लाडनूं में आए सूंटे से भारी नुकसान, बिजली के खंभे धराशायी हुए, तार टूटे, पेड़ गिरे, बस्तियों में पानी भरा

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लाडनूं में आए सूंटे से भारी नुकसान, बिजली के खंभे धराशायी हुए, तार टूटे, पेड़ गिरे, बस्तियों में पानी भरा

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। क्षेत्र में आए तेज सूंटे में बरसात के साथ तूफानी हवाओं ने क्षेत्र में बिजली के अनेक खंभों को धराशायी कर दिया। यहां हाईवे पर स्थित कोर्ट के पास, गोरेड़ी गांव में, सुनारी रोड आदि विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के खंभों के गिरने और तारों के टूटने की जानकारी मिल रही है। दिन भर भारी गर्मी और उमस के बाद लाडनूं में शाम को छह बजे बाद अचानक तेज हवाओं के साथ आई बरसात ने जहां लोगों को ठंडक का अहसास करवाया, वहीं पेड़ों, टीन शेड, सोलर प्लांट आदि को भी क्षेत्र में काफी नुक़सान पहुंचा है। रात हो जाने से लोग अभी तक इस सूंटा से हुए नुकसान की पूरी जानकारी नहीं कर पाए है‌ं। बिजली के खंभों के गिरने और तारों के टूटने से पूरे क्षेत्र में बिजली गायब हो गई, जिसके वापस ठीक होकर चालू किए जाने में ढाई घंटे से अधिक का समय लग गया।

पानी भरने से अनेक क्षेत्र डूबे

तेज बरसात के इस दौर से चारों तरफ पानी ही पानी कर दिया। लाडनूं का बस स्टेंड डूब गया। चारों तरफ पानी ही पानी हो जाने से बसों का आवागमन प्रभावित हुआ। यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। बस स्टेंड पर सारे धंधे बंद हो गए। पार्षद सुमित्रा आर्य ने बताया कि खंदेड़ा पर अनधिकृत कब्जों से मिट्टी भराई करने से यह समस्या पैदा हुई है। नगर पालिका, राजस्व विभाग और उपखण्ड प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही का खामियाजा शहर के सारे लोग भुगत रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस स्टेंड का पानी आस पास की बस्तियों में घुस कर भी लोगों को परेशानियां पैदा कर रहा है। रेलवे फाटक के पास भी तालाब की स्थिति बन गई और इसी तरह शहर के अन्य अनेक निचाई वाले इलाकों में पानी भर गया। सांसी बस्ती में पानी भरने से अनेक घरों में भी पानी घुस गया। इससे लोगों के घरों में रखे सामान को नुक्सान पहुंचा। पूर्व पार्षद नेमाराम भानावत ने बताया कि बस स्टेंड से आने वाले नाले की सफाई नहीं होने और बहाव सही नहीं होने से पूरा पानी सांसी बस्ती में घुस जाता है। नगर पालिका प्रशासन को इस बारे में अनेक बार सूचित किया जाने के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि अनेक मकान बारिश के प्रभाव से कभी भी ढह सकते हैं और जान-माल के नुकसान की संभावना बनी हुई है।

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Author: kalamkala

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