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नगर निकायों व पंचायत राज के चुनावों में रुकावट की आहट? बनी है अजीब ऊहापोह की स्थिति, असमंजस में लग रही सरकार

नगर निकायों व पंचायत राज के चुनावों में रुकावट की आहट?

बनी है अजीब ऊहापोह की स्थिति, असमंजस में लग रही सरकार

✍️ भूपेंद्र ओझा वरिष्ठ पत्रकार।
‌राजस्थान में नगर निकाय और पंचायत राज पद के चुनाव समय पर सम्पन्न होने की उम्मीद बेहद कम है। पंचायत राज पदों पर तथा नगर निकाय में ओबीसी का लाटरी से आरक्षण निर्धारित करने से सवर्ण जाति को पंचायत राज पदों, नगर निकाय में अन्य वर्ग के मुकाबले कम प्रतिनिधित्व मिलने, पदों से वंचित रहने के मद्देनजर दायर की गई एक याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने तकरीबन छः महीने पहले सभी राज्यों को अपने प्रदेश में अलग से एक पृथक आयोग गठित कर ट्रिपल टेस्ट स्तर पर सभी गांवों, नगर मे जाकर वहां, राजनैतिक पिछड़ापन, ओबीसी वर्ग के मौजूदा समय पंचायत राज तथा नगर निकाय पदों पर निर्वाचित होने की जानकारी जुटाकर एक रिपोर्ट तैयार करने, राज्य सरकार के पृथक आयोग ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक नगर एवं गांव में पंचायत राज पदों और नगर निकाय में ओबीसी वर्ग को आरक्षण का निर्धारण करने के निर्देश दिए। साथ ही पृथक आयोग के ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट देने, राज्य सरकार को पृथक आयोग रिपोर्ट के मद्देनजर प्रत्येक नगर एवं गांव में ओबीसी को आरक्षण देने के आदेश दिए हैं। याने पृथक आरक्षण आयोग की ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट नहीं तो पंचायत राज एवं नगर निकाय राजनैतिक पदों पर ओबीसी आरक्षण नहीं, नगर निकाय और पंचायतराज पदों पर चुनाव नहीं?
मौजूदा समय में पंचायत राज तथा नगर निकाय में ओबीसी को 21 फीसदी आरक्षण प्रदान किया हुआ है और ओबीसी को लाटरी से आरक्षण निर्धारित हो रहा है।प्रशासनिक तथा राजनैतिक दलों के आला सूत्रों के मुताबिक पंचायत राज एवं नगर निकाय पदों पर राजस्थान में मौजूदा समय करीब 40 फीसदी पर ओबीसी वर्ग के व्यक्ति निर्वाचित हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से पृथक आयोग गठित नहीं हुआ

राजस्थान में प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अब तक अलग से एक पृथक आयोग गठित नहीं किया है। जबकि पड़ौसी राज्य हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र ने सुप्रीम कोर्ट निर्देश पर अपने राज्य में एक अलग से पृथक आयोग गठित कर दिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पृथक आयोग प्रदेश में प्रत्येक नगर, गांव में जाकर वहां किस वर्ग का कितना राजनैतिक पिछड़ापन है? इस आधार पर प्रत्येक नगर, गांव में ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए? पृथक आयोग को ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट बाबत प्रदेश में सभी कस्बों, गांवों, नगर, महानगर में जाकर मौजूदा समय, ओबीसी वर्ग तथा अन्य समुदाय वर्ग के पंचायत राज, नगर निकाय में राजनैतिक पदों पर निर्वाचित होने, आगे ओबीसी को कितना आरक्षण लाभ देने की जानकारी जुटाने में कितना समय लगेगा? इसका आप स्वयं अंदाज लगा सकते हैं।आश्चर्यजनक बात देखिए, कि राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मद्देनजर करीब एक साल पहले राज्य पंचायत सचिव, नगर निकाय सचिन के साथ बैठक कर, प्रदेश में एक अलग से शीघ्र पृथक आयोग गठित करने की हिदायत दी। जिससे कि राज्य में समय पर नगर निकाय और पंचायत राज पदों के चुनाव कराए जा सकें। यहां तक कि तात्कालिक मुख्य सचिव को भी पत्र भेज इससे इस दिशा में शीघ्र कार्यवाही शुरू करने से अवगत कराया था। पर, अभी तक राजस्थान सरकार की नींद नहीं खुली और नतीजे में अब तक अलग से एक पृथक आयोग गठित नहीं होने के संकेत मिले हैं।

49 निकायों का कार्यकाल पूर्ण और 86 नई नगर पालिकाओं का परिसीमन जरूरी

राजस्थान में इस नवंबर माह में करीब 49 नगर निकाय का कार्यकाल पूरा हो रहा है और पिछले अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में तकरीबन 86 पंचायतों की जगह 86 नई नगर पालिका गठित की थी। नई 86 नगर पालिकाओं में भी अबतक एक बार भी पार्षद, अध्यक्ष का निर्वाचन नहीं कर , पंचायत सरपंच को ही नगर पालिका का अध्यक्ष और पंच को पार्षद की जिम्मेदारी सौंप दी थी। यूडीएच महकमे के आला सूत्रों के मुताबिक यूडीएच मंत्री ने नई 86 नगर पालिकाओं का परिसीमन करने के निर्देश प्रदान कर दिए हैं। राजस्थान में अक्टूबर से दिसंबर 2024 तक करीब 56 नगर पालिका, नगर परिषद के तथा अक्टूबर से दिसंबर 2025 में 56 नगर पालिकाओं का, जनवरी से फरवरी 2026 में तकरीबन 90 नगर पालिका व नगर परिषद का कार्यकाल पूरा हो रहा है। याने नवंबर 2024 से दिसंबर 2025 से पहले 100 से अधिक नगर निकाय के चुनाव कराने हैं। जबकि, एक पृथक आयोग गठित नहीं होने से नगर निकाय में आगे कितना ओबीसी वर्ग को आरक्षण प्रदान किया जाये? इसकी ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट आधार पर प्रदेश के सभी नगर निकाय में तथा कस्बों गांवों में पंचायत राज में राजनैतिक पदों पर सामान्य वर्ग के मुकाबले ओबीसी वर्ग का आरक्षण निर्धारित होगा।

यूडीएच मंत्री ने कहा है, सभी का होगा दुबारा सीमांकन

यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने गुजरे दिन मंगलवार को पत्रकारों को कहा है, प्रदेश की निकायों का दोबारा सीमांकन किया जायेगा। जबकि, भारत जनगणना आयोग रजिस्ट्रार ने करीब छः महीने पहले नौवीं दफे अपने पूर्व आदेश को विलोपित कर 30 जून 2024 तक सभी राज्यों को जिला, तहसील, कस्बों, गांवों, नगर, महानगर की सीमाओं में परिवर्तन करने, पुन: सीमाओं का निर्धारण करने की छूट प्रदान की है। अब अगर भारत जनगणना आयोग ने अपने आदेश 30 जून 2024 तक सीमाओं का निर्धारण सूनिश्चित करने के आदेश में आगे संशोधन कर जिला, तहसील, कस्बों, गांवों, नगर, महानगर सीमाओं को पुन: निर्धारण, आगे भी परिसीमन, सुनिश्चित करने की इजाजत नहीं दी तो, क्या करीब एक पखवाड़े में प्रदेश की नई 86 नगर पालिकाओं का तथा इसके बाद राज्य की अन्य नगर निकाय के फिर सीमांकन का काज शीघ्र मुकम्मल हो सकेगा?

दो सालों में होने वाले चुनावों पर आरक्षण निर्धारण की तलवार लटकेगी

राजस्थान में कोविड महामारी में बंदिश के जनवरी 2020 से फरवरी, मार्च 2020 तक पंचायत राज पदों के चुनाव मुकम्मल हुए थे। इससे पंचायत राज पदों का पांच साल कार्यकाल पूरा करने वाली में जनवरी 2025 में करीब 6756 पंचायतों का, मार्च 25 में 704, अक्टूबर 2025 में 3847 पंचायतों में सरपंच, पंच का कार्यकाल पूरा हो रहा है। साथ ही नवंबर-दिसंबर 2025 में 21 जिलों में 636 जिला परिषद सदस्य, 222 पंचायतों में 222 प्रधान, उपप्रधान, 4371 पंचायत समिति सदस्यों का, अगस्त से अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक 12 जिलों में जिला प्रमुख, 378 जिला परिषद सदस्य तथा 130 पंचायत समिति में 130 प्रधान उपप्रधान और करीब 2524 पंचायत समिति सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। याने समय पर चुनाव कराने में आगामी दो साल में पंचायत राज पदों के चुनाव होने हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से एक पृथक आयोग द्वारा ट्रिपल टेस्ट छानबीन, जानकारी कर प्रत्येक नगर, गांव में राजनैतिक पिछड़ापन रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश के प्रत्येक नगर, गांव में नगर निकाय और पंचायत राज पदों में अब ओबीसी आरक्षण निर्धारित करना आवश्यक है।

✍️ भूपेंद्र ओझा, वरिष्ठ पत्रकार।
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Author: kalamkala

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