मंगलपुरा को ग्राम पंचायत के रूप में बहाल किए जाने एवं नगर पालिका सीमा से निकाले जाने को लेकर सौंपा ज्ञापन,
महिला मोर्चा की वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष सुमित्रा आर्य ने मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन एसडीएम को दिया




लाडनूं (kalamkala.in)। भाजपा महिला मोर्चा की वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष सुमित्रा आर्य ने मुख्यमंत्री के नाम का एक ज्ञापन यहां उपखंड अधिकारी मिथलेश कुमार को देकर लाडनूं तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत मंगलपुरा को नगर पालिका लाडनूं क्षेत्र में समाहित करते हुए वार्डों में सम्मिलित किए जाने का विरोध करते हुए आम ग्रामीणजन की सुविधा और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुये लाडनूं नगरपालिका की सीमा विस्तार से सम्बन्धित प्राप्त प्रस्तावांे में शिथिलन प्रदान करने एवं पूर्व में जारी अधिसूचना व नगर पालिका लाडनूं के वार्डों सम्बंधी ऐसे प्रस्ताव, जिनमें मंगलपुरा ग्राम पंचायत को सम्मिलित किया गया हो, उन सबको निरस्त करवाने की मांग की है। उन्होंने मंगलपुरा ग्राम पंचायत के अन्तर्गत आने वाले सभी 6 गांवों को नगर पालिका क्षेत्र से हटाया जाकर नगर पालिका की सीमा को पूर्ववत ही रखा जाने एवं किए गए बदलाव खारिज करवाने की मांग मुख्यमंत्री से की है। सुमित्रा आर्य ने अपने पत्र में लिखा है कि लाडनूं विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मंगलपुरा को पंचायत राज से निकाला जाकर नगर पालिका लाडनूं के वार्डों में समाहित किए जाने की प्रक्रिया को रोका जाना आवश्यक है। ग्राम पंचायत मंगलपुरा के सभी 6 गांवों के लोग इस प्रक्रिया का शुरू से ही विरोध कर रहे हैं और अब तो पिछले एक माह से अधिक समय से उपखंड कार्यालय लाडनूं के समक्ष धरना-प्रदर्शन भी चल रहा रहा है। पिछले 15 अप्रेल से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन में ग्रामीणों ने धरने व नारेबाजी के अलावा सद्बुद्धि यज्ञ, बालाजी महाराज की सवामणी आदि विभिन्न प्रदर्शन के बाद अब लोग आमरण अनशन भी शुरू कर चुके हैं।
पालिका मुख्यालय से अधिक दूरी व अन्य समस्याएं
ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम पंचायत मंगलपुरा में आने वाले सभी गांवों की भौगोलिक स्थिति नगर पालिका तक पहुंचने के लिए भी अनुकूल नहीं है। मालासी गांव नगरपालिका लाडनूं से करीब 8 किलोमीटर से अधिक दूर है और ग्राम चक गोरेड़ी करीब 9 कि.मी. पड़ता है। खिंदास व नाटास गांव में 5 से 7 किमी दूरी पर हैं। यह दूरियां भारी असुविधाजनक रहेगी। ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले सभी कामों के लिये उन लागों को नगरपालिका जाना भारी पड़ेगा। साथ ही विभिन्न कार्यों की अनुमति के लिये भी ग्रामीणों को नगरपालिका के चक्कर काटने पड़ेंगे। ग्राम पंचायत मंगलपुरा क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से ग्रामीण क्षेत्र है। इनमें बने मकानात दूर-दूर स्थित हैं और आबादी काफी कम है। गांवों में रहने वाले अधिकतर लोग गरीब, दिहाड़ी मजदूर, मनरेगा श्रमिक, किसान व पशु पालक वर्ग के हैं, जिनकी क्षमता टेक्स वहन करने एवं शहरी जीवनशैली अपनाने की नहीं है। मंगलपुरा ग्राम पंचायत के ग्रामीणजन का स्पष्ट रूप से मानना है कि सरकार ने यह प्रस्ताव व निर्णय जनमानस के विपरीत एवं विस्तार के मापदण्ड, मानक, नियम, कायदों के विरूद्ध जाकर तैयार किया गया है। इस सम्बंध में ग्रामीणो पूर्व में कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई। ग्राम पंचायत मंगलपुरा की आम जनता ग्राम पंचायत मंगलपुरा में ही शामिल रहना चाहती है।
मनरेगा सहित अन्य सुविधाओं का अंत होगा
ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम पंचायत मंगलपुरा के ग्रामीणों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम (मनरेगा) और ग्रामीण विकास तथा सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न योजनाओं का लाभ शहरी क्षेत्र में आने के बाद बंद हो जाएगा, यह ग्रामीणों को स्वीकार नहीं है। मनरेगा तो ग्रामीणों के लिये एक बड़ा सहारा है। मंगलपुरा पंचायत में करीब 715 जॉब कार्ड्स में 1540 लोगों के नाम दर्ज हैं। उन सबकी आजीविका बंद हो जाएगी। साल में 100 दिन काम करने वाले श्रमिकों को श्रमिक कल्याण बोर्ड की विभिन्न योजनाओं से मिलने वाला लाभ भी बंद हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में लागू सामाजिक सुरक्षा व कल्याण की अन्य योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिलना बंद हो सकता है। आर्य ने लिखा है कि ग्राम पंचायत को नगर पालिका क्षेत्र में सम्मिलित किए जाने से किसान वर्ग के लोगो के खेतों में पानी के टांके बनाये जाने, कृषि उपकरणों पर सब्सिडी का मिलना आदि बंद हो जाएंगे। साथ ही नगरपालिका में शामिल होने पर सभी योजनाओं से मजदूर, दलित, पिछड़े, वंचित व किसान वर्ग के लोग वंचित हो जायेंगे। पंचायत की तरफ से मिल रही सभी प्रकार की सुविधाएं बंद हो जाएंगी। शहर घोषित होने से गांव के लोगों से कई तरह के टैक्स वसूले जायेंगें। उन पर नगरीय विकास कर एवं हाउस तथा विद्युत एवं वाटर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। उन्हें बिजली मंहगी मिलेगी।






