बेहतर समन्वय हो भारतीय भाषाओं के बीच, विश्व मंच पर बढ़े सक्रियता, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, केंद्रीय हिंदी संस्थान और भारतीय भाषा परिवार के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा समारोह

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बेहतर समन्वय हो भारतीय भाषाओं के बीच, विश्व मंच पर बढ़े सक्रियता,

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, केंद्रीय हिंदी संस्थान और भारतीय भाषा परिवार के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा समारोह

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, केंद्रीय हिंदी संस्थान और भारतीय भाषा परिवार के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा समारोह’ का आयोजन किया गया। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् के आजाद भवन सभागार में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। भारतीय भाषाओं के बीच आपसी समन्वय बेहतर हो साथ ही विश्व मंच पर सक्रियता भी बढ़े, इस उद्देश्य को लेकर दो सत्रों में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। साथ ही विदेशों में भारतीय भाषाओं एवं हिंदी के विकास में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले भाषाकर्मियों को सम्मानित भी किया गया।

प्रथम सत्र का विषय था ‘भारतीय भाषाओं का अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य’ और इस प्रस्तावित विषय पर प्रो. नारायण कुमार की प्रस्तावना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। ब्रिटेन से आयीं हिंदी की लोकप्रिय साहित्यकार दिव्य माथुर मुख्य अतिथि रहीं। सत्र की अध्यक्षता संकल्प फाउंडेशन के अध्यक्ष संतोष तनेजा जी ने की। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के अध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. रविन्द्र कुमार ने किया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय भाषाओं की अधिकाधिक सहभागिता बढ़ाने के संकल्प के साथ यह सत्र समाप्त हुआ। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राजेश कुमार ने दिया।

 आयोजन का दूसरा सत्र ‘विदेशों में भारतीय भाषाओं की उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ’ पर केंद्रित रहा। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के विदेश राज्यमंत्री श्री मुरलीधरन ने अनलाइन रूप में जुड़कर अपनी बात रखते हुए हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि 13वां ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ फ़ीजी में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष श्री चमु कृष्ण शास्त्री ने भारतीय भाषाओं को विदेशों में प्रथम भाषा के रूप में उपयोग करने पर ज़ोर दिया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं भारतीय भाषा मंच के संरक्षक श्री अतुल कोठारी ने भाषाओं के प्रति स्वाभिमान पर बल दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र गुप्ता ने प्रथम अंतरराष्ट्रीय भाषा समारोह के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इस संकल्पना को आगे बढ़ाना चाहिए। इसी सत्र में जापान के प्रोफ़ेसर मिजोकामी ने भारतीय भाषाओं की स्थिति को सुधारे जाने के लिए प्रयास करने पर बल दिया।

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के महानिदेशक श्री कुमार तुहिन ने कहा कि दुनिया भर में भारतीय भाषाएँ समझीं और बोली जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव श्री श्याम परांडे ने  विदेशों में भाषा और संस्कृति के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् द्वारा किए जा रहे प्रयत्नों की जानकारी दी। केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष अनिल जोशी ने भारतीय भाषाओं के शिक्षण और प्रोत्साहन के लिए विदेशों में तंत्र और सुविधाएँ विकसित करने पर बल दिया है। कार्यक्रम में डॉ. मुकेश्वर चुन्नी एवं डॉ. विष्णु विश्राम को ‘भारतवंशी गौरव सम्मान’ प्रदान किया गया। साथ ही नौ देशों के भाषा के प्रति समर्पित बारह विद्वानों को अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मान प्रदान गया। कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन प्रख्यात कथाकार श्रीमती अलका सिन्हा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन श्री राजेश चेतन ने दिया।

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Author: kalamkala

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