प्रशासन की संवेदनशीलता से घर बैठे दिव्यांग पेंशनर को मिली उसकी रुकी हुई पेंशन, काफी समय से पेंशन के रुके होने से परेशान हुडास की परमेश्वरी के घर जाकर प्रशासन ने किया उसका भौतिक सत्यापन

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प्रशासन की संवेदनशीलता से घर बैठे दिव्यांग पेंशनर को मिली उसकी रुकी हुई पेंशन,

काफी समय से पेंशन के रुके होने से परेशान हुडास की परमेश्वरी के घर जाकर प्रशासन ने किया उसका भौतिक सत्यापन

लाडनूं (kalamkala.in)। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जन कल्याण के लिए आयोजित किये जा रहे ग्रामीण सेवा शिविर आमजन के लिए पूरे राहतकारी सिद्ध हो रहे हैं। लाडनूं तहसील के ग्राम पंचायत हुडास की रहने वाली परमेश्वरी दिव्यांग है और उसकी पेंशन वार्षिक भौतिक सत्यापन के अभाव में रुक गई थी। वह दिव्यांग होने से भौतिक सत्यापन के लिए कहीं जा नहीं पाई थी। ग्रामीण सेवा शिविर ने उसकी जिंदगी में वापस खुशियां भरने में मदद की और एसडीएम ममता लहुआ के निर्देशन में उसकी रुकी हुई पेंशन फिर से शुरू करवाने में सफलता मिली।सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के कार्मिकों द्वारा यह राहत की अनूठी मिसाल प्रस्तुत हुई है।

घर जाकर करवाया परमेश्वरी का भौतिक सत्यापन 

ग्राम पंचायत हुडास की निवासी परमेश्वरी, जो कि एक दिव्यांग पेंशनर हैं, लंबे समय से अपनी रुकी हुई पेंशन को लेकर परेशान थी। शारीरिक रूप से अक्षम (दिव्यांग) होने के कारण वे अपना वार्षिक भौतिक सत्यापन कराने के लिए सरकारी दफ्तर में जाने के लिए पूरी तरह असमर्थ थी।शिविर के दौरान जब विभाग को परमेश्वरी की इस समस्या की जानकारी मिली, तो प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत कदम उठाया। शिविर प्रभारी ममता लहुआ के निर्देश पर विभागीय कार्मिक आशु सिंह शेखावत स्वयं चलकर परमेश्वरी के घर पहुंचे और घर बैठे ही उनके भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया को पूरी सजगता के साथ संपन्न किया। महीनों से अटकी पेंशन दोबारा चालू होने की खबर मिलते ही परमेश्वरी के चेहरे पर संतोष और खुशी की चमक लौट आई। उन्होंने प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस मदद से उन्हें दफ्तरों की भागदौड़ से बहुत बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार और प्रशासन का यह कदम अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सुशासन पहुंचाने का एक बेहतरीन उदाहरण है।

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Author: kalamkala

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