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लाडनूं की पुरानी मांग ‘सुजला’ जिले के गठन को लेकर फिर उठाई आवाज, चौ. चरणसिंह विचार मंच ने किया आंदोलन का ऐलान, सभी से अभियान में साथ देने की अपील

लाडनूं की पुरानी मांग ‘सुजला’ जिले के गठन को लेकर फिर उठाई आवाज,

चौ. चरणसिंह विचार मंच ने किया आंदोलन का ऐलान, सभी से अभियान में साथ देने की अपील

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। पिछली कांग्रेस सरकार ने नए जिलों की राज्य में बाॅैछार सी लगा दी, लेकिन ये सभी जिले ऐसे थे कि ‘अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को देत’ कहावत चरितार्थ हो रही थी। जिन जिलों के लिए लम्बे समय से मांग थी, उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया और जिनकी कोई चर्चा तक नहीं थी, उन्हें जिले का दर्जा चांदी की तश्तरी में सजा कर सौंप दिया गया। अब नई सरकार बनने के बाद इन सब पर पुनर्विचार किए जाने की आवश्यकता बन गई है। लाडनूं, जसवंतगढ और सुजानगढ के परस्पर जुड़े हुए क्षेत्र को एक नया जिला ‘सुजला’ गठित किए जाने की मांग काफी अर्से स चल रही थी। लाडनूं को डीडवाना में शामिल किए जाने के बाद यह मांग केवल सुजानगढ को जिला बनाने तक सीमित होकर रह गई थी। लेकिन अब चौधरी चरणसिंह विचार मंच ने इस मुद्दे को फिर से छेड़ा है और ‘सुजला’ जिले का गठन करने की मांग दोहराई है।

पूर्ववर्ती सरकार ने चुनावी मंसूबों के लिए की मनमर्जी से घोषणाएं

चौधरी चरण सिंह विचार मंच के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद घिंटाला ने बताया कि राज्य की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा आनन-फानन में अपने चुनावी-मंसूबों को पूरा करने की मंशा के चलते राज्य व जिलों-तहसीलों की क्षेत्रीय भौगोलिक स्थिति, क्षेत्र के संसाधनों व प्रशासनिक तंत्र आदि का बिना ध्यान किए ही नए जिलों एवं संभाग मुख्यालयों की घोषणा कर डाली। अब इन सभी में पर्याप्त सुधार,व संशोधन की आवश्यकता बनी हुई है। पहले भी इनमें संशोधन व सुधार की मांग विभिनन राजनैतिक दलों तथा आमजन व सामाजिक संगठनों की रही थी, जिसे पूरी तरह से नजरंदाज करके जल्दबाजी में नए जिलों व संभाग मुख्यालयों के गठन सम्बंधी गजट नोटिफिकेशन जारी कर डाला व आवश्यक अधिकारियों को पोस्टिंग तक दे दी गई। इसी कारण चुनाव के दौरान ही आम जनता ने अपनी असंतुष्टि का आईना कांग्रेस को दिखा दिया।

नई सरकार ने समझी जनता की भावनाएं

घिंटाला ने बताया कि अब नई राज्य सरकार ने जनता की भावनाओं को समझते हुए मंत्रीमंडलीय उपसमिति का गठन कर समीक्षा के उपरांत सुधार-संशोधन का मन बनाया है, इसमें विचार करके डीडवाना जिले की सीमाओें का पुनर्गठन करना आवश्यक बन गया है। इसमें शामिल लाडनूं को हटाया जाकर सुजला जिले के नवगठन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। नया सुजला जिला बनाया जाकर उसमें लाडनूं उपखंड की 34 ग्राम पंचायतों के 100 से अधिक गांवो एवं लाडनूं शहरी क्षेत्र को शामिल किया जा सकता है और साथ सुजानगढ, सालासर, छापर, बीदासर आदि क्षेत्रों के कस्बों व गांवों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। इस क्षेत्र के समुचित विकास के लिए यह आवश्यक है। इससे आम जनता को फायदा होगा, और सुजला क्षेत्र यानि कि सुजानगढ, जसवंतगढ़ और लाडनूं को मिलाने से औद्योगिक, राजस्व, प्रशासनिक व मानव संसाधनों सहित भौगोलिक, साहित्यिक, रचनात्मक तथा शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा व जिला बनाने से क्षेत्र के लोगों को रोजगार की बढोतरी के साथ ही यह सुजला जिले का निर्णय सामयिक दृष्टि से भी राज्य व देश के हित में रहेगा।

दशकों पुरानी है ‘सुजला’ जिले की मांग

सुजला जिले की यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले करीब 50 सालों से चल रही है और सुजला जिला बनाओ संघर्ष समिति का इतिहास भी पुराना है। इस समिति ने अब तक रही विभिन्न राज्य सरकारों के समक्ष यह मांग उठाई तथा लगभग सभी राजनेताओं को इस मांग से अवगत करवाया था। इस समिति ने नए ‘सुजला’ जिले के लिए एक नक्शा भी प्रस्तावित किया था। इस संघर्ष में सुजानगढ, लाडनूं दोनों के प्रमुख राजनीतिक लोग सम्मिलित और सक्रिय रहे थे। लाडनूं की नगर पालिका के तीन बार अध्यक्ष रहे स्व. कन्हैयालाल सेठी ने लाडनूं से इस सुजला जिला बनाओ अभियान का संचालन पुरजोर से किया था। तब से लेकर यह मांग निरन्तर जारी है।

सभी सुजला जिले के आंदोलन से जुड़ें

विचार मंच के अध्यक्ष घिंटाला ने बताया के सुजानगढ को जिला मुख्यालय बनाए जाने के बजाए ‘सुजला’ क्षेत्र को महत्व दिया जाना चाहिए तथा जिले का नाम भी ‘सुजला’ ही रखा जाना चाहिए, जो क्षेत्र के दिवंगत नेताओं एवं आमजन की भावनाओं के अनुरूप है। इसलिए नया जिला अब केवल सुजला ही बनाया जाना चाहिए। घिंटाला ने समस्त जनता, जनप्रतिनिधियों व गणय लोगों से आग्रह किया है कि वे सभी इस मुहिम का हिस्सा बने और आने वाली पीढ़ियों के सुखद भविष्य के लिए यह सुनहरा मौका हाथ से न जाने दें और सुजला जिला बनाने व उसमें लाडनूं उपखंड के नजदीकी क्षेत्र को सुजला जिले में शामिल करवाने के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएं।

kalamkala
Author: kalamkala

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