लाडनूं के धूड़ीला में अवैध शराब सहित  कोलिया का युवक गिरफ्तार, आखिर समाज से कब खत्म होगा यह अवैध शराब का कैंसर

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लाडनूं के धूड़ीला में अवैध शराब सहित  कोलिया का युवक गिरफ्तार,

आखिर समाज से कब खत्म होगा यह अवैध शराब का कैंसर

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। स्थानीय पुलिस ने धूड़ीला बस स्टेंड पर अवैध रूप से शराब बेचने की फिराक में कोयल निवासी युवक को गिरफ्तार करके उससे अवैध ढोला मारू सादा देशी शराब के 68 पव्वे जब्त किए हैं। पुलिस ने पकड़े गए मुलजिम देवेन्द्रसिह (21) पुत्र दिलीपसिह राजपूत निवासी कोलिया के विरुद्ध धारा 19/54 आबकारी अधिनियम 1950 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सहायक पुलिस निरीक्षक राजेन्द्र गिला मय कान्स्टेबल रामचन्द्र सरकारी वाहन के साथ गश्त व लोकल स्पेशल एक्ट की कार्यवाही के लिए 19 मार्च को सायं निम्बी जोधां से रवाना होकर जब रताऊ के पास पहुंचे, तो रात्रि 9.30 बजे करीब खास मुखबीर से इतला मिली कि बस स्टेंड धुड़ीला पर एक व्यक्ति काले रंग का पायजामा पहने है और उसके चेहरे पर काली दाढ़ी है, वह युवक वहां सफेद रंग का कट्टा लेकर जा रहा है, जिसमें अवैध सादा शराब के पव्वे भर हैं और कहीं बैचने की फिराक में जा रहा है। इस पर पुलिस ने रताऊ से एफएसटी में लगे जाप्ता के कांस्टेबल गिरधारी को साथ लेकर रवाना हुए। पुलिस की गाड़ी देख वह युवक भागने लगा। इस पर पुलिस ने उसे घेरा देकर रोक लिया। एएसआई राजेन्द्र गिला ने उससे नाम पता पूछा और उसने अपने पास के सफेद कट्टे में घबराते हुए घरेलु सामान बताया, लेकिन कट्टे को चैक करने पर उसमें से अवैध सादा देशी ढोला मारू के 68 पव्वे भरे मिले, उसके पास इतनी मात्रा में अवैध शराब रखने का किसी प्रकार का कोई लाईसेन्स व परमिट नहीं मिला। इस पर जब्ती व गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

‘कलम कला’ – विचारणीय पहलु

पुलिस अनेक बार कार्रवाई करके अवैध शराब सहित मुलजिमानों को पकड़ती है, जिनकी जमानत हो जाती है और कुछ मात्रा सीज करके सरकारी मालखाने में डाल दी जाती है। पुलिस के उच्च अधिकारी बहुत बार इसके लिए अभियान चलाने के निर्देश देते रहते हैं। अफसोस यह है कि इन सब अभियानों से कोउ नियंत्रण या रोक का असर नजर नहीं आता। आखिर ऐसा क्यों? पुलिस गश्त नियमित होती है, धर-पकड़ में नए-नए मुलजिम सामने आते हैं। चुनाव और त्यौहारों के अवसर पर तो यह अवैध धंधा रफ्तार पकड़ लेता है, लेकिन कंट्रोल क्यों नहीं होता, यह सवाल सदैव ज्वलंत ही रहता है। क्या जांच के बावजूद पुलिस उसके मूल सप्लायर के पास नहीं पहुंच पाती? क्या अवैध विक्रय के लिए अवैध रूप से नए-नए लोगों को तलाश कर उन्हें अपराधी बनाने वाले ऐसे आरोपी सप्लायर के विरुद्ध पुलिस कोई सक्षम कार्रवाई करने में, उसे जगजाहिर करने के लिए असमर्थ है या कोई बड़ी रुकावट है? अगर ऐसा है तो उन निर्देश देने वाले बड़े अधिकारियों को यह बात पहुंचाई क्यों नहीं जाती? खैर जो भी हो, लेकिन पुलिस के बावजूद समाज से यह कैंसर समाप्त होने के बजाय बढता ही जा रहा है।

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Author: kalamkala

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