लाडनूं के पहले डीएसपी होंगे राजेश ढाका, लम्बे समय से थी सीओ आफिस खोले जाने की मांग
उद्यान विभाग में खोला जा रहा है नया वृताधिकारी कार्यालय, हाईवे पर बनेगा पुलिस का निजी भवन
लाडनूं। लाडनूं क्षेत्र में दो पुलिस थाने खोले जाने, एक अतिरिक्त पुलिस चैकी स्ािापित किए जाने और डीएसपी कार्यालय लाडनूं में खुलवाए जाने की मांग यहां लम्बे समय से चलती रही है। पुलिस महकमे द्वारा इस तरह के प्रस्ताव भी उच्च अधिकारियों को और राज्य सरकार को भिजवाए गए और पुलस अधिकारियों ने यहां आकर स्थिति का अवलोकन भी किया और इस बात की ताईद भी की कि यहां इन सबकी जरूरत है। पिछले कई सालों से चल रही इस सारी कवायद के बाद अब कहीं जाकर लाडनूं का भाग्योदय हुआ है और यहां डीएसपी कार्यालय क्षुलने जा रहा है। हाल ही में पुलिस विभाग ने इस सम्बंध में आदेश जारी करके वृताधिकारी की पोस्टिंग भी कर दी है। यह वृताधिकारी सीओ कार्यालय खुल जाने से अब तक पुलिस सम्बंधी कतिपय कार्यों के लिए डीडवाना जाने वाले लोगों को राहत मिल सकेगी। जयपुर के गोविंदगढ़ से आरपीएस अधिकारी राजेश ढाका को लाडनूं में नवसृजित वृताधिकारी के पद पर लगाया गया है। राजेश ढाका लाडनूं के लिए प्रथम वृताधिकारी होंगे। पुलिस विभाग द्वारा जारी 149 आरपीएस अधिकारियों के स्थानांतरण की सूचि में लाडनूं को भी शामिल करके यहां यह पहली पोस्टिंग की गई है।
हाईवे पर बनेगा डीएसपी कार्यालय का भवन
पुलिस विभाग के पुलिस उप निरीक्षक कार्यालय के लिए फिलहाल इसे वाटर वकर्स के पीछे उद्यान विभाग के भवन में कार्यालय स्थापित किया जाकर शुरू किया जाएगा। लेकिन इस वृताधिकारी कार्यालय का शीघ्र ही अपना स्वयं का भवन भी हो पाएगा। रेलवे ओवर ब्रिज के पार हाईवे पर आगे आसोटा-पदमपुरा ग्राम की सीमा में पेट्रोल पम्प के पास इस कार्यालय के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है और शीघ्र ही वहां नए पुलिस-भवन बनाए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इस स्थान को पुलिस के उच्च अधिकारियों द्वारा बहुत पहले हीे मौका देखकर चिह्नित किया जा चुका है। इस पद पर सरकार द्वारा वृताधिकारी को पदस्थापित किए जाने से पुलिस विभाग ने इसके शुभारम्भ के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। गौरतलब है कि लाडनूं में डीएसपी कार्यालय के नवसृजन के अलावा यहां निम्बी जोधां में पुलिस थाना बनाए जाने और जसवंतगढ पुलिस थाने को मीठड़ी में स्थानान्तरित किए जाने, जावा बास में नई पुलिस चैकी खोले जाने की मांग लम्बे समय से की जाती रही है।






