लाडनूं में सोमवार को मिला शिव का अनोखा संकेत? पेड़ से तोड़ते ही पपीते के अंदर मिली शिव के नाग की आकृति, बढा कुतूहल और हैरानी, कुदरत का चमत्कार या आस्था का संकेत? अद्भुत नजाराः पपीता में शिव का नाग दिखने को लोगों ने बताया महादेव का चमत्कार

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लाडनूं में सोमवार को मिला शिव का अनोखा संकेत?

पेड़ से तोड़ते ही पपीते के अंदर मिली शिव के नाग की आकृति, बढा कुतूहल और हैरानी,

कुदरत का चमत्कार या आस्था का संकेत? अद्भुत नजाराः पपीता में शिव का नाग दिखने को लोगों ने बताया महादेव का चमत्कार

लाडनूं (kalamkala.in)। यहां मालियों का बास मे एक पपीते के पेड़ से पपीता तोड़ा गया और वह तोड़ते ही स्वतः ही दो भागों में बट गया। कटे हुए एक भाग में एक आकृति नजर आई, जो साक्षात् शिव के गले में लिपटे नाग जैसी थी। यह घटना राजस्थान के लाडनूं शहर की है, जहां लम्बे समय तक पार्षद रही समाजसेविका सुमित्रा आर्य सैनी ने अपने घर में लगे पपीते के पेड़ से रोज की तरह ही सोमवार को सुबह ही एक पपीता तोड़ा। पपीता पेड़ से टूटते ही अपने आप ही दो भागों में बट गया, जैसे उसे किसी ने काटा हो। अचरज तो तब हुआ, जब उन्हें उस कटे हुए एक भाग में शिव के गले में विराजमान नाग की साक्षात् आकृति बनी हुई दिखाई दी। उन्होंने उसे अपने परिवार के लोगों और कुछ अन्य आए हुए व्यक्तियों को दिखाया, तो वे भी उसे देख कर दंग रह गए। इस आकृति को कुछ लोग शेषनाग का स्वरूप बता रहे हैं। आस्था के फलस्वरूप इसे देखकर कुछ लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं और श्रद्धावश इसकी पूजा-अर्चना तक करने लगे। इसे देखने के लिए बहुत से लोग आने लगे हैं।

कुदरत का करिश्मा या आस्था का चमत्कार

कोई इसे कुदरत का करिश्मा कह रहा था, तो कोई इसे आस्था का चमत्कार कहने लगा, तो कोई सोमवार के दिन शिव की कृपा बताने लगा। सोमवार को शिव की आराधना का दिन माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह एक शुभ संकेत हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के साथ नाग का विशेष संबंध माना जाता है और नाग को शक्ति, निर्भयता तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं में भगवान शिव के गले में विराजमान नाग को वासुकी बताया गया है। यहां गौरतलब है कि सुमित्रा आर्य प्रकृति प्रेमी है और उन्हें पेड़-पौधे लगाने का सदा से ही शौक है। उन्होंने अपने घर में तरह-तरह के फूलों-फलों के ही नहीं औषधीय पेड़ व पौधे लगा रखें हैं। पिछले दिनों उन्होंने लोगों को सैंकड़ों की संख्या में पेड़-पौधों का नि:शुल्क विवरण भी किया था। 

अनोखी आकृति बनी कौतुहल

पपीते के अंदर बीजों की जगह उसके कुदरती रेशों व गूदे से बनी इस आकृति को देखकर परिवार के लोग भी हैरान रह गए। सबका कहना था कि यह आकृति नाग के फन जैसी प्रतीत हो रही है। वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. जगदीश यायावर सैनी ने बताया कि यह प्राकृतिक संरचना है, जिससे नाग की तरह की आकृति बन गई है, जो किसी परिचित रूप या प्रतीक होने से लोगों को इसके प्रति आश्चर्य और आकर्षण बना हुआ है। यह प्रकृति की अनोखी कारीगरी कही जा सकती है। वैसे इस तरह की आकृतियों का पपीते या अन्य फलों के भीतर निकलना प्राकृतिक विकास या बनावट का एक संयोग मात्र होता है, जिसे लोग अपनी आस्था के अनुसार धार्मिक स्वरूप मान लेते हैं। प्रकृति कई बार ऐसे अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर देती है, जो लोगों को आश्चर्यचकित कर देते हैं। फलों और सब्जियों के भीतर कई बार बीजों, रेशों और प्राकृतिक संरचना के कारण ऐसी आकृतियां बन जाती हैं, जो किसी परिचित चिन्ह या आकृति जैसी प्रतीत हो सकती हैं। इसके बावजूद इस अनोखे पपीते की चर्चा क्षेत्र में बनी हुई है। यह अनोखी आकृति लोगों के बीच कौतूहल और चर्चा का विषय बनी हुई है। आस्था और विज्ञान, दोनों नजरियों से लोग इस घटना को अपने-अपने तरीके से देख रहे हैं।
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Author: kalamkala

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