लाडनूं की नगर पालिका में यह क्या हो रहा है?- 7 ‘घर में नहीं दाने- अम्मां चली भुनाने’, लाडनूं नगर पालिका ने डीएलबी के आदेशों की अवहेलना करते हुए बिना पर्याप्त कोष के भी निकाल डाली सवा करोड़ की निविदाएं, डीडीआर ने शुरू की जांच, 7 दिनों में मांगी रिपोर्ट और दस्तावेज

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लाडनूं की नगर पालिका में यह क्या हो रहा है?- 7

‘घर में नहीं दाने- अम्मां चली भुनाने’,

लाडनूं नगर पालिका ने डीएलबी के आदेशों की अवहेलना करते हुए बिना पर्याप्त कोष के भी निकाल डाली सवा करोड़ की निविदाएं,

डीडीआर ने शुरू की जांच, 7 दिनों में मांगी रिपोर्ट और दस्तावेज

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग द्वारा सभी नगर निकायों को आदेशित किया था, जिसके अनुसार नगरपालिका के पास पर्याप्त कोष उपलब्ध होने पर ही कोई टेंडर या कार्यादेश जारी किया जा सकता है। इसके बावजूद नगर पालिका लाडनूं में दो निविदाएं बिना पर्याप्त कोष होते हुए भी जारी करने को लेकर पार्षदों ने इसका विरोध किया और पार्षद संदीप प्रजापत ने इसकी शिकायत डीडीआर अजमेर से की। इस शिकायत पर डीडीआर ने जांच शुरू की है और नगर पालिका लाडनूं के ईओ से पूरी रिपोर्ट दस्तावेजों सहित 7 दिनों के भीतर मांगी है। गौरतलब है कि इन दो निविदाओं में कुल 20 काम करवाए जाने हैं, जिनकी अनुमानित लागत सवा करोड़ रुपए होते हैं।

डीडीआर द्वारा दिए गए जांच सम्बंधी आदेश

स्थानीय निकाय विभाग के उपनिदेशक (क्षेत्रीय) अजमेर भावना गर्ग (आरएएस) ने अपने आदेश क्रमांकः उनिक्षे. /स्था.नि.वि./अज./जांच/2024 / 6865 दिनांक : 9/7/2024 द्वारा नगरपालिका लाडनूं के अधिशाषी अधिकारी को राजकोष नहीं होने के बावजूद टेंडर लगाने के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट मय दस्तावेजात के मांगी है। आदेश के साथ उन्होंने वार्ड सं. 38 के संदीप प्रजापत की प्राप्त शिकायत की प्रति भिजवाते हुए लिखा है कि इस शिकायत में वर्णित तथ्यों के संबंध में तथ्यात्मक टिप्पणी सहित समस्त सुसंगत दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति 7 दिवस के भीतर इस कार्यालय को भिजवाया जाना सुनिश्चित करें।

संदीप प्रजापत की थी यह शिकायत

पार्षद संदीप प्रजापत ने डीडीआर अजमेर को एक शिकायत भेजी थी, जिसमें नगरपालिका लाडनूं मे राजकोष नही होने के बावजूद टेंडर लगाने के संबंध में बताया गया कि डीएलबी के आदेशानुसार नगर निकाय राजकोष नहीं होने पर टेंडर प्रक्रिया नहीं कर सकते हैं। इसके बावजूद लाडनूं नगरपालिका में दिनांक 18 और 20 जून को निविदाएं लगाई गई, जो नियमों के विरुद्ध थीं। पार्षद प्रजापत ने इस पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। गौरतलब है कि पार्षद राजेश भोजक द्वारा करीब 10 लाख के पानी के टैंकरों की निविदा पर भी सवाल उठाते हुए जांच की मांग की, जिस पर भी डीडीआर ने 7 दिनों में रिपोर्ट और दस्तावेज मांगे हैं। गौरतलब है कि पार्षद राजेश भोजक द्वारा करीब 10 लाख के पानी के टैंकरों की निविदा पर भी सवाल उठाते हुए जांच की मांग की, जिस पर भी डीडीआर ने 7 दिनों में रिपोर्ट और दस्तावेज मांगे हैं।

राज्य सरकार ने लगाई थी बिना कोष काम करवाने पर यह रोक

स्वायत्त शासन विभाग राजस्थान के निदेशक व संयुक्त सचिव सुरेश कुमार ओला ने आदेश क्रमांक- प.6 (च) (E-12660) स्वी/लेखा/डीएलबी/2023/बीकानेर/593 दिनांक : 03/06/2024 में राज्य के समस्त नगर निगमों, नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं के आयुक्त व अधिशाषी अधिकारियों को आदेशित किया गया कि राज्य की नगरीय निकायों द्वारा कार्यादेश जारी किये जाने से पूर्व निधि की उपलब्धता सुनिश्चित की जावे। आदेश में बताया गया है कि राज्य की नगरीय निकायों द्वारा निकाय क्षेत्रों में विकास कार्यों, विभिन्न सामग्री की आपूर्ति, वाहन/ उपकरण एवं अन्य आवश्यक कार्यों हेतु विभिन्न संस्थाओं/ संवेदकों/ फर्मों को कार्यादेश जारी किये जाते हैं, परन्तु विभाग के ध्यान में लाया गया है कि राज्य की कतिपय नगरीय निकायों द्वारा कार्यादेश तो जारी किये जा रहे हैं, परन्तु निकायों की कमजोर आर्थिक स्थिति अथवा निधि की अनुपलब्धता दर्शाते हुए सम्बन्धित संस्थाओं/ फर्मों/ संवेदकों को समय से भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे अनेक न्यायिक दायित्व उत्पन्न हो रहे हैं। अतः समस्त आयुक्त/ अधिशाषी अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वे कार्यादेश जारी किये जाने से पूर्व कार्य पर होने वाले व्यय के लिए निकाय कोष में राशि की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें। केन्द्र सरकार/ राज्य सरकार से आर्थिक सहायता/ अनुदान की प्रत्याशा में कोई कार्यादेश जारी नहीं किया जावे। नगरीय निकायों द्वारा जारी कार्यादेशों के क्रम में कार्य समाप्ति के उपरान्त सम्बन्धित फर्म/संस्था/व्यक्ति को भुगतान नही किये जाने से उत्पन्न होने वाले विधिक/ न्यायिक दायित्वों/ ब्याज/ पैनल्टी/ शास्ति आदि के भुगतान की स्थिति में निकाय के कार्यकारी अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित की जावेगी।

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Author: kalamkala

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