पूर्णिमा पर धार्मिक अनुष्ठानों के पीछे चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव- डॉ. यायावर,
आर्य समाज मंदिर में अधिकमास की ज्येष्ठ पूर्णिमा पर विशेष यज्ञ-सत्संग का आयोजन

लाडनूं (kalamkala.in)। अधिकमास ज्येष्ठ की पूर्णिमा के अवसर पर आर्य समाज मंदिर लाडनूं में विशेष यज्ञ व सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित यज्ञ के ब्रह्मा डॉ. जगदीश यायावर सैनी रहे और यजमान मुनिश्री ओमदास थे। यज्ञ-ब्रह्मा डॉ. यायावर ने इस अवसर पर बताया कि ज्योतिष शास्त्र का गणित भाग मान्य व विशेष होता है, लेकिन उसका फलित अमान्य होता है। समस्त ग्रह, नक्षत्र आदि का प्रभाव पूरी पृथ्वी पर होता है, लेकिन अरबों मनुष्यों में किसी एक पर उसके प्रभाव का अध्ययन केवल ज्योतिष के फलित से नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि सनातन परम्परा में एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक जो आराधना-साधना, उपासना-सत्संग आदि किए जाते हैं, जो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को ध्यान में रख कर होता है। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र में ज्वार आता है, उसी प्रकार मनुष्य के मन को भी चंद्रमा प्रभावित करता है। एक अध्ययन बताता है कि सबसे ज्यादा आत्महत्याएं पूर्णिमा या उसके आसपास की तिथियों में की जाती हैं। इसके पीछे चांद की जल आकर्षक शक्ति प्रभावी होती है, जो मनुष्य के मस्तिष्क को भी प्रभावित करती है। किसी तरह के मनोविकार वाले लोगों में उसका प्रभाव अधिक बढ जाते हैं। पूर्णिमा के अवसर पर उग्रता, क्रोध और अवसाद में वृद्धि होती है। कार्यक्रम में मुनिश्री ओमदास, श्रीमती मंजू बिड़ियासर, सुमित्रा आर्य, भंवरदास आदि ने विभिन्न धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी और परमात्मा के मुख्य नाम ‘ओम्’ और संध्योपासना व पंचयज्ञ कर्म का महत्व बताया।






