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11 अप्रैल को रिलीज होगी महात्मा ज्योतिबा फुले पर बनी फिल्म ‘फुले’, महात्मा फुले के जमाने और जीवन को जीवन्त बनाया और हूबहू दिखाया

11 अप्रैल को रिलीज होगी महात्मा ज्योतिबा फुले पर बनी फिल्म ‘फुले’,

महात्मा फुले के जमाने और जीवन को जीवन्त बनाया और हूबहू दिखाया

जगदीश यायावर। लाडनूं/ मुम्बई (kalamkala.in)। देश में सामाजिक बदलाव लाने और महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाने वाले महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले दो ऐसी महान शख्सियतें रहीं हैं, जिनके योगदान को देश कभी नहीं भुला पाएगा। लोगों के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाने की दिशा में काम करने वाली पति-पत्नी की इस जोड़ी पर जल्द ही एक बायोपिक बन कर तैयार हुई है। महात्मा फुले और सावित्री फुले ने साझा तौर पर छुआछूत और जातीय भेदभाव के खिलाफ लम्बे समय तक आंदोलन चलाया। उन्होंने ‘सत्य शोधक समाज’ की स्थापना करते हुए पिछड़ी जाति के लोगों के लिए समान अधिकारों के लिए पैरवी और संघर्ष किया था। दोनों का महिलाओं को स्कूली शिक्षा दिलाने के क्षेत्र में भी बहुत योगदान है। महात्मा फुले ने विधवाओं के पुनर्विवाह कराने और गर्भपात को नियंत्रित करने के लिए एक अनाथ आश्रम की भी स्थापना की थी। हिंदी फीचर फिल्म ‘फुले’ के लेखन और निर्देशन की कमान राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अनंत महादेवन के हाथों में रही है।ं प्रतीक गांधी और पत्रलेखा जैसे उम्दा कलाकारों ने समाज सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर मशहूर महात्मा और सावित्री फुले की मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। साल 2024 में 11 अप्रेल को रिलीज होने जा रही है।

फिल्म की शूटिंग के लिए सेट की जरूरत नहीं पड़ी

अभिनेता और फिल्मकार अनंत महादेवन की महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन पर बनी फिल्म आगामी 11 अप्रेल को सिनेमाघरों में प्रदर्शन के लिए तैयार है। उन्होंने साल 2022 में महान समाजसेवी ज्योतिराव फुले की बायोपिक फिल्म फुले की घोषणा की थी। फिल्म को बिना सेट के ही वास्तविकता दर्शाने वाल जगहों की तलाश करके फिल्माया गया हैं। ऐतिहासिक पीरियड फिल्मों के निर्माण में फिल्मकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है कि उन्हें अपनी फिल्म में वही सब कुछ दिखाना होता है, जो उसी दौर के हिसाब से होता है। निर्माता अधिकतर इसके लिए वह सेट, कास्ट्यूम, मेकअप आदि का सहारा लेते हैं। लेकिन यह फिल्म बिना सेट के तैयार की गई है। पीरियड फिल्म होने के बावजूद भी अनंत महादेवन ने इस फिल्म की शूटिंग बिना किसी सेट के की है। वह बताते हैं कि ‘फुले मेरी अब तक की सबसे बड़ी फिल्म है। हमने महाराष्ट्र में कुछ ऐसे स्थान खोजे थे। इसलिए, हमें किसी कृत्रिम सेट की स्थापना करने की जरूरत नहीं पड़ी।’

अभिनेताओं का लुक बना वास्तविक

फिल्म में अभिनेता प्रतीक गांधी ज्योतिराव फुले तथा अभिनेत्री पत्रलेखा उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले की भूमिका में हैं। अनंत कहते हैं, ‘प्रतीक और पत्रलेखा जैसे ही कास्ट्यूम में हमारे सामने आए तो वह ठीक उसी तरह लग रहे थे, जैसा हमने ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले को तस्वीरों में देखा है।’ प्रतीक गांधी को फुले के लुक में देख प्रशंसक भी हैरान रह गए और पत्रलेखा के सावित्री बाई का रूप धरने को भी बहुत प्रशंसा मिली। फिल्म ‘फुले’ के फस्र्ट लुक का अनावरण महात्मा फुले की 195वीं वर्षगांठ के मौके पर गत वर्ष 11 अप्रैल को किया गया। फस्र्ट लुक जारी होते ही लोगों की उत्सुकता बढ़ गयी थी, क्योंकि पोस्टर में प्रतीक और पत्रलेखा हूबहू महात्मा और सावित्री फुले की तरह ही दिख रहे थे।

महात्मा फुले का व्यक्तित्व निभाना मेरे लिए गौरव की बात

ज्योतिबा फुले के किरदार को निभाने को लेकर प्रतीक गांधी कहते हैं, ‘महात्मा फुले का किरदार निभाना और दुनिया के सामने उनके व्यक्तित्व को पेश करना मेरे लिए गौरव की बात है। इस किरदार को निभाना मेरे लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहा, मगर एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व होने के नाते महात्मा फुले के रोल को निभाने को लेकर वे बहुत उत्साहित रहे। प्रतीक कहते हैं, मुझे बेहद खुशी है कि इसके निर्माताओं ने महात्मा और सावित्री फुले द्वारा सामाजिक बदलाव के लिए समर्पित किये गये जीवन के बारे में आज की पीढ़ी को अवगत कराने का बीड़ा उठया है।

नारी-पुरुष समानता का विषय मेरे लिए खास

फिल्म में अपने किरदार से बेहद खुश अभिनेत्री पत्रलेखा ने कहा, ‘मेरी परवरिश मेघालय के शिलॉन्ग में हुई है। यह एक ऐसा राज्य है जहां पर महिलाओं के हकों और फैसलों को पुरुषों से अधिक अहमियत दी जाती है। ऐसे में नारी-पुरुष समानता का विषय मेरे दिल में एक बेहद अहम स्थान रखता है। सावित्री फुले ने अपने पति ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर 1848 में पूरी तरह से घरेलू सहयोग से लड़कियों के लिए एक स्कूल का निर्माण किया था। महात्मा फुले ने विधवाओं के पुनर्विवाह कराने और गर्भपात को नियंत्रित करने के लिए एक अनाथ आश्रम की भी स्थापना की थी। ये फिल्म मेरे लिए एक बहुत खास फिल्म रही है।’
kalamkala
Author: kalamkala

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