Search
Close this search box.

Download App from

Follow us on

एकता, अहिंसा व सद्भाव के रास्ते पर चलें, व्यक्तिवाद छोड़ मिलजुल कर रहें- आरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत, महावीर स्वामी का 2550 वां निर्वाण वर्ष कल्याणक महोत्सव में सरसंघचालक ने तीर्थंकर को किया नमन, समझाई सत्य-अहिंसा की अहमियत

एकता, अहिंसा व सद्भाव के रास्ते पर चलें, व्यक्तिवाद छोड़ मिलजुल कर रहें- आरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत,

महावीर स्वामी का 2550 वां निर्वाण वर्ष कल्याणक महोत्सव में सरसंघचालक ने तीर्थंकर को किया नमन, समझाई सत्य-अहिंसा की अहमियत

 कलम कला ब्यूरो। नई दिल्ली (kalamkala.in)। भगवान महावीर स्वामी के 2550वें निर्वाण वर्ष के उपलक्ष्य में सोमवार 12 फरवरी को दिल्ली के विज्ञान भवन में कल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया। इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि एकता, अहिंसा व सद्भाव के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी के साथ सौहार्द्रपूर्वक रहें, अहिंसा का पालन करें, धैर्य रखें, चोरी न करें, यही ज्ञान का मूल आधार है। महावीर स्वामी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। सभी अपने है। सुख जड़ पदार्थों में नहीं है। तुमको अकेले को एक व्यक्ति को जीना नहीं है, व्यक्तिवाद को छोड़ो। सबके साथ मिलजुल कर रहो। अहिंसा से चलो। संयम करो। चोरी मत करो। दूसरे के धन की इच्छा मत करो यह सारी बातें जीने का तरीका जो बताया गया, वह शाश्वत है। सरसंघचालक ने कहा कि हमारा समाज पूर्ण सत्य की खोज के लिए अलग-अलग रास्ते चुनता है। रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक है। हम नित्य एकात्मता स्त्रोत कहते हैं, जिसमें- वेद, पुराण, सभी उपनिषद्, रामायण, महाभारत, गीता, जैनग्रंथ, बौद्ध, त्रिपिटक तथा गुरुग्रन्थ साहिब में संतों की वाणी, यह भारत की श्रेष्ठ ज्ञान निधि हैं। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में शाश्वत सुख देने वाला सत्य सबको चाहिए था, लेकिन दुनिया और भारत में यह अंतर रहा कि बाहर की खोज करके दुनिया रुक गई और हमने बाहर की खोज होने के बाद अंदर खोजना प्रारंभ किया और उस सत्य तक पहुंच गए। वह सत्य है लेकिन देखने वाले की दृष्टि है। पानी का गिलास है कोई कहता है यह आधा भरा है, दूसरा कहता है आधा खाली है, तीसरा कहता है पानी कम है, चैथा कहता है गिलास बड़ा है। वर्णन अलग है मगर वस्तु एक ही है स्थिति एक ही है।

जैन साध्वी बोली, हम सब बेशक हिन्दू हैं

इस आयोजन में सकल जैन समाज के पूजनीय भगवंत साधु संत एवं साध्वीगण की उपस्थिति रही। राष्ट्रसंत परम्पराचार्य प्रज्ञसागर मुनिराज, चतुर्थ पट्टाचार्य सुनील सागर मुनिराज, प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि, आचार्य महाश्रमण की विदुषी शिष्या साध्वी अणिमा एवं महासाध्वी प्रीति रत्ना की विशिष्ट उपस्थिति रही और उन्होंने भी अपने विचार प्रकट किए। इस अवसर पर साध्वी ने हिन्दू का अर्थ ‘हिंसा से दूर रहने वाला’ बताया और कहा कि हम सब हिन्दू हैं, बेशक हम अलग-अलग मत को मानते हैं। हमारा राष्ट्र सर्वोपरि है।

आरएसएस ने सत्य, अहिंसा, सदाचार का संरक्षण किया

आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि जब प्यास बहुत लगती है, तो नीर की आवश्यकता होती है, इसी तरह अशांति और असहिष्णुता के वातावरण में ‘महावीर‘ की आवश्यकता होती है। सत्य, अहिंसा और सदाचार हमारे देश में 24 तीर्थंकरों तथा राम, कृष्ण, बुद्ध और महावीर से आयी और इसकी संरक्षणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा की गई। डॉ. राजेन्द्र मुनि महाराज ने कहा कि किसी व्यक्ति को जानने के लिए दो पक्ष होते हैं जीवन पक्ष और दर्शन पक्ष, महावीर स्वामी के दोनों ही पक्ष बड़े उत्तम हैं। भगवान महावीर स्वामी ने स्वयं का भी उद्धार किया और संसार का भी उद्धार किया।
kalamkala
Author: kalamkala

Share this post:

खबरें और भी हैं...

प्रदेश का सबसे शोषित वर्ग है पत्रकार, सरकार की पूरी उपेक्षा का है शिकार, अधिस्वीकरण पर पैसे वालों का अधिकार, सब सुविधाओं से वंचित हैं सात हजार पत्रकार, आईएफडब्ल्यूजे के प्रदेशाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह ने बयां की हकीकत 

Read More »

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल

error: Content is protected !!

We use cookies to give you the best experience. Our Policy