाले हैं, लेकिन आज लोग उनके किसी एक गुण को पकड़ कर उसका कोई भी स्वरूप बना कर उसकी पूजा शुरु कर देते हैं। यह ईश्वर का सम्मान नहीं है। भूपेंद्र सिंह ने मनुष्य के कर्तव्यों के बारे में बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति को केवल अपनी ही उन्नति से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए। उन्होंने वैदिक शिक्षा के अनुकूल निर्धारित मानव कर्तव्यों के बारे में बताते हुए संध्योपासना और पंच यज्ञ को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर उन्होंने महिला शिक्षा और महिला विकास के बारे में बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने पहली बार महिलाओं को वेद पढने का अधिकार दिया, जो वेदों के अनुरूप सदा से चलता आ रहा था। मध्यकाल में महिलाओं को इस हक से वंचित किया गया था, जो महर्षि दयानंद ने पुनः प्रदान किया। उनकी शिक्षाओं के बल पर ही आज समाज परिवर्तन हुआ है और महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से बराबरी कर रही हैं। भूपेन्द्र सिंह ने अपनी बात संगीत और भजनों के साथ सरलता से हृदयंगम होने वाले तरीके से प्रस्तुत की। इसमें सहायक के रूप में पं. लेखराज ने उनका पूरा साथ दिया।

वेद की आज्ञाओं के अनुसार अपने जीवन को ढालें

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आर्य समाज लाडनूं के संरक्षक मुनिश्री ओमदास ने अंत में आभार ज्ञापित करते हुए कहा कि वेदों का अध्ययन और अध्यापन सबको करना चाहिए। वेदों की ईश्वरीय आज्ञाओं के अनुसार ही अपना जीवन ढालना चाहिए। उन्होंने उपस्थित जनों से योग को अपना कर एक सौ साल पर्यंत स्वस्थ बने रहने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में इनके अलावा पार्षद सुमित्रा आर्य, आर्य समाज के हिसाब परीक्षक डॉ. राजेन्द्र सिंह आर्य, यज्ञ प्रभारी तारा आर्य, प्रचार मंत्री दयानन्द आर्य, पुस्तकालयाध्यक्ष अनोपचंद सांखला, सुबेदार रामदेव दुजार, सुरेन्द्र प्रताप आर्य, कोषाध्यक्ष मेघाराम आर्य आदि लोग उपस्थित रहे।

kalamkala
Author: kalamkala

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे ज्यादा पड़ गई

नगर पालिका सभी नालों-नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करे, बेसहारा पशुओं को खिंदास नंदीशाला में भिजवाएं- एसडीएम ममता लहुआ, उपखण्ड अधिकारी ममता लहुआ ने निरीक्षण कर की शहरी सेवा शिविर की समीक्षा, दिए आवश्यक निर्देश

शहर चुनें

Follow Us Now