इटली में प्रवास करने के बावजूद पशु-पक्षियों के प्रति उमड़ता प्रेम अपूर्व मिसाल बना, सुजानगढ़ के विश्वनाथ तंवर हर माह इटली बैठे लेते हैं लाडनूं के गोवंश और पक्षियों की सुध

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इटली में प्रवास करने के बावजूद पशु-पक्षियों के प्रति उमड़ता प्रेम अपूर्व मिसाल बना,

सुजानगढ़ के विश्वनाथ तंवर हर माह इटली बैठे लेते हैं लाडनूं के गोवंश और पक्षियों की सुध


जगदीश यायावर। लाडनूं/ सुजानगढ़/ लिचे-इटली (kalamkala.in)। भारतीय संस्कृति में धार्मिक भावनाओं, श्रद्धा व आस्था अपने आप में हमेशा बलवती रही है। देश में दानदाताओं की कमी नहीं रही है, लेकिन लगभग अधिकांश अपना नामपट्ट या शिलालेख अवश्य ठोंक देते हैं। कुछ पुण्यकामी ऐसे भी मौजूद हैं, जिनका एक हाथ दान करता है, तो दूसरे को उसका पता नहीं चलने देते। आज मूक पशुओं और पंछियों के हित के लिए चुपचाप काम करने वाले लोग तो मिल जाएंगे, जो अपनी आय में से तुच्छ अंश इन प्राणियों के लिए भी खर्च करना नहीं भूलते। यहां रहकर नजदीक से प्राणियों की दशा देख कर व्यथित होकर तो लोग दान के लिए उत्सुक होते हैं, लेकिन सदैव इन प्राणियों की पीड़ा को अपने हृदय में महसूस करना और पीड़ा को कम करने को लालायित रहना व्यक्ति की सुहृदयता और करुणा-उदारता की भावना को प्रकट करता है।

इटली प्रवासी की उदात्त भावनाएं लाडनूं में हो रही फलीभूत

इटली में प्रवास करने वाले सुजानगढ़ निवासी विश्वनाथ जी तंवर माली एक ऐसी शख्सियत है, जो वहां बैठे अपनी मातृभूमि के गौवंश, पक्षियों और यहां तक कि चींटियों तक की चिंता करते हैं। हर माह जैसे ही अमावस्या की तिथि आती है, वे यहां बैठे अपने परीचितों को एकमुश्त एमाउंट भेज देते हैं और उनसे गौशाला और अन्य स्थानों पर गायों के लिए हरा चारा, गुड़ आदि भिजवा कर उनके पोषण का बंदोबस्त करते हैं। साथ ही लोवड़िया श्मशान आदि स्थानों पर कबूतरों और अन्य पक्षियों और चींटियों तक के लिए ज्वार, बाजरा आदि अन्न डलवाने की पर्याप्त व्यवस्था करते हैं। उनके स्थानीय सहयोगियों में मुकेश यादव (जादम) सैनी प्रमुख है। गौरतलब है कि विश्वनाथ जी अपने परिवार सहित दशकों से इटली रहते हैं, लेकिन वहां वे अपने धर्म-संस्कृति, परम्पराओं, आस्थाओं और पर्व-त्योहारों का सदैव स्मरण रखते हैं और उनके अनुसार स्वयं व परिवार ही नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के समस्त भारतीयों के साथ वे होली-दीवाली आदि धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस भी वहां इटली में मनाना नहीं भूलते और तिरंगा झंडे के साथ विशाल आयोजन नियमित रूप से करते हैं।

‘चीड़ी चोंच भर ले गई, नदी न घटियो नीर।
दान दिए धन ना घटे, कह गए दास कबीर।।’
kalamkala
Author: kalamkala

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