अणुव्रत जाति, सम्प्रदाय भेदों से पृथक है- समणी कुसुम प्रज्ञा, अणुव्रत के अमृत महोत्सव पर व्याख्यानमाला का प्रथम पुष्प आयोजित

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अणुव्रत जाति, सम्प्रदाय भेदों से पृथक है- समणी कुसुम प्रज्ञा,

अणुव्रत के अमृत महोत्सव पर व्याख्यानमाला का प्रथम पुष्प आयोजित

लाडनूं। अणुव्रतआंदोलन के गौरवशाली 75 वर्ष होने पर आयोजित ‘अणुव्रत अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष में संचालित की जख रही व्याख्यान माला के प्रथम पुष्प के रूप में यहां ऋषभ द्वार भवन में साध्वीश्री लक्ष्य प्रभा के सानिध्य में कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम में अणुव्रत के असांप्रदायिक स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रो. समणी कुसुम प्रज्ञा ने कहा कि अणुव्रत एक असांप्रदायिक धर्म है, जिसमें वर्ग, जाति, धर्म, संप्रदाय, नस्ल आदि को लेकर कोई भेदभाव नहीं है। अणुव्रत उपासना कोई सामान्य धर्म नहीं होकर एक चारित्रिक धर्म है। किसी भी धर्म की उपासना करने वाला व्यक्ति अणुव्रती हो सकता है, उसके लिए उसे किसी को गुरु या आराध्य मानने की आवश्यकता नहीं होती है। प्रामाणिक जीवन जीने वाला प्रत्येक व्यक्ति अणुव्रती है। उन्होंने कहा कि अर्थ अथवा वस्तुओं की प्राप्ति के लिए सीमा का निर्धारण करना चाहिए। अणुव्रत में संग्रह की सीमा निर्धारण की बात की जाती है। उन्होंने बताया कि आचार्य तुलसी ने अर्जन के साथ विसर्जन का एक महामंत्र भी दिया था। कार्यक्रम में साध्वी लक्ष्य प्रभा ने अणुव्रत के ध्येय वाक्य ‘संयम ही जीवन है’ को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार संयम सभी समस्याओं का समाधान है। इस अवसर पर कैलाश सिंघी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अणुव्रत व्याख्यानमाला के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने अमृत महोत्सव वर्ष में देशभर में 75 व्याख्यान कराने का संकल्प व्यक्त किया और आचार्यश्री तुलसी की जन्मभूमि लाडनूं में प्रथम व्याख्यान को उपयोगी बताया। उन्होंने अणुव्रत आंदोलन को व्यक्ति सुधार का और बदलाव का आंदोलन बताया तथा कहा कि व्यक्ति को अपने बदलाव से शुरुआत करनी चाहिए। आचार्य तुलसी ने कहा था कि ‘हम बदलेंगे युग बदलेगा, हम सुधरेंगे युग सुधरेगा।’

इनका किया गया सम्मान

इस अवसर पर राष्ट्रीय अणुव्रत व्याख्यानमाला का संयोजक बनाए जाने पर प्रो. त्रिपाठी का सम्मान अणुव्रत समिति लाडनूं द्वारा किया गया तथा डॉ. वीरेंद्र भाटी मंगल को राष्ट्रीय अणुव्रत लेखक मंच का संयोजक बनाए जाने पर उनका सम्मान किया गया। कोलकाता प्रवासी किरण चंद सिंघी, अणुव्रत महासमिति के पूर्व अध्यक्ष कैलाश चंद सिंह सिंघी एवं मंजू सिंघी का सम्मान किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ समिति की महिला कार्यकर्ताओं द्वारा अणुव्रत गीत से किया गया। अंत में अणुव्रत समिति के स्थानीय अध्यक्ष शांतिलाल जैन ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर शिव शंकर बोहरा, राजेश नाहटा, लक्ष्मीपत सोनी, अब्दुल हमीद आदि अणुव्रत समिति के कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वीरेंद्र भाटी मंगल ने किया।

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Author: kalamkala

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