कवि पानी में आग लगा लेते हैं, और आग में बाग लगा लेते हैं- मुनिश्री जयकुमार, लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित

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कवि पानी में आग लगा लेते हैं, और आग में बाग लगा लेते हैं- मुनिश्री जयकुमार,

लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य महाश्रमण आॅडिटोरियम में कवि सम्मेलन का आयोजन गुरूवार को मुनिश्री जयकुमार के सान्निध्य एवं कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में किया गया। कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से सबको हंसाया, गुदगुदाया, सहलाया, वीरता से ओतप्रोत किया, धार्मिकता से अभिभूत किया और सबको मोहित कर दिया। मुनिश्री जयकुमार ने सम्मेलन में कवि और कविताओं का काव्य के माध्यम से सटीक चित्रण किया औैर लेखन में शब्दों का जादू बताया। उन्होेंने कहा, ‘कवि पानी में आग लगा लेते हैं, और आग में बाग लगा लेते हैं। कवियों के शब्दों की शक्ति विचित्र होती हैं, वे शब्दों से नाग को बांध देते हैं।’ उन्होंने अपनी कविता प्रस्तुत करते हुए कहा, ‘कवि कहना उसे पसंद मुझे, जिसकी कविता में प्राण भरा हो। पीड़ा-पीड़ा हो जिसमें, संस्कृति का सम्मान भरा हो।’ अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने सम्मेलन में सम्मिलित कवियों को गंभीर और अनुशासित बताया तथा कहा कि मुनिश्री का मंच होने से यहां गंभीरता व अनुशासन समाहित रहा।

गलत पढाया गया कि रोशनी सिर्फ सीधी रेखा में चलती है

कवि सम्मेलन में कवि चिराग जैन ने कवि सम्मेलन को संवेदनाओं को मानव मन तक पहुंचाने का माध्यम बताया और अपने सम्बोधन में कहा कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय को पुरातन परम्पराओं को सहेजने का कार्य कर रही है। कवि चिराग ने मोबाईल का युवा पीढी में बढते इस्तेमाल को अभिभावकों के लिए चिंताजनक बताते हुए कटाक्ष किया कि ‘आजकल मां-बाप की एक ही टेंशन है, बेटा डाउनलोड क्या कर रहा है और बेटी अपलोड क्या कर रही है।’ उन्होंने बेटी बचाओ, बेटी पढाओ नारे की क्रियान्विति को फिजीक्स के उद्धरण के साथ बेटी को रोशनी बताते हुए इस प्रकार अभिव्यक्त किया, ‘पहाड़ की घुमावदार पगडंडी पर स्कूल जा रही है लड़कियां। बचपन में गलत पढाया गया कि रोशनी सिर्फ सीधी रेखा में चलती है।’ उन्होंने राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण के मूच्र्छित होने का भाव-विभोर कर देने वाला काव्य प्रस्तुत करते हुए खूब तालियां बटोरी।

जो खुद को जीत लेते हैं, वही महावीर बनते हैं

कवि मनवीर मधुर (मथुरा) ने वीर रस से भरपूर एवं सांस्कृतिक ओज को जगाने वाले गीत प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा, ‘बरबादी से जंग लड़ी है, तब आबाद हुए हैं। रोम-रोम में इंकलाब भरा है, फिर आजाद हुए हैं।’ इसी प्रकार जीवन केे लिए आदर्श प्रस्तुत करते हुए उन्होंने अपनी कविता में कहा, ‘स्वार्थ सोच में घर कर ले, तो जीवन रण हो जाता है। अपने ही विपरीत धरा का, तब कण-कण हो जाता है।’ उन्होंने भगवान महावीर और अहिंसा के संदेश को भी अपनी कविता में चित्रित किया। कवि मधुर ने कहा, ‘जहाँ को जीत कर तुम सिकंदर बन तो जाओगे। पर जो खुद को जीत लेते हैं, वही महावीर बनते हैं।’ कवयित्री मनीषा शुक्ला ने महिला-पुरूष एवं पति-पत्नी के सम्बंधों में आने वाले खट्टे-मीठे प्रसंगों के चुटकुले प्रस्तुत करके खूब ठहाके लगवाए और तालियां बटोरी। उन्होंने प्रेम के अर्थ को प्रकट करने वाला गीत प्रस्तुत करके भी वाह-वाही लूटी।

खामोश बैठे रहते हैं बेटों के सामने

कवि सचिन अग्रवाल अलीगढ ने गजलों और शेरो-शायरी प्रस्तुत करकेे श्रोताओं की दाद ली। उन्होंने शेर सुनाते हुए कहा, ‘अब मैं भी बेगुनाह हूं रिश्तों के सामने, मैंने भी झूठ कह दिया झूठों के सामने।’ और ‘रिश्ता छुपाया जाता तो होता बड़ा मलाल, मैंने उसे देख के चेहरा छुपा लिया।’ बेटे और बेटी की परिवार में भूमिका के बारे में एक पिता के शब्दों को उन्होंने इस प्रकार व्यक्त किया, ‘वो रौब वो हुक्म गए बेटियों के साथ, खामोश बैठे रहते हैं बेटों के सामने।’ उन्होंने अपने गीतों को इस प्रकार से बताया, ‘गीत सड़कों पर हमसे गाए नहीं जाते। हम तो वो हैं जो होठों पे सजाए जाते।‘ कार्यक्रम में राजेश कोठारी, राजकुमार चैरड़िया, संजय शर्मा, पार्षद रेणु कोचर, सुमन नाहटा एवं तेरापंथ महिला मंडल की महिलाएं, जैविभा विश्वविद्यालय के सभी स्टाफ सदस्य एवं विद्यार्थी आदि उपस्थित रहे। सम्मेलन का संचालन डा. युवराज सिंह खंगारोत एवं चिराग जैन ने किया।

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Author: kalamkala

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