अन्तर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के उपलक्ष में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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देशी मोटे अनाज से स्वास्थ्य व शुद्ध जीवन शैली का विकास होता है- प्रो. जैन

लाडनूं। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित वर्ष 2023 के कार्यक्रम ‘अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज’ के सम्बंध में  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा सूरजमल भूतोडिया उच्च माध्यमिक राजकीय कन्या विद्यालय में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में देशी एवं पौष्टिक मोटा अनाज की विशेषताओं, गुणों एवं भोज्य-प्रयोग में उपयोगिता के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मोटे अनाज एवं स्वस्थ जीवन शैली जीने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जिस प्रकार का भोजन ग्रहण करते है, उसी प्रकार का हमारा मन, शरीर बनता है। क्योंकि संतुलित आहार का जीवन शैली पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए अपनी दिनचर्या में सभी को मोटे अनाज युक्त एवं चोकर युक्त भोजन को शामिल करना चाहिए।

खाद्य पोषण के साथ बढेगी किसानों की आजीविका

समन्वयक डॉ. सरोज राय ने अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स ईयर मनाए जाने के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा कहा कि अंतर्राष्ट्रीय इयर ऑफ मिलेट्स समर्थित संकल्प का उद्देश्य समाहित करने से वैश्विक जागरूकता, खाद्य सुरक्षा पोषण आजीविका सुरक्षित करना, किसानांे की आय बढ़ाना, गरीबी उन्मूलन और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देने की दृष्टिकोण से प्रभावी है, इसलिए भोजन में इन पोषक अनाजों को शामिल करने से हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इसके अलावा विभिन्न वक्ताओं ने राजस्थान प्रांत के बतौर मोटे अनाजों बाजरा, मोठ, मूंग, ज्वार आदि के गुणों एवं उपयोगिता व महत्व के बारे में बताया। उन्होंने देश और वातावरण के अनुरूप हवा-पानी होने और तदनुरूप ही खानपान की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही भाषण, कविता, लघु नाटिका आदि विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। मोटे अनाज के प्रयोग के प्रति जागरूकता बढाने के लिए रैली भी निकाली गई। कार्यक्रम में भूतोड़िया स्कूल के सभी शिक्षकवर्ग एवं विद्यार्थियों के अलावा जैविभा के डॉ. अमिता जैन, डॉ. आभा सिंह, प्रमोद ओला, डा. रविन्द्र सिंह राठौड़ आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अभिलाषा स्वामी ने किया।

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Author: kalamkala

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